US Travel Ban: तो इस वारदात के कारण ट्रंप को करना पड़ी अमेरिका में 12 देशों की एंट्री बैन
US Travel Ban: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एशिया के दो देशों समेत 12 देशों के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अतिरिक्त, कुछ अन्य देशों पर भी आंशिक प्रतिबंध लगाए गए हैं। बकौल ट्रंप, उनके इस फैसले के पीछे उन्होंने अमेरिका को खतरनाक लोगों से बचाने का दावा किया है।
क्यों लगाना पड़ा अमेरिका में एंट्री पर बैन?
डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने यह यात्रा प्रतिबंध कोलोराडो में एक यहूदी विरोध पर हुए हमले के कारण लगाया है। अधिकारियों ने इस हमले के लिए एक ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराया है, जिसके बारे में उनका कहना है कि वह अवैध रूप से देश में था। ट्रम्प ने एक वीडियो संदेश में कहा, "बोल्डर, कोलोराडो में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले ने विदेशी नागरिकों के प्रवेश से हमारे देश को होने वाले गंभीर खतरों को उजागर किया है, जिनकी ठीक से जांच नहीं की गई है।" लिहाजा अमेरिकी लोगों की सुरक्षा के खातिर ट्रंप को ये सख्त कदम उठाना पड़ा।
आतंकवाद का मंडरा रहा है खतरा
व्हाइट हाउस ने भी ट्रम्प के कार्यकारी आदेश द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को उचित ठहराया है। प्रशासन द्वारा बताए गए कारणों में अफगानिस्तान का तालिबान नियंत्रण, ईरान और क्यूबा द्वारा राज्य प्रायोजित आतंकवाद और जो बाइडेन प्रशासन के दौरान हैती से अवैध प्रवासियों का आगमन शामिल है। चाड और इरिट्रिया जैसे देशों को अमेरिकी आव्रजन कानूनों की अवहेलना के लिए चिह्नित किया गया। पूर्व में बी1/बी2 वीजा की ओवरस्टे दर 49.54 प्रतिशत है, जबकि बाद वाले की एफ/एम/जे वीजा की ओवरस्टे दर 55.43 प्रतिशत है।
इन देशों के लोगों को किया बैन
यह आदेश अफगानिस्तान, म्यांमार, चाड, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित करता है। इसके अलावा, बुरुंडी, क्यूबा, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश को आंशिक रूप से सीमित किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के स्थायी निवासियों, वर्तमान वीजा धारकों और कुछ अन्य श्रेणियों के लोगों को इस यात्रा प्रतिबंध से छूट मिलेगी।

व्हाइट हाउस का क्या है कहना
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने सीबीएस को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने उस वादे पर कायम हैं, जिसमें उन्होंने अमेरिका को उन "खतरनाक विदेशी तत्वों" से सुरक्षित रखने की बात कही थी, जो देश में आकर नुकसान पहुंचा सकते हैं। जैक्सन ने कहा कि यह प्रतिबंध उन देशों पर लगाया गया है, जिनके बारे में यह माना जाता है कि वे यात्रा करने वाले लोगों की पृष्ठभूमि की पर्याप्त जांच नहीं करते, जहां वीजा शर्तों का उल्लंघन अधिक होता है, या जो पहचान और खतरे से जुड़ी जानकारी साझा करने में विफल रहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा अमेरिकी जनता और उनकी सुरक्षा के सर्वोत्तम हित में कार्य करेंगे।
ट्रंप पहले भी लगा चुके हैं प्रतिबंध
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने इस तरह का यात्रा प्रतिबंध लगाया है। अपने पहले कार्यकाल में, उन्होंने 2017 में कुछ मुस्लिम देशों पर इसी तरह की पाबंदी लगाई थी। हालांकि, उस प्रतिबंध को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा और उसमें कई बार संशोधन किए गए, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे लागू करने की अनुमति दे दी थी। उस समय, दुनिया भर के हवाई अड्डों पर हजारों पर्यटक, प्रवासी, व्यापारी और निवास परमिट धारक फंसे रह गए थे। कई लोगों को यात्रा के दौरान ही वापस भेज दिया गया था या उन्हें अमेरिका जाने वाले विमानों में चढ़ने से रोक दिया गया था।
आतंकवादी हमले हो रहे हैं- ट्रंप
नए यात्रा प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए ट्रंप ने एक वीडियो संदेश में कहा कि "एक के बाद एक आतंकवादी हमले" हो रहे हैं, जो "खतरनाक जगहों से आए विदेशी वीजा धारकों" द्वारा किए गए हैं। उन्होंने अमेरिका में "लाखों अवैध प्रवासियों" के लिए बाइडन की "ओपन डोर पॉलिसी" को जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका "किसी भी ऐसे देश से खुले प्रवासन की अनुमति नहीं दे सकता जहां से आने वाले लोगों की सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से जांच और छानबीन नहीं की जा सकती।"
सुधार हुआ तभी हटेगा प्रतिबंध- ट्रंप
ट्रंप ने यह भी कहा कि लगाए गए प्रतिबंधों की सख्ती उस "खतरे की गंभीरता" पर निर्भर करती है जो संबंधित देश से आता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि इन देशों की स्थिति में सुधार होता है तो प्रतिबंधित देशों की सूची में संशोधन किया जा सकता है।
किन्हें मिलेगी यात्रा प्रतिबंध से छूट
ट्रंप के इस यात्रा प्रतिबंध में कुछ लोगों को छूट भी दी गई है, जिसका मतलब है कि वे अभी भी अमेरिका में प्रवेश कर सकते हैं। इनमें प्रमुख खेल आयोजनों (जैसे वर्ल्ड कप या ओलंपिक) में भाग लेने वाले खिलाड़ी, ऐसे वीजा धारक जो "ईरान में जातीय उत्पीड़न झेल रहे हैं और ईरान के धार्मिक अल्पसंख्यक", विशेष आप्रवासी वीज़ा (SIV) रखने वाले अफगान नागरिक और अमेरिका के "कानूनी स्थायी निवासी" शामिल हैं। दोहरी नागरिकता वाले व्यक्ति, जिनकी दूसरी नागरिकता किसी ऐसे देश की है जो इस प्रतिबंध सूची में शामिल नहीं है, उन्हें भी छूट मिलेगी। इसके अतिरिक्त, अमेरिका के विदेश मंत्री उन व्यक्तियों को भी यात्रा प्रतिबंध से छूट दे सकते हैं जो अमेरिका के "राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा" करते हों।
अमेरिका का नुकसान- डेमोक्रेट्स
वॉशिंगटन से डेमोक्रेटिक कांग्रेस सदस्य प्रमिला जयपाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह प्रतिबंध, जो ट्रंप के पहले कार्यकाल में लगाए गए मुस्लिम प्रतिबंध का विस्तार है, अमेरिका को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर देगा। उन्होंने कहा कि "किसी पूरे समुदाय को इसलिए प्रतिबंधित करना क्योंकि आप उनके देश की सरकार की संरचना या कार्यप्रणाली से असहमत हैं... इसका मतलब दोष गलत जगह मढ़ना होगा।" प्रमिला के कहने का सार ये हैं कि, ट्रंप का ये कदम अमेरिका के लिए नुकसानदेह है। इसके अलावा डेमोक्रेटिक कांग्रेस सदस्य डॉन बेयर ने ट्रंप पर अमेरिका के संस्थापकों के आदर्शों से "विश्वासघात" करने का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि "ट्रंप का यह ट्रैवल बैन पूर्वाग्रह और नफरत भरा है और यह हमें ज्यादा सुरक्षित नहीं बनाता। यह केवल हमें बांटता है और हमारी वैश्विक नेतृत्व क्षमता को कमजोर करता है।"
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