खुद पाक से कन्नी काटता अमेरिका, चाहता है भारत करे बात
वाशिंगटन। भारत और पाकिस्तान के बीच 23 और 24 अगस्त को होने वाली एनएएस वार्ता कैंसिल होने पर अमेरिका काफी निराश है। भले ही अमेरिका, पाक से अपने संबंधों को नियंत्रित करने की कोशिशों में लगा हो लेकिन वह चाहता है कि भारत और पाक के बीच संबंध सुधर जाएं। आपको बता दें के करीब तीन दिन पहले अमेरिका ने पाक को चेतावनी दी है कि अगर उसने अमेरिकी और अफगानिस्तानी ट्रूप्स को निशाना बनाने वाले आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो फिर पाक की 300 मिलियन डॉलर की मदद बंद कर दी जाएगी।

अमेरिका का कहना है कि पाक और भारत के बीच वार्ता के न होने से दोनों देशों के बीच दूरियां बढ़ेंगी। व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि जिस समय इसकी शुरुआत हुई थी अमेरिका काफी खुश था।
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने बताया कि हम इस बात को लेकर काफी निराश हैं कि दोनों देश अब बातचीत नहीं करेंगे। किर्बी की मानें तो अमेरिका हमेशा से ही भारत और पाक के बीच बातचीत का समर्थक रहा है।
भारत और पाक के बीच यह वार्ता आतंकवाद के मुद्दे पर पाक की ओर से बात न करने की वजह से कैंसिल हुई थी। किर्बी के मुताबिक अमेरिका हमेशा से कहता आया है कि यह मुद्दा काफी अहम है और हम इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ है।
भारत और पाक के क्षेत्र में मौजूद तनाव को हम बखूबी जानते हैं। इसलिए अमेरिका चाहता है कि दोनों देश आपस में बैठकर बात करें और एक नतीजें पर पहुंचे।
किर्बी जो इस समय रूस में हैं उनके पूछा गया था कि क्या अगले माह यूएन जनरल एसेंबली के सत्र के दौरान अमेरिका के विदेश सचिव जॉन कैरी भारत और पाक के विदेश मंत्रियों से मिलेंगे तो इस पर किर्बी ने कोई भी जवाद नहीं दिया। किर्बी का कहना है कि अमेरिका आतंकवाद के मसले पर दोनों देशों के बीच बातचीत चाहता है।
किर्बी के मुताबिक आतंकवाद पर अमेरिका की भूमिका एकदम साफ है और वह मानता है कि यह दुनिया के हर देश के लिए खतरा है। अमेरिका हमेशा से ही चाहेगा इसका मुकाबला किया जाए। लेकिन इसके लिए अंतराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत होगी।












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