यूक्रेन युद्ध के बीच ताइवान पर भी हमले की आशंका? हलचल तेज, अमेरिका ने उठाए इमरजेंसी कदम
यूक्रेन युद्ध के बीच इस वक्त चीनी सोशल मीडिया पर सरकार से इस मौके का फायदा उठाकर ताइवान के खिलाफ भी सैन्य अभियान शुरू करने की मांग की जा रही है।
वॉशिंगटन/ताइपे, मार्च 01: यूक्रेन युद्ध के बीच क्या चीन भी ताइवान पर हमला करने वाला है और जिस तरह से रूस ने यूक्रेन को निशाना बनाया है, क्या उसी तरह से शी जिनपिंग भी ताइवान के खिलाफ सैन्य अभियान की शुरूआत करने वाले हैं। इस बात की आशंका काफी ज्यादा बढ़ गई है और ताइवान में हलचल काफी बढ़ गई है। जिसे देखते हुए अमेरिक ने अपने पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को फौरन ताइवान भेजा है और ऐसी आशंका जताई जा रही है कि, एक और युद्ध की शुरूआत हो सकती है।

ताइवान में हलचल तेज
इस वक्त जब यूक्रेन में भीषण जंग जारी है और रूस यूक्रेन पर बुरी तरह से हमला कर रहा है, उस वक्त चीनी सोशल मीडिया पर सरकार से इस मौके का फायदा उठाकर ताइवान के खिलाफ भी सैन्य अभियान शुरू करने की मांग की जा रही है। चीनी 'राष्ट्रवादी' लगातार सोशल मीडिया पर ताइवान पर हमला करने के लिए इस वक्त को सही मौका ठहरा रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि, इस वक्त जब अमेरिका यूक्रेन में उलझा हुआ है, उस वक्त ताइवान को चीन में सेना का इस्तेमाल कर मिला लेना चाहिए। जिसके बाद ताइवान में हलचल तेज हो गई है और आशंका है कि, शी जिनपिंग भी लड़ाई शुरू कर सकते हैं।

अमेरिका ने भेजे अधिकारी
रिपोर्ट के मुताबिक, बाइडेन प्रशासन ने सोमवार को ताइवान को समर्थन देने और स्थिति का जायजा लेने के लिए पूर्व वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों की एक टीम को ताइवान भेजा है। अमेरिका को आशंका है कि, चीन किसी भी वक्त यूक्रेन युद्ध के बीच मौका बनाकर ताइवान पर हमला कर सकता है। बाइडेन प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस दौरे का नेतृत्व ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के पूर्व अध्यक्ष माइक मुलेन कर रहे हैं। पिछले हफ्ते ही चीन के 9 लड़ाकू विमान भी ताइवान के रक्षा क्षेत्र में पहुंचे हैं और ताइवानी क्षेत्र का उल्लंघन किया है, वहीं, यूक्रेन युद्ध से सिर्फ 20 दिन पहले शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के बीच बातचीत भी हुई है, लिहाजा इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है, कि चीन ताइवान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन की शुरूआत नहीं कर सकता है।

पश्चिम की ‘बेबसी’ का फायदा?
वहीं, राष्ट्रपति बाइडेन के एशिया पैसिफिक के प्रमुख कर्ट कैंपबेल ने सोमवार को जर्मनी के मार्शल फंड प्रतिनिधिमंडल के साथ एक ऑनलाइन चर्चा की है और इस बैठक को 'अनौपचारिक' बताया है, वहीं, बीजिंग स्व-शासित ताइवान द्वीप पर अपना दावा करता है और शी जिनपिंग कह चुके हैं, कि यदि आवश्यक हुआ तो सैन्य अभियान के द्वारा ताइवान पर कब्जा करने का वादा कर चुके हैं। वहीं, वॉशिंगटन में बीजिंग के राजदूत ने जनवरी में यह चेतावनी देकर तनाव को और बढ़ा दिया था, कि अगर अमेरिका ने ताइवान की स्वतंत्रता को 'प्रोत्साहित' किया तो दोनों महाशक्तियां युद्ध में जा सकती हैं। लेकिन, यूक्रेन युद्ध के बीच हालात तेजी से बदले हैं। और रूस के खिलाफ अमेरिका और पश्चिमी देशों ने इतने कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, कि बीजिंग और मास्को के बीच संबंध ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं और पिछले हफ्ते रूसी गेहूं से प्रतिबंध हटाकर चीन ने साफ कर दिया है, कि वो रूस के साथ एकजुट है।

अमेरिका ने उठाया बड़ा कदम
वहीं, अमेरिकी टीम मंगलवार को ताइवान पहुंचेगी और समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार इसका नेतृत्व एक सेवानिवृत्त नौसेना एडमिरल मुलेन कर रहे हैं, जो जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बराक ओबामा प्रशासन में सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी थे। पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मेघन ओ'सुल्लीवन और ओबामा के अधीन रक्षा के पूर्व अवर सचिव मिशेल फ्लोरनॉय भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। वहीं, इस टीम में एशिया के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के दो पूर्व वरिष्ठ निदेशक, माइक ग्रीन और इवान मेडिरोस भी यात्रा करेंगे, जिसका उद्देश्य ताइवान के लिए निरंतर समर्थन प्रदर्शित करना है। बाइडेन प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि, "इन पांच व्यक्तियों का चयन ताइवान और उसके लोकतंत्र के लिए द्विदलीय अमेरिकी प्रतिबद्धता के बारे में एक महत्वपूर्ण संकेत भेजता है, और दर्शाता है कि ताइवान के लिए बिडेन प्रशासन की व्यापक प्रतिबद्धता ठोस बनी हुई है।"

चीन लगातार कर रहा है घुसपैठ
पिछले एक हफ्ते से रूस और यूक्रेन के बीच स्थिति काफी खराब है और माना जा रहा है कि, रूस अगले कुछ घंटों में यूक्रेन की राजधानी कीव पर भीषण हमले शुरू कर सकता है, इन सबके बीच चीनी लड़ाकू विमानों की ताइवान के वायु क्षेत्र में जाना चीन और रूस के गठजोड़ को भी उजागर करता है। 23 जनवरी को 39 चीनी लड़ाकू विमानों ने ताइवान के वायुरक्षा क्षेत्र में घुसपैठ की थी और इन सबके बीच चीनी की छोटी-छोटी कई घुसपैठ भी जारी है। ताइवान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि, लेटेस्ट चीनी घुसपैठ में आठ चीनी जे-16 लड़ाकू और एक वाई -8 टोही विमान ताइवान के क्षेत्र में घुसे थे, जो दक्षिण चीन सागर के शीर्ष छोर पर ताइवान-नियंत्रित प्रतास द्वीप समूह के उत्तर-पूर्व में एक क्षेत्र में उड़ान भरी थी।

चीनी ‘आक्रमण’ पर ताइवान क्या बोला?
यूक्रेन संकट के बीच ताइवान भी काफी सतर्क है और ताइवान के उपराष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने कहा है कि, 'आत्मनिर्णय के सिद्धांत को क्रूर बल से नहीं मिटाया जा सकता है'। वहीं, पश्चिम के एक वरिश्ठ राजनयिक ने कहा कि, ताइवान में अमेरिका द्वारा प्रतिनिधिमंडल भेजना इस बात का सबूत है कि, रूसी कार्रवाइयों के बाद वॉशिंगटन लगातार सतर्क बना हुआ है और वो अब भारत-प्रशांत क्षेत्र पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने कहा कि, ''यूक्रेन पर रूसी हमले ने वैश्विक राजनीति में भूकंप ला दिया है और और अब अमेरिका किसी भी हाल में इंडो-पैसिफिक में अपने प्रयासों को कमजोर नहीं करना चाह रहा है और अब अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चिंता चीन से ताइवान को बचाना है'। वहीं, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि, चीन के लिए ताइवान पर इस वक्त हमला करना 'सुनहरा मौका' हो सकता है, लिहाजा ताइवान को हर एक सेकंड सतर्क रहने की जरूरत है।

ताइवान के पास कितनी शक्ति?
ताइवान एक छोटा देश है, लिहाजा उसके पास सैन्य शक्ति तो कम है और चीन के मुकाबले कुछ भी नहीं है, लेकिन ताइवान को अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन का मजबूती से समर्थन मिला हुआ है। ताइवान की रक्षा के लिए हमेशा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर साउथ चायना सी में रहता है और इस वक्त अमेरिका के साथ साथ जापान और ब्रिटेन के एयरक्राफ्ट कैरियर भी भारी हथियारों के साथ साउथ चायना सी में मौजूद हैं। ताइवान के राष्ट्रपति का भी मानना है कि, ताइवान जितना ज्यादा दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करता है, चीन उतना ज्यादा प्रेशर बनाता है। लेकिन, अब जबकि रूस, यूक्रेन पर हमला कर चुका है, ताइवान काफी ज्यादा प्रेशर में है।












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