अमेरिका की वित्त मंत्री जैनेट येलेन बार बार आ रही हैं भारत, US के साथ क्या समझौते हो रहे हैं?

Janet Yellen India Visit: अमेरिका की वित्त मंत्री जैनेट येलेन, जिन्हें वहां ट्रेजरी सचिव कहा जाता है, वो पिछले नौ महीने में तीसरी बार भारत आई हैं। जैनेट येलेन का इस बार का दौरा जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए है, जिसमें वो कम इनकम वाले देशों पर डिफॉल्ट होने के मंडराते खतरे पर बात करने वाली हैं।

भारत आने से पहले जैनेट येलेन चीन में थी, जहां उन्होंने चीन के साथ संबंध सुधरने के संकेत दिए हैं। वहीं, जैनेट येलेन ने रविवार को पश्चिमी भारतीय राज्य गुजरात की राजधानी गांधीनगर में संवाददाताओं से कहा, कि वह अमेरिका और भारत के बीच मधुर संबंधों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही हैं। वह सप्लाई चेन में विश्वसनीयता लाने, स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और आर्थिक लचीलेपन के अन्य मामलों को संबोधित करने के लिए हनोई, वियतनाम में रुकने की भी योजना बना रही हैं।

Janet Yellen India Visit

भारत का बार-बार क्यों कर रही हैं दौरा

भारत और अमेरिका ने डिफेंस सेक्टर में कई कदम आगे बढ़ाए हैं, लेकिन आर्थिक संबंधों में अभी तक वो तेजी देखने को नहीं मिली है, जितनी होनी चाहिए।

भारत दौरे को लेकर जैनेट येलेन ने कहा, कि भारत दौरे के दौरान उनका लक्ष्य आर्थिक संकट में फंसे विकासशील देशों के लिए ऋण पुनर्गठन के लिए दबाव डालना, वैश्विक विकास बैंकों को जलवायु-केंद्रित बनाने के लिए आधुनिकीकरण पर जोर देना और लगातार बढ़ते अमेरिका-भारत संबंधों को और गहरा करना है।

यानि, उनका दौरा मुख्य तौर पर तीन मुद्दों पर आधारित है। एक आर्थिक संकट में फंसे विकासशील देशों के लिए ऋण को आसान बनाना, जलवायु परिवर्तन के लिए और फंड जारी करवाना और भारत के साथ अमेरिका के व्यापार संबंधों को विस्तार देना।

जैनेट येलेन का बार बार भारत में आकर रूकना, चीन के साथ तनाव के समय भारत और अमेरिका के मजबूत होते रिश्ते के महत्व का संकेत देता है।

इसके अलावा, इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि रूस के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे मजबूत संबंधों पर भी संकट मंडरा रहा है, क्योंकि अमेरिका और सहयोगी देशों ने रूस की अर्थव्यवस्था को भले ही प्रतिबंध के जाल में जकड़ दिया है, लेकिन रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिशों के बावजूद यूक्रेन पर क्रेमलिन का आक्रमण जारी है।

दूसरी तरफ, भारत ने युद्ध के डेढ़ साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अभी तक रूस की आलोचना तक नहीं की है और जी-7 देशों के द्वारा रूसी तेल पर प्राइस कैप तय करने पर सहमति के बावजूद, रूस के साथ ऊर्जा व्यापार बनाए रखा है, जिससे रूस को अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने में कुछ सफलता मिली है।

जैनेट येलेन ने कहा, कि यूक्रेन में युद्ध समाप्त करना सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण नैतिक अनिवार्यता है। लेकिन यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए हम जो सबसे अच्छा काम कर सकते हैं वह भी कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा, कि अमेरिका यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए आवश्यक सैन्य उपकरणों और प्रौद्योगिकियों तक रूस की पहुंच में कटौती करना जारी रखेगा।

जैनेट येलेन ने भारत में कहा, कि "इस वर्ष हमारा एक मुख्य लक्ष्य, हमारे प्रतिबंधों से बचने के रूस के प्रयासों का मुकाबला करना है।" येलेन ने कहा, हमारा गठबंधन इन प्रयासों पर नकेल कसने के लिए हाल के महीनों में की गई कार्रवाइयों पर काम कर रहा है।

दूसरी तरफ, अमेरिका तेजी से भारत पर निर्भर हो रहा है और अमेरिका के नेता लगातार भारत पहुंच रहे हैं या अलग अलग तरीके से भारत के साथ जुड़ रहे हैं।

वहीं, अमेरिकी वित्चतमंत्री जैनेट येलेन ने कहा, कि अमेरिका आपूर्ति श्रृंखलाओं की लचीलापन बढ़ाने के लिए अपनी मित्रतापूर्ण रणनीति में भारत को एक अपरिहार्य भागीदार के रूप में देखता है।

उन्होंने कहा, कि अमेरिका की निजी कंपनियां भारत में सामानों का प्रोडक्शन करने और उन्हें अमेरिका तक पहुंचाने का सबसे बेहतरीन स्थान मान रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा, कि चीन की अर्थव्यवस्था में हो रही धीमी वृद्धि ने कई अन्य देशों में डेवलपमेंट को प्रभावित किया है।

उन्होंने कहा, कि "मैंने इस मुद्दे पर अपने चीनी समकक्षों के साथ चर्चा की है और मुझे लगता है, कि चीनी यह बताने के लिए उत्सुक हैं, कि उनका कारोबारी माहौल खुला है।" येलेन ने कहा, "चीन की निश्चित तौर पर विदेशी निवेश देखने की इच्छा है।" लेकिन, हकीकत ये है, कि अमेरिकी कंपनियां अब चीन से बोरिया-बिस्तर बांधने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं और उनका पड़ाव भारत हो सकता है।

दूसरी तरफ, पिछले महीने जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका के राजकीय दौरे पर गये थे, तो उस वक्त दोनों देशों ने व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने के लिए समझौते किए थे। इसके अलावा, ट्रेड एग्रीमेंट्स को बढ़ाने के लिए डिजाइन भी तैयार किया गया है।

भारत-यूएस में ऐतिहासिक होगा व्यापार

सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में अमेरिका-भारत संबंधों के नीति विशेषज्ञ रेमंड विकरी जूनियर ने कहा, कि चीन की यात्रा के तुरंत बाद येलेन का भारत आना, इस मायने में सार्थक है, कि भारतीय अधिकारी "बहुत विस्तार से जानना चाहते हैं कि चीन में क्या हुआ था।"

इसमें भारतीय अधिकारी ये देखना चाहते हैं, कि चीन और अमेरिका के बीच जो आर्थिक संबंध हैं, या बने हैं, वो भारत के लिए क्या मायने रखते हैं।

उन्होंने कहा, कि "वे (भारतीय अधिकारी) जानना चाहेंगे, कि संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी कुछ सोर्सिंग गतिविधियों को चीन से भारत में ट्रांसफर करने के बारे में गंभीर है या नहीं।"

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी ऑफिस की एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, कि 'जैनेट येलेन की भारत यात्रा के समय श्रीलंका और घाना के ऋण पर चर्चा की जाएगी और उसे सुलझाने की कोशिश होगी, वहीं इसे जल्दी पूरा करने की कोशिश की जा रही है।'

जाम्बिया के डिफ़ॉल्ट होने के लगभग दो साल बाद, श्रीलंका और घाना ने पिछले साल अपने अंतरराष्ट्रीय ऋणों पर चूक की है। इसके अलावा, सभी कम आय वाले देशों में से आधे से ज्यादा देशों को ऋण संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके कार्य करने और विकास करने की उनकी दीर्घकालिक क्षमता को नुकसान पहुंचता है।

हडसन इंस्टीट्यूट के एक वरिष्ठ फेलो हेरोल्ड डब्ल्यू फर्चटगॉट-रोथ ने कहा कि येलेन की भारत यात्रा "स्वाभाविक रूप से विकसित हो रहे गठबंधन का प्रतिबिंब है।"

उन्होंने कहा, "भारत का चीन के साथ बहुत अधिक तनाव है, उनके बीच लगातार सीमा विवाद हैं। और भारत विकास करना चाहता है और एक तरह से हिंद महासागर की नौसैनिक शक्ति के रूप में विकसित हुआ है, जो एक ऐसा क्षेत्र है, जिसपर चीन की नजर है।" लिहाजा, एक्सपर्ट्स का मानना है, कि अमेरिका और भारत, जल्द ही ऐतिहासिक व्यापार समझौतों पर पहुंच सकते हैं, जिससे चीन को काउंटर करने में मदद होगी।

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