ईरान कर सकता है अमेरिका पर हमला, खाड़ी में हजारों सैनिकों को भेजेगा US , चरम पर तनाव, क्या होगा?
US-Iran Conflict: अमेरिका के विश्लेषकों ने आशंका जताई है, कि खाड़ी में संयुक्त राज्य अमेरिका के लगातार बढ़ते सैन्य निर्माण से ईरान के साथ "खतरनाक" टकराव का खतरा है, क्योंकि दोनों देश कूटनीति के रास्ते अपने मुद्दों को हल करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। पेंटागन ने इस हफ्ते घोषणा की है, कि होर्मुज स्ट्रेट, जैसे शिपिंग लेन को ईरानी "हमलों" से बचाने में मदद के लिए, हजारों अमेरिकी सैनिकों को इस क्षेत्र में तैनात किया जा रहा है।
आपको बता दें, कि ईरान पर पिछले कुछ महीनों में कई बार आरोप लगे हैं, कि वो होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका के व्यापारिक जहाजों को किडनैप कर लेता है या उनपर हमला कर देता है, लिहाजा अपने जहाजों को बचाने के लिए अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में हजारों सैनिकों को तैनात करने का फैसला किया है, जिससे ईरान भड़क गया है।

ईरान-अमेरिका में बढ़ा तनाव
एसोसिएटेड प्रेस समाचार एजेंसी ने पिछले हफ्ते यह भी बताया था, कि अमेरिकी सेना खाड़ी में मुख्य प्रवेश द्वार, जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर सैनिकों को रखने पर विचार कर रही है, जो एक अभूतपूर्व कार्रवाई होगी।
उस रिपोर्ट पर ईरान की ओर से बौखलाहट भरी प्रतिक्रिया दी गई और कहा गया, कि वह अमेरिकी कदमों के जवाब में अपनी रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना को ड्रोन और मिसाइलों से लैस करेगा।
अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन डीसी में सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी थिंक टैंक के एक वरिष्ठ साथी सिना टूसी ने कहा, कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन अपने पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध और वृद्धि की "असफल नीति" को बढ़ाकर दोगुना कर रहे हैं।
2018 के बाद से अमेरिका-ईरानी संबंध तेजी से तनावपूर्ण हुए हैं, जब ट्रम्प ने एक बहुपक्षीय परमाणु समझौते को एकतरफा फैसला लेते हुए रद्द कर दिया था, और ईरान के खिलाफ अमेरिका ने सख्त प्रतिबंध लगा दिए थे। जिसके बाद ईरान ने भी अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का फैसला किया और पिछले दिनों आई यूएन रिपोर्ट में कहा गया है, कि परमाणु बम बनाने से ईरान महज एक साल दूर है।
अमेरिकी थिंक टैंक के सीनियर फेलो टूसी ने अलजजीरा के एक रिपोर्ट में कहा है, कि "ये तनाव सिर्फ पांच सालों में नहीं बढ़े हैं, बल्कि ये दशकों का नतीजा है, जो युद्ध की तरफ बढ़ता है। अगर अमेरिका आगे बढ़ेगा, तो ईरान जवाबी हमला करेगा और ये बहुत खतरनाक साबित होगा।"
जहाजों को किडनैप करता है ईरान?
पिछले कुछ महीनों में अमेरिका ने ईरान पर, खाड़ी से होकर जाने वाले कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों को जब्त करने का आरोप लगाया है।
लेकिन विश्लेषकों ने इस बात पर प्रकाश डाला है, कि रणनीतिक जल क्षेत्र में तेहरान का हालिया वर्ताव उस घटना के बाद आया है, जब अमेरिका ने प्रतिबंधों का हवाला देकर ईरा के एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया था।
ईरान का ये जहाज फिलहाल टेक्सास के तट से दूर है, लेकिन कई अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स ने रिपोर्ट दी है, कि अमेरिकी तेल कंपनियां खाड़ी में अपने जहाजों के खिलाफ ईरान के बदले की कार्रवाई के डर से, जब्त किए गए ईरानी तेल को खरीदने से इनकार कर रही हैं।
टूसी ने कहा, कि दोनों देश यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, कि वे दूसरे पक्ष के आक्रामक कदमों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है, कि अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव खतरनाक मोड़ की तरफ बढ़ रहा है और युद्ध की आशंका बन रही है।

कूटनीतिक संभावनाएं भी तोड़ रहीं दम
और इस वर्ष कूटनीति की संभावना धूमिल हो गई है।
बाइडेन ने 2021 की शुरुआत में ईरान परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने का वादा किया था। आपको बता दे कि अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के साथ ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) कहा जाता है, जिससे अमेरिका ट्रंप के कार्यकाल में पीछे हट गया था।
वहीं, राष्ट्रपति बनने से पहले बाइडेन ने वादा किया था, कि वो ईरान के साथ समझौते को फिर से बहाल करेंगे, लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने ऐसा नहीं किया, बल्कि उन्होंने ट्रंप से भी एक कदम आगे बढ़ाते हुए, प्रतिबंधों को और सख्त कर दिया।
'खतरनाक कॉकटेल'
वाशिंगटन डीसी स्थित ग्रुप नेशनल ईरानी अमेरिकन काउंसिल (एनआईएसी) के नीति निदेशक रयान कॉस्टेलो, जो ईरान के साथ अमेरिकी कूटनीति के पक्षधर हैं, उन्होंने कहा, कि खाड़ी में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को बढ़ाने का फैसला इस तरह का है, मानो ट्रंप युग में फिर से अमेरिका चला गया हो।
कॉस्टेलो ने कहा, कि जबकि बाइडेन प्रशासन यह तर्क दे रहा है, कि वह ईरान को जहाजों को परेशान करने से रोकने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान का मानना है, कि अब अमेरिका और भी ज्यादा आसानी से ईरान के तेल टैंकरों को जब्त कर सकता है। लिहाजा, खाड़ी देशों में एक 'खतरनाक कॉकटेल' का निर्माण हो रहा है, जो युद्ध को जन्म दे सकता है।












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