चीन की मिसाइलें पलक झपकते हो जाएंगी खाक, US बना रहा नेक्स्ट जेनरेशन 'हिट टू किल' हथियार, जानें क्या है?
इंडो-पैसिफिक में आक्रामकता बढ़ाने के साथ साथ अब चीन ने ताइवान को तेजी से घेरना शुरू कर दिया है, लिहाजा अमेरिका अब मुकाबले के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

China Vs America: इंडो-पैसिफिक में शक्ति के संतुलन को बनाए रखने के लिए अमेरिका बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (बीवीआर) मिसाइल के उत्पादन को बढ़ाने की योजना बना रहा है। अमेरिका की बियॉन्ड-विजुअल-रेंज मिसाइल के उत्पादन बढ़ाने की इस योजना को, चीनी मिसाइलों के खिलाफ एक आक्रामक हथियार के तौर पर देखा जा रहा है।
अमेरिका का बियॉन्ड-विजुअल-रेंज मिसाइल, हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तैनात किया जाएगा।
इस महीने, द वारज़ोन की रिपोर्ट में बताया गया है, कि अमेरिकी वायु सेना अगली पीढ़ी के AIM-260 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल के फौरन उत्पादन के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रही है। अमेरिका अपने इस मिलाइल को envisioned Collaborative Combat Aircraft (CCA) विमानों पर तैनात करेगा, जिससे हवा से हवा में मुकाबला करने की अमेरिकी शक्ति में भारी इजाफा होगा।

अमेरिका क्यों बढ़ाएगा इस हथियार का उत्पादन
रिपोर्ट में कहा गया है, कि AIM-260 मिसाइल का उत्पादन को बढ़ाने की योजना, अमेरिकी वायु सेना प्रमुख जनरल चार्ल्स ब्राउन की सीनेट सशस्त्र सेवा समिति के सामने दिए बयान के बाद बनाई गई है। जनरल चार्ल्स ब्राउन से पूछा गया था, कि क्या अमेरिकी वायु सेना के पास अपने CCA और अन्य चालक दल के विमानों को चलाने के लिए पर्याप्त मिसाइलें हैं?
CCA के अलावा, द वारज़ोन ने नोट किया कि नेक्स्ट जनरेशन एयर डोमिनेंस (NGAD) फाइटर के साथ-साथ अमेरिकी वायुसेना के अन्य सक्रिय विमान, F-22, F-35, F-15EX II और F/A-18 E/F को भी AIM-260 मिसाइल से लैस किया जाएगा।
हालांकि, AIM-260 मिसाइल के बारे में फिलहाल जानकारी काफी कम है, लेकिन द वारज़ोन ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है, कि इस मिसाइल में डुएल-पल्स सॉलिड फ्यूल रॉकेट मोटर टेक्नोलॉजी हो सकती है, जो इस मिसाइल को अत्यधिक खतरनाक बना देगी।
इसके साथ ही इस मिसाइल में वारहेड, मल्टी-मोड गाइडेंस सिस्टम लगा होगा, जिसमें सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन किए गए सरणी (एईएसए) और इन्फ्रारेड वाले और ग्राउंड रडार टेक्नोलॉजी होगी। जिसके जरिए इस मिसाइल को सैटेलाइट के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है और सटीक हमला किया जा सकता है।

अमेरिका के कई विमान हो रहे अपग्रेड
अमेरिका ने AIM-260 मिसाइलों के फौरन उत्पादन पर इसलिए जोर दिया है, क्योंकि अमेरिका के कई विमान फिलहाल अपग्रेडेशन प्रोसेस से गुजर रहे हैं, जिनमें एफ-35 फाइटर जेट भी शामिल है, जिसे टेक रिफ्रेश 3 के रूप में जाना जाता है। अपग्रेड करने के बाद एफ-35 विमान की युद्धक क्षमता में 75 प्रतिशत का इजाफा होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि अमेरिका की अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों, जैसे कि NGAD और F/A-XX को अपनी क्षमताओं का पूरा लाभ उठाने के लिए नए हथियारों की आवश्यकता होगी, खासकर उनमें BVR मिसाइल लगाने की अत्यधिक जरूरत है।
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इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज के लिए 2019 के एक लेख में, डिफेंस एक्सपर्ट डगलस बैरी ने लिखा है, दुश्मनों को हराने के लिए अमेरिकी वायु सेना को एआईएम-260 की सख्त जरूरत है। और इसे एफ-22 विमान और एफ-35 विमान में लैस करने के बाद ये दुश्मन खेमे में तबाही मचा सकती है।
उन्होंने लिखा है, कि नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल AIM-260 अमेरिका की पुरानी चौथी पीढ़ी के विमान, जैसे एफ-15 और एफ-16 के लिए उपयुक्त नहीं है। और अगर अमेरिका के नई पीढ़ी के विमान, जैसे एफ-22 और एफ-35 में पुराने AIM-120 मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाता है, तो फिर ये फाइटर जेट्स विकलांग हो सकते हैं।
माना जा रहा है, कि ताइवान पर खतरे को देखते हुए अमेरिका ने फौरन AIM-260 के निर्माण पर फोकस किया है, जिससे चीन का परेशान होना तय है।












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