इमरान खान ने फिर जनता को बनाया बेवकूफ, अधिकारियों ने कबूला अमेरिका को सैन्य अड्डा देने की बात!
पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान की सरकार के अधिकारियों ने पुष्टि कर दी है कि सीआईए के डायरेक्टर विलियन बर्न्स इस्लामाबाद के दौरे पर आए थे और सैन्य अड्डे को लेकर बात की है।
इस्लामाबाद, जून 09: पिछले 70 सालों में पाकिस्तान की गद्दी पर जो भी बैठा है वो अलग अलग अंदाज में अपनी जनता को बेवकूफ बनाता रहा है और उसी का नतीजा है कि पाकिस्तान हर अगले दिन जहालत, बेहाली और कट्टरता के दलदल में और धंसता जा रहा है। पिछले कई दिनों से आपने सुना होगा कि अमेरिका को सैन्य अड्डा देने के लिए इमरान खान और पाकिस्तान सरकार के कई मंत्री डंके की चोट पर मना कर रहे थे, ताल ठोकते हुए कह रहे थे कि किसी भी हाल में अमेरिका को पाकिस्तान में सैन्य अड्डा बनाने नहीं दिया जाएगा...लेकिन पाकिस्तान की सरकार खुद अमेरिका के साथ पर्दे के पीछे डील कर रही है और जनता के गुस्से को भांपने के लिए अलग अलग दलीलें मीडिया के जरिए छपवा रही हैं। पाकिस्तान की मीडिया ने नये दावे में कहा है कि कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के डारयेक्टर ने कहा कि इस बार पाकिस्तान के अंदर जो सैन्य ठिकाना अमेरिका बनाएगा, वहां से वो ड्रोन हमले नहीं करेगा। जाहिर सी बात है सीआईए डारयेक्टर ने ऐसा बयान यूं ही नहीं दिया है, इस बयान के पीछे वजह साफ है कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच सैन्य अड्डे को लेकर डील हो रही है या डील हो चुकी है।

सीआईए डायरेक्टर का दावा
पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान की सरकार के अधिकारियों ने पुष्टि कर दी है कि सीआईए के डायरेक्टर विलियन बर्न्स इस्लामाबाद के दौरे पर आए थे और सैन्य अड्डे को लेकर बात की है। इस दौरान सीआईए डायरेक्टर को पाकिस्तान ने कहा है कि अगर अमेरिका को सैन्य अड्डा मिलता है तो अमेरिका को यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि वो वहां से ड्रोन हमले नहीं करेगा। पाकिस्तानी अधिकारियों ने सीआईए डारयेक्टर के आने की बात तब कबूली है जब 6 जून को अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसका खुलासा किया था और दावा किया था कि सीआईए डायरेक्टर ने पाकिस्तान का दौरा किया था। जहां उन्होंने पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ जनरल लेफ्टिनेंट जनरल फैज अहमद से बात की थी और आतंकदाव के खिलाफ लड़ाई में दोनों देशों को एक दूसरे का साथ देने का सहयोग मांगा था।

अमेरिका का सैन्य अड्डा मिलने का दावा
अमेरिका की सरकार की तरफ से कई बार कहा गया कि पाकिस्तान अमेरिका को सैन्य अड्डा देने के लिए तैयार हो गया है, जबकि पाकिस्तान बार बार सार्वजनिक तौर पर इनकार कर रहा है। अमेरिका नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जैक सुलीवन ने पाकिस्तान में अमेरिका सैन्य अड्डे को लेकर कहा कि 'सैन्य अड्डे को लेकर पाकिस्तान के साथ हमारी सकारात्मक बात हुई है और अमेरिका भविष्य में भी ये सुनिश्चित करना चाहता है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल अलकायदा या कोई और आतंकी संगठन अमेरिका पर हमला करने के लिए ना करे।' इसके अलावा अमेरिका के कई अधिकारियों ने यहां तक कहा है कि पाकिस्तान सैन्य अड्डा देने के लिए तैयार हो चुका है। वहीं, पाकिस्तानी अधिकारियों ने ये तो कबूल कर लिया है कि सीआईए के डायरेक्टर ने पाकिस्तान का दौरा किया था लेकिन उन्होंने अभी तक ये नहीं बताया है कि वो कब इस्लामाबाद आए थे। पाकिस्तान की अखबार डॉन के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि सीआईए डारयेक्टर ने अप्रैल के आखिर में इस्लामाबाद का दौरा किया था।

क्या सिर्फ पैसों पर अटकी हुई है बात?
इस बात से कोई इनकार ही नहीं कर सकता है कि पाकिस्तान फिर से अमेरिका को सैन्य अड्डा नहीं देगा। हां, पाकिस्तान का नखरे दिखा रहा है, इससे कोई इनकार नहीं है। दरअसल, बात साफ और सीधी है कि पाकिस्तान अमेरिका से डील में लगा हुआ है और वो डील पैसों की है। अखबार डॉन के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी पाकिस्तान के कुछ सलेक्टेड पत्रकारों को खुफिया डिटेल में यही बताया है कि दोनों देशों के बीच सैन्य अड्डे को लेकर निगोसिएशन चल रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अभी 6 जून को अपनी रिपोर्ट में यही कहा था कि पाकिस्तान की सरकार अमेरिका को सैन्य अड्डा देने के लिए बहुत हद तक राजी हो चुकी है लेकिन इसके लिए पाकिस्तान ने अमेरिका के सामने कुछ शर्तों को रखा है। अब वो शर्तें रखने के पीछे पाकिस्तान का क्या एजेंडा हो सकता है, ये सब जानते हैं।

सच्चाई कब कबूलेंगे इमरान खान?
इसमें कोई दो राय नहीं है कि इमरान खान ने पाकिस्तान की जनता को फिर से बेवकूफ बना दिया है। इमरान खान और पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी छाती ठोककर कहते रहे कि पाकिस्तान किसी भी कीमत पर अमेरिका को सैन्य अड्डा नहीं देगा लेकिन अब खुद पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी कह दिया है कि पाकिस्तान शर्तों के साथ अमेरिका को सैन्य अड्डा देने के लिए तैयार हो गया है। ऐसे में सवाल ये है कि नया पाकिस्तान का नारा देने वाले इमरान खान के छाती में इतनी हिम्मत क्यों नहीं है कि वो सार्वजनिक तौर पर अमेरिका को सैन्य अड्डा देने की बात कबूल करे? तो बात साफ और सीधी है कि बिके हुए पाकिस्तानियों को जनता से किए गये वादे या देश के सम्मान से कोई फर्क नहीं पड़ता है। सैन्य अड्डा देने के नाम पर फिर से पाकिस्तान अमेरिका से कई मिलियन डॉलर लेगा और सरकार के मंत्री और सेना के अधिकारी पैसे खा जाएंगे और पाकिस्तान की जनता फिर से बेवकूफ बनेगी जो पिछले 70 सालों से बेवकूफ बनती आ रही है। हां, अगर कुछ विरोध शुरू होगा तो फिर उनके कानो में इमरान खान कश्मीर कश्मीर, भारत भारत करना शुरू करें और बेवकूफ बनकर जनता सब भूल जाएगी।












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