घटे हिंदू, बढ़े मुसलमान... भारत में अल्पसंख्यकों को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट पर US ने फिर दिया ज्ञान!

US-India News: संयुक्त राज्य अमेरिका ने सोमवार को एक बार फिर से धार्मिक स्वतंत्रता का राग अलापते हुए भारत को ज्ञान देने की कोशिश की है।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने सोमवार को कहा है, कि वह धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के लिए सार्वभौमिक सम्मान को बढ़ावा देने और उसकी रक्षा करने के लिए गहराई से प्रतिबद्ध है और इस मामले पर भारत सहित कई देशों के साथ बातचीत की है।

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अमेरिकी विदेश विभाग की यह टिप्पणी न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्ट पर आई है, जिसमें भारत में दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम समुदाय पर टिप्पणी की गई है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है, कि "हम दुनिया भर में धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता के अधिकार के लिए सार्वभौमिक सम्मान को बढ़ावा देने और उसकी रक्षा करने के लिए गहराई से प्रतिबद्ध हैं। हमने सभी धार्मिक समुदायों के सदस्यों के लिए समान व्यवहार के महत्व पर भारत सहित कई देशों को शामिल किया है।"

न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारतीय मुस्लिमों को लेकर एक रिपोर्ट छापी है, जिसमें भारतीय हिंदू समाज पर कई तरह के आरोप लगाए गये हैं और स्टोरी का हेडलाइंस रखा गया है, "अपनी ही जमीन पर अजनबी: मोदी के भारत में मुस्लिम होने का मतलब।" इस स्टोरी में लिखा गया है, कि "भारत में मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं, उन्हें हर कदम पर हिंदू परेशान करते हैं, हिंदू महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल सकती हैं।"

भारत में आबादी को लेकर रिपोर्ट क्या है?

इस बीच, प्रधान मंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है, कि भारत में मुस्लिम आबादी का हिस्सा 1950 और 2015 के बीच 9.84 प्रतिशत से बढ़कर 14.09 प्रतिशत हो गया है। जबकि, भारत में हिंदू जनसंख्या 84.68 प्रतिशत से घटकर 78.06 प्रतिशत हो गई है। रिपोर्ट में आगे देखा गया है, कि ईसाई, सिख और बौद्ध आबादी में भी वृद्धि हुई है, जबकि जैन और पारसी आबादी में कमी आई है।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी EAC-PM की रिपोर्ट की चर्चा की है और विपक्ष के दावे पर, कि "अल्पसंख्यक खतरे में है" उसे गलत बचता है और कहा, कि झूठ का पर्दाफाश हो गया है।

पीएम मोदी ने इस महीने की शुरुआत में एक इंटरव्यू में कहा था, कि "1950 से 2015 के बीच भारत में हिंदुओं की संख्या लगभग 8 प्रतिशत कम हो गई है, जबकि अल्पसंख्यकों की संख्या 43 प्रतिशत बढ़ गई है। जो धारणा बनाई गई है, वह एक गलत साबित हो रही है। गलत कथा उजागर हो रही है।"

पीएम मोदी ने आगे कहा था, कि "किसी को इसका जो भी अर्थ निकालना हो, निकाला जा सकता है। मैं कुछ भी नहीं निकालना चाहता।"

उन्होंने आगे कहा था, कि "अगर यह तथ्यात्मक है, तो जो धारणाएं बनाई गई हैं, कि भारत में अल्पसंख्यकों को दबाया जा रहा है, भारत में अल्पसंख्यकों के लिए कोई आवाज नहीं है... ये सभी कथाएं जो बनाई जा रही हैं, ये सभी आरोप भारत के खिलाफ हैं, कृपया सच्चाई को स्वीकार करें और ऐसी धारणा से बाहर आएं।"

इससे पहले, भारतीय विदेश मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग की एक रिपोर्ट को खारिज कर दिया था, जिसमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर "भेदभावपूर्ण राष्ट्रवादी नीतियों को मजबूत करने" का आरोप लगाया गया था। विदेश मंत्रालय ने रिपोर्ट तैयार करने वाले संगठन को "पक्षपातपूर्ण" कहा और कहा, कि उसे उम्मीद नहीं है कि ये संगठन भारत के विविध, बहुलवादी और लोकतांत्रिक लोकाचार को समझेगा।

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