US Iran Deal: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर होगी हॉटलाइन, किसका होगा नियंत्रण, दुनिया भर को क्या मिलेगा फायदा?
US Iran Deal: स्विट्जरलैंड के लेक लूसर्न में 21 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता ने वैश्विक स्तर पर विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच कई संवेदनशील और मुद्दों पर सहमति बनती नजर आई। इस बैठक मे सबसे अहम बात ये रही कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष हॉटलाइन और कम्युनिकेशन सेंटर स्थापित करने की अमेरिका की शर्त को ईरान मान गया है।
इस समझौते के बाद मिडिल ईस्ट के तनाव को कम करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। हालांकि इसके बाद ईरानी संसद के प्रेसिडेंट मोहम्मद बागेर घालिबाफ ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर एक बड़ा बयान दिया है।

Strait of Hormuz का पूरा संचानल ईरान ही करेगा
घालिबाफ ने साफ शब्दों में कहा है कि इंटरनेशनल समुद्री जलमार्ग का मैनेजमेंट अब कभी भी युद्ध से पहले वाली स्थिति में नहीं लौटेगा। उनके अनुसार, भविष्य में इस महत्वपूर्ण कामर्शियल रास्ते की व्यवस्था पूरी तरह से ईरानी सुरक्षा और प्रशासनिक इंतजामों के तहत ही चलेगी।
अमेरिका पर भरोसा नहीं, फिर क्यों हॉटलाइन के लिए हुआ राजी?
हालांकि ईरानी वार्ताकार ने साफ किया कि हालांकि तेहरान ने अमेरिका पर कभी भरोसा नहीं किया है और न ही कभी करेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में इस जलमार्ग पर रात के समय कुछ हिंसक झड़पें भी देखी गई हैं। ऐसे में यह हॉटलाइन समुद्री यातायात को सुचारू बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों को सटीकता से लागू करने में मदद करेगी।
हॉटलाइन क्यों है जरूरी?
पहले इस जलमार्ग में सुरक्षा को लेकर दोनों पक्षों के बीच सीधे बातचीत का कोई त्वरित जरिया नहीं था, जिससे हमेशा सैन्य झड़पों की आशंका बनी रहती थी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में किसी भी तरह की गलतफहमी या अस्पष्टता को तुरंत दूर करना है।
हॉटलाइन ग्लोबल से ऑयल मार्केट और शिपिंग पर असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है। ये पूरी दुनिया के आर्थिक हितों और इंटरनेशनल मार्केट के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाले इस बेहद सकरे जलमार्ग से दुनिया के कुल समुद्री तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां होने वाली किसी भी छोटी टकराव की घटना से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
यदि हॉटलाइन और कम्युनिकेशन सेंटर सफल तरीके से काम करेगा तो इंटरनेशनल जहाजों की आवाजाही को बड़ा सुरक्षा कवच मिलेगा। इंटरनेशनल ऊर्जा बाजार में स्थिरता के साथ कामर्शियल जहाज वाली कंपनियां का भरोसा भी मजबूत होगा।दूसरी ओर, अमेरिका इस जलमार्ग पर अपनी पकड़ को कमजोर नहीं होने देना चाहता। समझौते के तहत बनाई गई हॉटलाइन और समन्वय केंद्र को अमेरिकी प्रशासन अपनी नौसैनिक सुरक्षा के पूरक के तौर पर देख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच आगामी दिनों में होने वाले अंतिम समझौते के नियम ही यह तय करेंगे कि होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन कितना सुरक्षित और निर्बाध रहेगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खुलते ही गिरी कच्चे तेल की कीमतें
बता दें अमेरिकी-ईरान समझौते के बाद इसे दोबारा खोला गया। जिसे युद्ध की शुरुआत में ईरान द्वारा बंद कर दिया गया था। इसके खुलने से इंटरनेशनल तेल मॉर्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिली है। 'मैरीन ट्रैफिक' के आंकड़ों के अनुसार, पिछले चौबीस घंटों में इस रणनीतिक जलमार्ग से कम से कम दो दर्जन बड़े व्यापारिक जहाज सुरक्षित गुजरे हैं।












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