विध्वंसक फाइटर जेट्स सिर्फ उड़ाएगा नहीं, बल्कि बनाएगा भी भारत.. पीएम मोदी को जेट इंजन का गिफ्ट देंगे बाइडेन
अमेरिका और भारत के बीच टेक्नोलॉजी और डिफेंस को लेकर कई अहम समझौते हुए हैं। वहीं, भारत अमेरिका से ज्यादा से ज्यादा डिफेंस टेक्नोलॉजी हासिल करना चाहता है।

India-US Jet Engine Deal: डिफेंस सेक्टर में भारत लगातार खुद को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और मोदी सरकार, लगातार मेक इन इंडिया के लिए काम कर रही है।
समचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है, कि बाइडेन प्रशासन एक सौदे को मंजूरी देने के लिए तैयार है, जो जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी को भारत के भीतर भारतीय सैन्य विमानों के लिए जेट इंजन बनाने की अनुमति देगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, इंजनों के संयुक्त उत्पादन को अंतिम रूप देने वाले समझौते पर 22 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक यात्रा के दौरान हस्ताक्षर और घोषणा की जाने की उम्मीद है।
2014 में प्रधान मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छठी अमेरिका यात्रा होगी। हालांकि, भारत में जेट इंजन के निर्माण के इस फैसले को फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया गया है, इसलिए व्यक्तियों ने नाम न छापने की शर्त पर इसकी पुष्टि की है।
भारत के लिए ऐतिहासिक होगी डील
एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत एलसीए मार्क 2 और एडवांस मीडियन लड़ाकू विमान सहित अपने 'मेड इन इंडिया' विमान के लिए अमेरिकी और फ्रांसीसी फर्मों के प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अमेरिकी और फ्रांसीसी, दोनों फर्मों के प्रस्तावों को लेकर मूल्यांकन प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है। अधिकारियों ने इस बात पर प्रकाश डाला है, कि इन प्रस्तावों के लिए प्रमुख विचारों में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मूल्य निर्धारण का स्तर शामिल है।
भारत उस डील की तरफ बढ़ना चाहता है, जिसमें सिर्फ भारत में निर्माण ही ना हो, बल्कि भारत को टेक्नोलॉजी भी मिले। मोदी सरकार उस डील को सिरे से खारिज कर रही है, जिसमें भारत को टेक्नोलॉजी मिलने की संभावना नहीं होती है। मोदी सरकार की कोशिश ये है, कि भारत टेक्नोलॉजी हासिल कर, रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोग्राम को भी आगे बढ़ाए, जिससे भविष्य का भारत टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी आत्मनिर्भर बन सके।
डिफेंस सेक्टर पर भारत का ध्यान
संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने का लक्ष्य बना रहा है और भारत के साथ सैन्य-से-सैन्य और तकनीकी संबंधों को चीन के क्षेत्रीय प्रभुत्व को काउंटर करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखता है।
दूसरी तरफ, भारत जो दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश है, वो अपनी 50 प्रतिशत से ज्यादा हथियारों और हथियारों के सामान के लिए रूस पर काफी ज्यादा निर्भर रहा है। भारत के ज्यादातर फाइटर जेट्स, लड़ाकू विमान, टैंक, पनडुब्बियां और एयरक्राफ्ट कैरियर, या तो रूस से मिले हुए हैं या फिर रूस निर्मित हैं, लिहाजा भारत भी अपने विकल्पों को बढ़ाना चाहता है।
मोदी सरकार ने हालिया वर्षों में रूस के अलावा फ्रांस और इजरायल से भी हथियारों की खरीददारी शुरू की है।
रायटर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि अमेरिका के साथ जेट इंजन सौदे को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है और समझौते से परिचित दो व्यक्तियों के मुताबिक, इसके लिए अमेरिकी कांग्रेस को अधिसूचना की आवश्यकता होगी।
आपको बता दें, कि संयुक्त राज्य अमेरिका अन्य देशों को घरेलू सैन्य प्रौद्योगिकी के साझाकरण या बिक्री पर कड़े नियंत्रण रखता है।
इस वर्ष की शुरुआत में, संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत ने, दोनों देशों की कंपनियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के मकसद से एक व्यापक संयुक्त साझेदारी की घोषणा की है, जिसका मकसद खास तौर पर सैन्य उपकरणों और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग को लेकर है।
यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका के थिंक टैंक्स और संसद में भी आवाज उठी है, कि भारत को अमेरिका हथियार निर्माण में सहयोग करे, ताकि भारत की रूस पर निर्भरता कम हो। अमेरिका के थिंक टैंक्स का मानना है, कि चीन की आक्रामकता और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश भारत के पड़ोसी हैं, लिहाजा हथियारों को लेकर रूस पर निर्भर रहने वाले भारत के लिए, रूस की आलोचना करना खतरनाक साबित हो सकता है।
HAL को टेक्नोलॉजी देगा अमेरिका
रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका की हथियार कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) ने एचएएल को कुछ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने की पेशकश की है, जो इंजनों के लिए एक लाइसेंस प्राप्त निर्माता के रूप में कार्य करेगा।
इस संबंध में जानकारी रखन वाले एक व्यक्ति के मुताबिक, भारत ने ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने की मांग की है। वहीं, भारत स्वदेशी विमान इंजन उत्पादन के लिए आवश्यक टेक्नोलॉजी प्राप्त करने के लिए उत्सुक है।
फिलहाल, भारत के पास लड़ाकू विमानों को घरेलू स्तर पर बनाने की क्षमता है, लेकिन उन्हें चलाने के लिए आवश्यक इंजनों का उत्पादन करने की क्षमता का अभाव है।
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वहीं, एचएएल भारतीय वायु सेना के लिए 83 हल्के लड़ाकू विमानों के उत्पादन के लिए हल्के जीई इंजन का उपयोग कर रहा है। हालांकि, भारत अगले 20 सालों में अपनी वायु सेना और नौसेना के लिए 350 से ज्यादा लड़ाकू जेट विमानों का निर्माण करने की योजना बना रहा है, जिसमें संभावित रूप से जीई 414 इंजन का उपयोग किया जाएगा।
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