'अमेरिका हर दिन भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर पर नजर बनाए है', ट्रंप के विदेश मंत्री ने क्यों कहा?
India Pakistan ceasefire US involvement: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर का श्रेय दुनिया के हर मंच से लेते रहे हैं। अब उनके विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक कदम आगे बढ़कर दावा किया कि अमेरिका हर दिन दोनों देशों की स्थिति पर नजर रखता है और ट्रंप प्रशासन ने शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।
ट्रंप और रुबियो के इन बयानों से लगता है कि अमेरिका न केवल संघर्ष को रोकने का प्रयास कर रहा है, बल्कि खुद को शांति का 'महानायक' भी मानने लगा है।

मार्को रुबियो ने क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका हर दिन भारत और पाकिस्तान के बीच हालात पर नजर रखता है, क्योंकि सीजफायर बनाए रखना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने और संघर्ष कम करने में सक्रिय भूमिका निभाई। रुबियो ने यह भी बताया कि सीजफायर तभी टिक सकता है जब दोनों पक्ष फायरिंग रोकने के लिए सहमत हों, और इसके पालन में कठिनाइयाँ होती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका इसी तरह कंबोडिया-थाईलैंड संघर्ष पर भी नजर रखता है।
ट्रंप ने बार-बार लिया भारत-पाक सीजफायर का श्रेय
10 मई से, जब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि भारत और पाकिस्तान ने वॉशिंगटन के मध्यस्थता में हुई लंबी रात की बातचीत के बाद पूर्ण और तत्काल सीजफायर पर सहमति जताई है, तब से उन्होंने लगभग 40 बार यह दावा दोहराया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को सुलझाने में मदद की। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने परमाणु संपन्न दक्षिण एशियाई पड़ोसियों को बताया कि अगर वे संघर्ष रोकेंगे तो अमेरिका उनके साथ काफी व्यापार करेगा।
ट्रंप के इस दावे को भारत सरकार खारिज कर चुका है
हालांकि, ट्रंप के इस दावे को भारत सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात पर अमेरिका या किसी अन्य देश का कोई दबाव नहीं रहा और किसी भी सीजफायर की पहल पूरी तरह भारत की रणनीति और संप्रभु निर्णयों पर आधारित रही। भारत सरकार ने यह भी कहा कि ट्रंप के दावे में वास्तविकता का कोई आधार नहीं है और यह सिर्फ व्यक्तिगत बयान है।
बढ़ा-चढ़ा कर पेश करना पुरानी अमेरिकी आदत
विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की इस तरह की घोषणाएं अक्सर अमेरिकी प्रशासन के नजरिए को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने की कोशिश मानी जाती हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का समाधान हमेशा क्षेत्रीय और द्विपक्षीय प्रयासों के माध्यम से ही संभव है, और किसी तीसरे पक्ष के दावे को इस प्रक्रिया के बराबर नहीं माना जा सकता।












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