US Iran War: 'हम नहीं पता था ईरान ऐसा करेगा', खामेनेई की फौज ने तोड़े Trump के हौसले, किसने दी थी चेतावनी?
US Iran War: 28 फरवरी की सुबह जब खबर आई अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला कर दिया है, तब Doanld Trump को ऐसा लग रहा था कि शायद एक हफ्ते तक ये युद्ध चलेगा और ईरान सरेंडर कर देगा। लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा, भले ही ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मारे गए, मगर ईरान और ज्यादा अग्रेसिव तरीके से इस को लड़ रहा है। उसने अमेरिका की उन सभी दुखती नसों को कस कर दबाया है जिसका अंदाजा अमेरिका को भी नहीं था।
हाल ही में ट्रंप ने खाड़ी देशों में हुए ईरान के हमलों को चौंकाने वाला बताते हुए कहा- 'हमें इसका अंदाजा नहीं था'। लेकिन दूसरी तरफ रिपोर्ट्स यह इशारा करती हैं कि ऑपरेशन से पहले ही ट्रंप को इस संभावित जवाबी कार्रवाई के बारे में जानकारी दी गई थी।

पहले से पता था खाड़ी देशों पर होगा हमला?
रॉयटर्स के मुताबिक, युद्ध से पहले तैयार किए गए खुफिया आकलन में साफ तौर पर कहा गया था कि ईरान कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत जैसे देशों को निशाना बना सकता है। हालांकि इसे पूरी तरह तय नहीं माना गया था, लेकिन इसको संभावित हमलों में जरूर रखा गया था।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी चेतावनी
राष्ट्रपति को यह भी चेतावनी दी गई थी कि ईरान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को बंद करने की कोशिश कर सकता है। अगर ऐसा होता, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकता था। जिसके बाद अमेरिका पर ही जंग खत्म करने का दबाव बढ़ेगा।
एक्सपर्ट्स ने ट्रंप को किया था आगाह
सिर्फ खुफिया एजेंसियां ही नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया के कई एक्सपर्ट्स ने भी पहले ही ईरान की जवाबी कार्रवाई को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर कहा था कि अगर ईरान पर हमला होता है, तो वह चुप नहीं बैठेगा। अमेरिकी विदेश विभाग में करीब 20 साल तक ईरान नीति पर काम कर चुके Nate Swanson ने हमले से चार दिन पहले ही एक लेख लिखा था, जिसका टाइटल था ईरान क्यों बढ़ेगा। इस आर्टिकल में उन्होंने साफ कहा था कि स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है।
'ईरान को समझने में बुरी तरह फेल हुए ट्रंप'
स्वैनसन ने लिखा कि ट्रंप यह समझने में बुरी तरह फेल हो रहे हैं कि ईरान की कमजोरी उसे झुकने पर मजबूर नहीं करेगी। इसके उलट, यह कमजोरी हालात को और ज्यादा खतरनाक बना सकती है और समझौते की संभावना कम कर सकती है।
चेतावनियों को मानने के लिए तैयार नहीं थे ट्रंप
इन सभी चेतावनियों के बावजूद ट्रंप लगातार यही कहते रहे कि उन्हें किसी जवाबी हमले की उम्मीद नहीं थी। सोमवार को जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें खाड़ी देशों पर हमले के जोखिम की जानकारी दी गई थी, तो उन्होंने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया।
ट्रंप ने कहा, "कोई नहीं, बिल्कुल नहीं"। सबसे बड़े जानकारों ने भी नहीं सोचा था कि वे हमला करेंगे। उन्हें इन देशों पर हमला नहीं करना था। किसी को इसकी उम्मीद नहीं थी, सभी हैरान थे। उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी देश ईरान के साथ अपने रिश्तों में काफी हद तक अमेरिका के साथ थे।
हमला हुआ तो जवाब देंगे- ईरान
ईरान ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर उस पर हमला हुआ, तो वह जवाब जरूर देगा। इसके बावजूद अमेरिकी नेतृत्व ने इस खतरे को गंभीरता से नहीं लिया या सार्वजनिक तौर पर इसे स्वीकार नहीं किया। जिसका अंजाम अब पूरी दुनिया देख रही है।
सवालों के घेरे में ट्रंप
युद्ध के 17 दिन बीत जाने के बाद भी ट्रंप और नेतन्याहू के हाथ कुछ नहीं लगा है। उल्टा कई देश गैस और तेल की किल्लत से जूझने लगे हैं। असर पाकिस्तान से लेकर जापान तक है। लिहाजा, सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या ट्रंप को पहले से चेतावनी मिलने के बावजूद भी उसे नजरअंदाज क्यों किया?
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