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पार्टनर बना रहा है Directed Energy system, चीनी हाइपरसोनिक मिसाइलों का बनेगा काल, भारत खुश

चीन और रूस के हाइपरसोनिक मिसाइलों को लेकर अमेरिकी नेवी के शीर्ष एडमिरल ने गहरी चिंता जताई है और उन्होंने कहा है कि, चीन और रूस जिस रफ्तार से अपनी हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ा रहे हैं, वो चिंता की बात है।

वॉशिंगटन, अगस्त 28: चीन लगातार हाइपरसोनिक मिसाइलों की रेस में आगे बढ़ता जा रहा है और विध्वंसक हाइपरसोनिक मिसाइलों का निर्माण कर रहा है, जो पलक झपकते ही अपने टारगेट को ध्वस्त कर सकता है। लिहाजा, ये भारत के लिए तो सबसे बड़ी चिंता की बात है ही, इसके साथ ही भारत के रणनीतिक पार्टनर अमेरिका के लिए भी ये चिंता की बात है। अमेरिका को डर है, कि चीनी हाइपरसोनिक मिसाइलें उसकी सेना को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं, क्योंकि हाइपरसोनिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराना मौजूदा टेक्नोलॉजी के साथ संभव नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हाइपरसोनिक मिसाइलों की रफ्तार इतनी ज्यादा होती है, कि मौजूदा रडार सिस्टम उसे डिटेक्ट नहीं कर सकते हैं और अगर रडार ने डिटेक्ट भी कर लिया, तो उसके पास इतनी क्षमता नहीं है, कि वो वक्त रहते उन मिसाइलों को मार सके, लिहाजा अब अमेरिका उन चीनी हाइपरसोनिक मिसाइलों से अपनी और अपने सहयोगी देशों की रक्षा के लिए Directed Energy Weapon तैयार कर रहा है, जो भारत के लिए खुश करने वाली खबर है।

अमेरिकन नेवी ने जताई गंभीर चिंता

अमेरिकन नेवी ने जताई गंभीर चिंता

चीन और रूस के हाइपरसोनिक मिसाइलों को लेकर अमेरिकी नेवी के शीर्ष एडमिरल ने गहरी चिंता जताई है और उन्होंने कहा है कि, चीन और रूस जिस रफ्तार से अपनी हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ा रहे हैं, वो अमेरिका की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण चिंता है। अमेरिकी नौसेना के ऑपरेशन प्रमुख एडमिरल माइकल गिल्डे ने इस हफ्ते कहा है, कि चीन और रूस की हाइपरसोनिक मिसाइलें अमेरिकन नेवी के युद्धपोत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं, लिहाजा, इस खतरे को नष्ट करने के लिए हाई एनर्जी वाले लेजर या हाई पावर वाले माइक्रोवेव का उपयोग करने वाली प्रणाली विकसित करना नौसेना के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि, "रक्षात्मक दृष्टिकोण से, हम खतरे पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। और हम इसे अनदेखा नहीं कर रहे हैं।"

हाइपरसोनिक मिसाइलों की स्पीड

हाइपरसोनिक मिसाइलों की स्पीड

हाइपरसोनिक मिसाइलें आवाज की रफ्तार से पांच से 6 गुना ज्यादा रफ्तार से ट्रैवल करती हैं और अमेरिकी डिफेंस सिस्टम के लिए एक अनूठी चुनौती हैं। हाइपरसोनिक मिसाइलें, पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में काफी ज्यादा तेजी से उड़ान भरते हैं और वे प्रेडिक्टेबल ट्रैजेक्टरी पर बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह नहीं उड़ते हैं, जिससे उनका पता लगाना और उन्हें हवा में ही मार गिराना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है। इन्हीं खतरों को देखते हुए अमेरिकी नौसेना के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि, रूस और चीन जैसे विरोधियों ने हाइपरसोनिक हथियारों में प्रगति की है। वे एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय हैं। आपको बता दें कि, रूस ने यूक्रेन युद्ध में अपनी हाइपरसोनिक किंजल मिसाइल का इस्तेमाल किया है, जबकि चीन ने पिछले साल हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन का परीक्षण किया था।

Directed Energy Weapon क्या है?

Directed Energy Weapon क्या है?

Directed Energy सिस्टम यानि निर्देशित ऊर्जा प्रणालियां, जो किसी प्रणाली को नष्ट करने या उसके इलेक्ट्रॉनिक्स को बाधित करने के लिए लेजर या माइक्रोवेव उत्सर्जक का उपयोग करती हैं। डायरेक्ट एनर्जी सिस्टम हाइपरसोनिक हथियारों से बचाव के लिए एक संभावित विकल्प हैं। इस महीने, अमेरिकी नौसेना ने यूएसएस प्रीबल पर लॉकहीड मार्टिन का हेलीओस लेजर सिस्टम भी स्थापित किया है। हालांकि, अभी तक इस सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया गया है, लिहाजा लेजर हथियार कितना शक्तिशाली और कितना असरदार हो सकता है, इसका पता नहीं चल पाया है, लेकिन डायरेक्टेड एनर्जी सिस्टम ऑप्टिकल-डैजलर और सर्विलांस के साथ हाई पावर लेजर का इस्तेमाल करता है, लिहाजा इससे हाइपरसोनिक मिसाइलों को हवा में ही ध्वस्त किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए काफी ज्यादा शक्तिशाली और सक्षम रक्षात्मक लेजर हथियारों का निर्माण करना पड़ेगा और अमेरिकी नेवी के वरिष्ठ अधिकारी ने इसी का जिक्र किया है।

रिसर्च और टेक्नोलॉजी पर काम शुरू

रिसर्च और टेक्नोलॉजी पर काम शुरू

अमेरिकी रक्षा विभाग के रिसर्च और इंजीनियरिंग विंग के अवर सचिव हेइडी श्यू ने निर्देशित ऊर्जा प्रणालियों को रक्षा विभाग के लिए महत्वपूर्ण महत्व के प्रौद्योगिकी क्षेत्र के रूप में नामित किया है। डायरेक्ट एनर्जी सिस्टम, जो लक्ष्यों को नष्ट करकने के लिए लेजर या माइक्रोवेव उत्सर्जक का उपयोग करती हैं, वो पिछले कई सालों से लोगों के लिए किसी विज्ञान की कहानी की तरह रही हैं, लेकिन अब टेक्नोलॉजी उस मुकाम तक पहुंच गई है, जहां पर यह एक काल्पनिक कहानी सच हो जाए और फिर युद्ध के मैदान में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाए।

दो जहाजों पर तैनाती

दो जहाजों पर तैनाती

साल 2014 में अमेरिकी नौसेना ने फारस की खाड़ी में यूएसएस पोंस पर एक लेजर हथियार प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण और तैनाती की थी। यह प्रणाली ड्रोन, छोटे विमान और छोटी नावों पर हमला करने और उन्हें ध्वस्त करने में सक्षम थी, वहीं पिछले साल, नौसेना ने यूएसएस पोर्टलैंड पर एक अधिक उन्नत लेजर प्रणाली का परीक्षण किया था। लेकिन, अब खतरा हाइपरसोनिक मिसाइलों से है, लिहाजा अब नई प्रणाली विकसित करने की जरूरत है। हालांकि, इस टेक्नोलॉजी को बनाने में जो शुरूआती परीक्षण किए गये हैं, वो फेल हो गये हैं।

हाइपरसोनिक ग्लाइड बॉडी का टेस्ट फेल

हाइपरसोनिक ग्लाइड बॉडी का टेस्ट फेल

पिछले दिनों पेंटागन ने कहा था, कि जुलाई महीने में सामान्य हाइपरसोनिक ग्लाइड बॉडी का एक परीक्षण फेल हो गया था। अमेरिकी नौसेना और सेना के बीच संयुक्त उद्यम कॉमन हाइपरसोनिक ग्लाइड बॉडी का पिछला परीक्षण भी वक्त से पहले ही खत्म कर दिया गया था, जब बूस्टर रॉकेट फेल हो गया। बूस्टर रॉकेट के बिना, पेंटागन कॉमन हाइपरसोनिक ग्लाइड बॉडी के परीक्षण को आगे नहीं बढ़ा सका। लेकिन गिल्डे ने को कहा कि, इस टेक्नोलॉजी को कामयाब बनाने के लिए लगातार रिसर्च किए जा रहे हैं और अमेरिकी नौसेना सफलता के लिए प्रतिबद्ध है। अमेरिकी नौसाने की योजना साल 2025 तक इस सिस्टम को अपने युद्धपोत पर और साल 2028 तक इस टेक्नोलजी को पनडुब्बियों पर तैनात करने की है।

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