US Iran War: ईरान पर न्यूक्लियर अटैक करने जा रहा America? तेहरान का सुरक्षा घेरा तोड़ने पहुंचे US नेवी के जहाज
US Iran War: US नेवी का शक्तिशाली एयरक्राफ्ट करियर USS अब्राहम लिंकन इस समय सक्रिय मूवमेंट में है और इसी वजह से हालात बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। US नेवल इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह निमिट्ज़-क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर मलक्का जलडमरूमध्य (Strait Of Hormuz) पार करने के बाद अंडमान सागर से पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा था। इसका अगला पड़ाव अरब सागर बताया गया है।
अरब सागर की दिशा क्यों बढ़ा रही है चिंता
अरब सागर की ओर बढ़ते ही USS अब्राहम लिंकन ईरान की सैन्य मारक दूरी के भीतर आ जाएगा। यही वजह है कि इस मूवमेंट को सामान्य नौसैनिक गतिविधि नहीं माना जा रहा। एक्सपर्ट मानते हैं कि यह क्षेत्र पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का बड़ा केंद्र रहा है और ऐसे में इस तरह की तैनाती हालात को और नाज़ुक बना सकती है।

AIS ट्रांसपोंडर बंद होने से बढ़ा खतरा
इसी दौरान यह भी सामने आया है कि USS अब्राहम लिंकन ने अपने AIS यानी ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम ट्रांसपोंडर बंद कर दिए हैं। यह सिस्टम जहाज़ की लोकेशन को सार्वजनिक रूप से दिखाता है। सैन्य अभियानों में ट्रांसपोंडर बंद करना सुरक्षा के लिहाज़ से सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन मौजूदा अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इस कदम ने अनिश्चितता और आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।
अमेरिका-ईरान टकराव फिर खतरनाक मोड़ पर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान की ओर से सीधी चेतावनी दी गई है कि "हमारी उंगली ट्रिगर पर है", जिसे खुली सैन्य धमकी के तौर पर देखा जा रहा है। इसके जवाब में अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि "हमारी सेना उस दिशा में आगे बढ़ रही है।"
US नेवल इंस्टीट्यूट रिपोर्ट में क्या खुलासा
US नेवल इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, निमिट्ज़-क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन ने स्ट्रेट ऑफ मलक्का पार कर लिया है और अब वह अरब सागर की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि AIS ट्रांसपोंडर को बंद करना सैन्य रणनीति का हिस्सा है, लेकिन मौजूदा हालात में इसका राजनीतिक और रणनीतिक मतलब और गहरा हो जाता है।
ट्रंप का सख्त बयान भी बना तनाव की वजह
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी सामने आया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान किसी समझौते पर नहीं आता, तो अमेरिका की आगे की कार्रवाई और भी सख्त हो सकती है। इस बयान को अमेरिका की "प्रेशर स्ट्रैटेजी" के तौर पर देखा जा रहा है।
दबाव की रणनीति या युद्ध की तैयारी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि USS अब्राहम लिंकन की यह मूवमेंट सिर्फ ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति है या फिर किसी बड़े सैन्य टकराव की तैयारी। इतिहास में कई बार इस तरह की सैन्य तैनाती बातचीत का रास्ता खोलती रही है, लेकिन कई बार यही कदम युद्ध की शुरुआत भी बन चुके हैं।
क्या दुनिया एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रही है?
USS अब्राहम लिंकन की तैनाती, AIS ट्रांसपोंडर का बंद होना, ईरान की खुली चेतावनी और अमेरिका का सख्त रुख-इन सबने हालात को बेहद नाज़ुक बना दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि यह टकराव सिर्फ चेतावनियों तक सीमित रहेगा या फिर दुनिया एक और बड़े युद्ध की गवाही देने वाली है।
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