Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

विवेक रामास्वामी बनाम निक्की हेली... भारतीय मूल के अमेरिकियों के बीच किसे मिल रहा ज्यादा समर्थन?

Vivek Ramaswamy Vs Nikki Haley: अमेरिका में रहने वाले एक मध्यमार्गी डेमोक्रेट और नगर परिषद सदस्य, सुरेश रेड्डी, रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के प्राथमिक चुनाव को गर्व और निराशा के मिश्रण के साथ देख रहे हैं।

दक्षिण भारत के मूल निवासी, सुरेश रेड्डी जब अपनी पत्नी गंगा रेड्डी के साथ सितंबर 2004 में डेस मोइनेस उपनगर में बसे थे, उस वक्त उस क्षेत्र में बसे भारतीय अमेरिकी परिवारों की संख्या को उंगलियों पर गिन सकते थे। उस समय केवल एक भारतीय अमेरिकी ने कांग्रेस में सेवा की थी, और किसी ने भी व्हाइट हाउस की रेस में शामिल होने हिम्मत नहीं की थी।

Vivek Ramaswamy Vs Nikki Haley

अब, अमेरिका के इतिहास में इस बार पहली बार है, जब दो भारतीय अमेरिकी, निक्की हेली और विवेक रामास्वामी, राष्ट्रपति पद के गंभीर दावेदार हैं, जो नियमित रूप से अपने माता-पिता की अप्रवासी जड़ों का हवाला देते हैं और ये बातें सुरेश रेड्डी को काफी उत्साहित भी करती हैं, लेकिन ये दोनों उम्मीदवार रिपब्किल पार्टी से नामांकन चाहते हैं, लिहाडा डेमोक्रेटिक पार्टी के एक सदस्य सुरेश को काफी निराशा होती है और उनके लिए, इन दोनों की उम्मीदवारी को लेकर जश्न मनाना मुश्किल हो जाता है।

सुरेश रेड्डी कहते हैं, कि "मुझे वास्तव में गर्व है।" लेकिन, "मैं बस यही चाहता हूं, कि उनके पास एक बेहतर संदेश हो।"

क्या कहा है प्यू रिसर्च का सर्वे

प्यू रिसर्च सेंटर के विश्लेषण के अनुसार, वोट देने के पात्र अनुमानित एक करोड़ 34 लाख एशियाई-अमेरिकियों में से करीब 21 लाख यानि करीब 16 प्रतिशत भारतीय मूल के हैं, जो चीनी और फिलिपिनो अमेरिकियों के बाद एशियाई मूल की तीसरी सबसे बड़ी आबादी है।

2021 अमेरिकी सामुदायिक सर्वेक्षण (प्यू के अनुसार) भारतीय अमेरिकी किसी भी अन्य एशियाई अमेरिकी उपसमूह की तुलना में डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ ज्यादा झुकाव रखते हैं।

लेकिन, फ्लोरिडा, पेंसिल्वेनिया, मिशिगन और नेवादा जैसे जगहों में भारतीय समुदाय के लोग किसी भी उम्मीदवार को एकतरफा जीत दिलाने की काबिलियत रखते हैं।

लिहाजा, भारतीय अमेरिकियों के बीच विवेक रामास्वामी और निक्की हेली को लेकर काफी तगड़ी बहस चल रही है। साक्षात्कारों में, कई लोगों ने उनके उत्थान को ऐसे समय में एक राजनीतिक जीत के रूप में वर्णित किया, जब भारतीय अमेरिकी चिकित्सा, तकनीक और इंजीनियरिंग से परे क्षेत्रों में काफी ज्यादा दिखाई देने लगे हैं।

डेमोक्रेट और हॉलिस, न्यू हैम्पशायर में चीफ इंजीनियर और कार्यक्रम प्रबंधक वेणु राव ने कहा, कि हेली और रामास्वामी ने दक्षिण एशियाई अमेरिकियों के बीच वैचारिक विविधता पर कब्जा कर लिया, भले ही वह उनकी पार्टी से सहमत नहीं हैं।

Vivek Ramaswamy Vs Nikki Haley

राव ने कहा, ''मुझे खुशी है कि हमारे पास विकल्प है।''

लेकिन, साक्षात्कार में शामिल कई लोगों ने नस्ल, पहचान और आप्रवासन जैसे मुद्दों पर उम्मीदवारों के कठोर रुख पर निराशा जताई है। वहीं, कुछ लोग चिंतित हैं, कि शिक्षा विभाग जैसी एजेंसियों को ख़त्म करने की रामास्वामी की प्रतिज्ञा, उन्हीं संस्थानों को नष्ट कर देगी, जिनकी वजह से भारत से अमेरिका आकर बसने वाले भारतीयों को काफी तेजी से कामयाबी मिली।

हालांकि, भारतीय मूल के कई लोगों ने कहा, कि उन्होंने गर्भपात और जलवायु परिवर्तन जैसे कुछ विषयों पर अधिक केंद्र-दक्षिणपंथी स्वर अपनाने के हेली के प्रयासों की सराहना की, लेकिन उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके 2020 के चुनावी झूठ के खिलाफ हेली की धीमी प्रतिक्रिया पर चिंता जताई है।

अमेरिका में भारतीय मूल के नेता

पिछले एक दशक में, भारतीय अमेरिकी तेजी से राजनीतिक पायदान पर चढ़ रहे हैं। उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, एक डेमोक्रेट और एक भारतीय मां और जमैका के पिता की बेटी हैं, जो उप-राष्ट्रपति पद संभालने वाली पहली महिला, पहली अश्वेत व्यक्ति और पहली एशियाई अमेरिकी हैं।

2015 में, लुइसियाना के गवर्नर बॉबी जिंदल, एक समय उभरते हुए रिपब्लिकन स्टार, राष्ट्रपति पद की रेस में शामिल होने वाले पहले भारतीय अमेरिकी बने।

लेकिन जिंदल, जिन्होंने अपना नाम पीयूष जिंदल से बदलकर बॉबी रख लिया था और युवावस्था में हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया, उन्होंने अमेरिकी मतदाताओं को लुभाने के लिए अपनी भारतीय पहचान को हटाने की काफी कोशिशें कीं, और उनकी उन्हीं कोशिशों ने अमेरिकी जनता को निराश कर दिया।

वहीं, निक्की हेली भी सिख से ईसाई हो चुकी हैं और उन्होंने भी अपना नाम बदल लिया है, लेकिन निक्की हेली अपनी पहचान बदलने की कोशिश नहीं कर रही हैं। जबकि, विवेक रामास्वामी काफी जोर-शोर से खुद के भारतीय और हिन्दू होने पर गर्व को जाहिर कर रहे हैं, लिहाजा विवेक रामास्वामी के खिलाफ कई अमेरिकी चर्च खड़े हो गये हैं।

रिपब्लिकन पार्टी के वोटर्स कट्टर ईसाई और श्वेत माने जाते हैं, लेकिन इसके बाद भी उन वोटरों के बीच विवेक रामास्वामी का लोकप्रिय होना, काफी हैरान करने वाला है।

38 साल के विवेक रामास्वामी अभी राजनीति में काफी नये नये हैं और उनकी परवरिश ओहियो के सिनसिनाटी शहर में हुआ है। उन्होंने अपने बूते अरबों डॉलर की बायोटेक कंपनी तैयार की है, लेकिन वो हिन्दू नाम और हिन्दू पहचान के साथ ईसाई मतदाताओं से जुड़ रहे हैं और शायद, अपनी पहचान को लेकर निडर और ईमानदार होने का फायदा उन्हें मिल रहा है।

वहीं, दक्षिण कैरोलिना की पूर्व गवर्नर और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की तरफ से राजदूत रह चुकीं 51 साल की निक्की हेली, उत्तर भारत के सिख आप्रवासियों की बेटी के रूप में अपने अनुभव के बारे में विस्तार से बोलती रहती हैं, जिसमें अपने पिता को पगड़ी पहनते हुए देखने का दर्द भी शामिल है, जिसकी वजह से उन्हें नस्लवाद और भेदभाव का सामना करना पड़ता था।

करी 20 साल पहले मुंबई से अमेरिका में आकर बसे निशांत कुमार और स्मिता निशांत की 17 साल की बेटी अनिका यादव, जो 2024 में ओयावा कॉकस में वोट डालने वाली हैं, उन्हें हाल ही में अमेरिका की नागरिकता मिली है और वो अगले राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने की स्थिति में आ जाएंगी।

हालांकि उनका परिवार डेमोक्रेटिक पार्टी के करीब हैं, लेकिन अनिका यादव विवेक रामास्वामी को स्मार्ट और फ्रेश उम्मीदवार मान रही हैं।

उन्होंने कहा, कि "हालांकि, निक्की हेली ने अपनी भारतीय पहचान को अपने साथ नहीं जोड़ा है, और विदेश मामलों में उनके किए गये काम, उनके लिए फायदेमंद हो सकता है।"

Vivek Ramaswamy Vs Nikki Haley

अनिका का कहना है, कि "युवा महिलाएं निक्की हेली के साथ जुड़ रही हैं।"

वहीं, विवेक रामास्वामी ने अप्रवासन और H1B वीजा को लेकर जो विचार रखे हैं, उसने भारतीय मूल के लोगों को नाराज करने के साथ साथ दुखी भी कर दिया है। और अमेरिकी राजनीति में पहचान बना चुके भारतीय मूल के सांसद, रो खन्ना ने इसके लिए विवेक रामास्वामी की सख्त आलोचना की है।

फिलहाल, विवेक रामास्वामी के ऊपर भारतीय मूल के लोगों के बीच निक्की हेली बढ़त बनाती दिख रही हैं, लेकिन पूरे अमेरिका में विवेक रामास्वानी, निक्की हेली से आगे चल रहे हैं। वहीं, कल रिपब्लिकन पार्टी में दूसरे राउंड की बहस होने वाली है, जो इन दोनों उम्मीदवारों के भविष्य को तय करने के लिए काफी अहम है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+