अमेरिका का बड़ा कदम, कमजोर इम्यूनिटी वालों को मिलेगी कोरोना की बूस्टर डोज
वाशिंगटन, 14 अगस्त: टॉप अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी ने कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग जैसे ऑर्गन ट्रांसप्लांट वाले, कैंसर रोगियों या एचआईवी संक्रमण वाले लोगों को कोरोना वायरस की एक अतिरिक्त खुराक यानी वैक्सीन की बूस्टर डोज को मंजूरी दे दी है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के डायरेक्टर डॉ. राचेल वालेंस्की ने कहा कि ऐसे समय में जब डेल्टा वैरिएंट बढ़ रहा है, कमजोर इम्यूनिटी वाले कुछ लोगों के लिए एक अतिरिक्त वैक्सीन खुराक इस आबादी के भीतर गंभीर और संभावित रूप से जानलेवा कोविड -19 मामलों को रोकने में मदद कर सकती है।

बता दें कि पहले से गंभीर बीमारी और दवाओं के लेने से ऐसे मरीजों का इम्यून सिस्टम काफी कमजोर हो जाता है। ऐसे में कोरोना के खिलाफ उसे मजबूत करना थोड़ा मुश्किल है। इसलिए उन मरीजों को उचित सुरक्षा मिले इसके तहत कई स्टडी में ये सुझाव दिए गए हैं कि एक बूस्टर डोज इस समस्या का हल हो सकती है। तीसरी खुराक वही mRNA वैक्सीन होनी चाहिए। फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्न प्राइमरी शॉट्स के रूप में और टीकाकरण पूरा करने के चार सप्ताह बाद लगाना चाहिए।
अमेरिका में अनुमानित 3% वयस्क आबादी को इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड कहा जाता है। इस नई सिफारिश के समर्थन में सीडीसी की ओर से अस्पताल में भर्ती 40-44% मामलों को दिखाया गया है, जो पूरी तरह से टीकाकरण के बावजूद कोविड -19 के संपर्क में आ गए। दरअसल, ये बूस्टर डोज सामान्य जनसंख्या के लिए नहीं बल्कि सिर्फ अमेरिका की उस 3 फीसदी जनसंख्या के लिए है, जो हाई रिस्क जोन में आती है।
डॉ. वालेंस्की ने एक अन्य स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि उभरते हुए आंकड़ों से पता चलता है कि इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड लोगों ने दो शॉट्स के बावजूद पूरी तरह कार्यात्मक प्रतिरक्षा प्रणाली वाले एंटीबॉडी के समान स्तर का विकास नहीं किया। आपको बता दें कि फ्रांस और इजरायल सहित कई दूसरे देशों की भी ऐसी ही सिफारिशें हैं।
इजराइल ने जुलाई में स्वास्थ्य कर्मियों और 60 से अधिक उम्र के लोगों को mRNA वैक्सीन की तीसरी डोज देना शुरू किया, लेकिन वे अपने टीकारण के 5 महीने बाद ही तीसरे डोज के लिए पात्र होंगे। 13 अगस्त से इजराइल ने भी 50 से ऊपर के लोगों को तीसरी खुराक देना शुरू कर दिया है।












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