अब इराक से 'मुंह छिपाकर' भागेगा अमेरिका! तालिबान की तरह ईरानी विद्रोहियों की भी जंग में जीत?
अमेरिका ने 2003 में इराक पर हमला किया था और जब इराक में तनाव चरम पर था, उस वक्त वहां अमेरिका के एक लाख 70 हजार सैनिक विद्रोहियों से लोहा ले रहे थे।
वॉशिंगटन/बगदाद, दिसंबर 11: अफगानिस्तान से नजरें चुराकर 'भागने' वाला अमेरिका अब इराक से भी 'मुंह छिपाकर' निकलने की तैयारी में है। अमेरिका के मध्य-पूर्व के शीर्ष कमांडर ने कहा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका आने वाले वक्त में इराक में सिर्फ 2500 सैनिकों को ही रखेगा और बाकी सैनिक इराक से बाहर निकल जाएंगे। वहीं, अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि, ईरान समर्थित मिलिशिया अमेरिकी सैनिकों पर हमले की संख्या को तेजी के साथ बढ़ा सकते हैं, लेकिन उन्होंने जोर देते हुए कहा कि, अमेरिका अपनी सेना को इराक से बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।

सिर्फ 2500 सैनिकों को रखने पर विचार
अमेरिका के मरीन जनरल फ्रैंक मैकेंजी ने पेंटागन में गुरुवार को एसोसिएटेड प्रेस के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि, इराक में अमेरिकी सेना ने अपनी भूमिका में बदलाव किया है और अब लड़ाई की मुख्य भूमिका से यूएस फौज बाहर आ गई है, बावजूद इसके इस्लामिक स्टेट से लड़ाई में अमेरिकी सेना इराक को हवाई सहायता और दूसरी जरूरी सहायता मुहैया करवाती रहेगी। उन्होंने कहा कि, यह देखते हुए कि ईरानी समर्थित मिलिशिया सभी पश्चिमी ताकतों को इराक से बाहर करना चाहती है, उन्होंने कहा कि हिंसा में जारी वृद्धि दिसंबर तक जारी रह सकती है।

''नहीं जाएंगे सभी अमेरिकी सैनिक''
अमेरिका के टॉप सैनिक अधिकारियों में से एक फ्रैंक मैकेंजी ने कहा कि, ''ईरान समर्थिक मिलिशिया वास्तव में चाहते हैं कि, इराक से सभी अमेरिकी सैनिक चले जाएंगे, लेकिन हम उन्हें बताने वाले हैं कि, इराक से सभी अमेरिकी सैनिक नहीं जाएंगे''। उन्होंने कहा कि, ''इसके खिलाफ हो सकता है इराक में हिंसा और ज्यादा भड़क जाए, क्योंकि हम इस महीने के अंत कर इराक से बाहर जाने वाले हैं''। आपको बता दें कि, इराकी सरकार ने इससे पहले गुरुवार को इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अमेरिकी लड़ाकू मिशन को समाप्त करने पर बातचीत के समापन की घोषणा की थी। अमेरिकी सेना पिछले कुछ महीनो से इराक में सिर्फ सलाहकार की भूमिका मे है और अमेरिका ने घोषणा किया हुआ है कि, 31 दिसंबर तक इराक में अमेरिकी युद्ध मिशन खत्म कर दिया जाएगा।''

इराक के लिए इस्लामिक स्टेट खतरनाक
अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने कहा कि, इराक के लोग अभी भी चाहते हैं कि, अमेरिकी फौज इराक में मौजूद रहे और इराकी लोग चाहते हैं कि, इराक सरकार और अमेरिका के बीच संबंध बना रहे, लेकिन फिलहाल हम यहां से जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि, उनका मानना है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकवादी इराक में खतरा बने रहेंगे और यह समूह 'खुद को फिर से बनाता रहेगा, शायद एक अलग नाम के तहत।' उन्होंने कहा कि, ध्यान इस बात पर देने की जरूरत है कि, इस्लामिक स्टेट दुनिया में मौजूद किसी दूसरे संगठन के साथ 'समझौता' ना कर सके, ताकि ये तेजी से खतरनाक ना बने।

इराक पर अमेरिका का हमला
आपको बता दें कि, अमेरिका ने 2003 में इराक पर हमला किया था और जब इराक में तनाव चरम पर था, उस वक्त वहां अमेरिका के एक लाख 70 हजार सैनिक विद्रोहियों से लोहा ले रहे थे। इसके साथ ही अमेरिकी सैनिकों ने इराक की सेना को ट्रेनिंग देने का भी लंबे वक्त तक काम किया है। साल 2011 के अंत में ज्यादातर अमेरिकी सैनिकों को वापस बुला लिया गया था, लेकिन सिर्फ तीन साल बाद, अमेरिकी सैनिकों ने इराक को इस्लामिक स्टेट से आजाद करवाने के लिए फिर से फौज को इराक में उतारा। सीरिया से बड़ी संख्या में इस्लामिक स्टेट के आतंकी इराक पर कब्जा करने घुस आए थे और इराक के ज्यादातर हिस्से पर कब्जा भी कर लिया गया था, लेकिन अमेरिकी फौज ने इस्लामिक स्टेट के आतंकियों को पीछे खदेड़ दिया था।

इराक में अमेरिका बनाम ईरान
इराक में अमेरिकी उपस्थिति लंबे समय से उसके लिए ईरान के साथ टकराव की वजह बनी हुई है और जनवरी 2020 में ईरान और अमेरिका के बीच का तनाव उस वक्त काफी ज्यादा बढ़ गया था, जब बगदाद हवाई अड्डे के पास अमेरिकी ड्रोन हमले में एक शीर्ष ईरानी जनरल की मौत हो गई थी। जवाबी कार्रवाई में, ईरान ने अल-असद एयरबेस पर मिसाइलों का एक बैराज लॉन्च किया था, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात थे। विस्फोटों में दर्जनों अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी। हाल ही में, इराक के प्रधान मंत्री मुस्तफा अल-कदीमी की हत्या करने की कोशिश भी की गई थी और इसके लिए भी ईरान के हाथ होने पर शक जताया गया था। और अधिकारियों ने कहा है कि उनका मानना है कि दक्षिणी सीरिया में सैन्य चौकी पर अक्टूबर के ड्रोन हमले के पीछे ईरान था जहां अमेरिकी सैनिक स्थित हैं। हालांकि, हमले में कोई अमेरिकी कर्मी मारा या घायल नहीं हुआ।

इराक में एक्टिव ईरानी 'हाथ'
अमेरिकी जनरल फ्रैंक मैकेंजी ने कहा कि, 'मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री (इराक) को मारने की कोशिश में किया गया हमला एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना है।' उन्होंने कहा कि, 'मुझे लगता है कि यह उस हताशा का संकेत है जिसके तहत वे अभी हैं।' हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि तेहरान और उसके सहयोगियों का पिछले महीने के ड्रोन हमले से कोई लेना-देना नहीं था, जिसमें इराकी प्रधान मंत्री को मामूली रूप से घायल कर दिया गया था। आपको बता दें कि, अमेरिकी जनरल फ्रैंक मैकेंजी पिछले तीन सालों से यू.एस. मध्य कमांड का नेतृत्व कर रहे हैं और पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर यात्रा की है। वहीं, अफगानिस्तान को लेकर मैकेंजी ने कहा कि, अमेरिकी सेना के जाने के बाद से अल-कायदा चरमपंथी समूह का विस्तार हो रहा है और सत्तारूढ़ तालिबान नेता अलकायदा के साथ संबंध खत्म करें या नहीं करें, इस बात को लेकर हिस्सो में बंट चुके हैं।

अमेरिकियों को निकालने के लिए संघर्ष
आपको बता दें कि, जिस तरह से अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान से बाहर निकालने के लिए तालिबान ने पिछले 20 सालों से जंग लड़ी है, कुछ इसी तरह का जंग इराक से अमेरिकी सैनिकों को निकालने के लिए भी लड़ी जा रही है। ईरान और उसके सहयोगी इराक में लंबे वक्त से अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ ऑपरेशन चलाए हुए हैं। जिसको लेकर अमेरिकी जनरल फ्रैंक मैकेंजी ने कहा कि, 'ईरान अभी भी हमें बेदखल करने की सोच पर है। और वे इसके लिए मुख्य युद्ध का मैदान इराक में होने के रूप में देखते हैं। और मेरा मानना है कि वे इस विचार में घिरे हुए हैं कि इराक में संगर्ष इस हद तक बढ़ा दिया जाए कि अमेरिकी फौज को वापस होना पड़े।''

इराक में अमेरिका की बदली भूमिका
अमेरिकी जनरल ने कहा कि, योजना के मुताबिक, नाटो की सेना धीरे धीरे इराक में अपनी संख्या का विस्तार करना शुरू करेगी और उसी योजना के मुताबिक, अमेरिकी सैनिक इराक से बाहर निकलते जाएंगे। लेकिन, इराक में आखिरकार कितने सैनिक रहेंगे, इसका फैसला इराक की सरकार के साथ हुई बातचीत और समझौतों पर निर्भर करेगा। मैकेंजी ने कहा कि, सीरिया में अमेरिकी सैनिक, वर्तमान में लगभग 900 की संख्या में हैं, जो आईएस के खिलाफ लड़ाई में सीरियाई विद्रोही बलों को सलाह देना रहे हैं और उनकी मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह कितना लंबा होगा, लेकिन उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हम कुछ साल पहले की तुलना में काफी करीब हैं। मुझे अब भी लगता है कि हमारे पास बाहर निकलने के लिए एक रास्ता बचा है'।
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