US 500% Tariff Bill: क्या भारत ने बंद कर दिया रूस से तेल खरीदना? ट्रंप के मंत्री के दावों में कितनी सच्चाई
US 500% Tariff Bill: अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने हाल ही में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का मुख्य उद्देश्य रूस के युद्ध कोष को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोकना है। बेसेन्ट के अनुसार, इसके लिए राष्ट्रपति को सीनेट की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है, वे अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन शक्तियों (IEPA) का उपयोग कर सकते हैं।
हालांकि इस सूची में चीन मुख्य निशाने पर है, लेकिन भारत को लेकर बेसेन्ट ने दावा किया है कि नई दिल्ली ने अमेरिकी व्यापारिक रुख के बाद रूसी तेल के आयात को पूरी तरह बंद कर दिया है।

Donald Trump India Russia Oil:500% टैरिफ बिल और उसका उद्देश्य
यह प्रस्तावित कानून 'रूस प्रतिबंध विधेयक' (Russia Sanctions Bill) के नाम से जाना जाता है, जिसे सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पेश किया है। इसका मुख्य लक्ष्य उन देशों पर भारी आर्थिक दंड लगाना है जो रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदकर मास्को की अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि 500% जैसा विशाल टैरिफ एक कड़ा संदेश देगा। हालांकि सीनेट में इस पर चर्चा जारी है, लेकिन व्हाइट हाउस इसे बिना विधायी प्रक्रिया के भी लागू करने की तैयारी में है।
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US China Trade War: चीन पर बढ़ता अमेरिकी दबाव
वाशिंगटन की नजर में चीन वर्तमान में रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, जो रूस को युद्ध जारी रखने के लिए वित्तीय ऑक्सीजन प्रदान कर रहा है। बेसेन्ट ने स्पष्ट किया कि 500% टैरिफ की धमकी का प्राथमिक लक्ष्य बीजिंग ही है। अमेरिका का तर्क है कि चीन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर रूस के साथ व्यापार बढ़ा रहा है। यह टैरिफ चीन की विनिर्माण और निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था को भारी चोट पहुंचा सकता है, जिससे उसे रूस के साथ अपने ऊर्जा संबंधों पर पुनर्विचार करना पड़ेगा।
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भारत के प्रति ट्रंप प्रशासन का रुख
भारत के संदर्भ में बेसेन्ट का दावा काफी चर्चा में है। उन्होंने कहा कि 25% अमेरिकी टैरिफ के डर और बदली हुई रणनीति के कारण भारत ने अब रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है। हालांकि भारत ने युद्ध की शुरुआत के बाद अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा था, लेकिन अमेरिका का मानना है कि उनकी सख्त व्यापार नीति ने भारत को अपना रुख बदलने पर मजबूर किया। यह बयान भारत-अमेरिका के बीच भविष्य के व्यापारिक संतुलन को दर्शाता है।
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भारत की प्रतिक्रिया और भविष्य की रणनीति
प्रस्तावित प्रतिबंधों और बेसेन्ट के दावों पर भारत सरकार ने सतर्क रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत इस बिल और उससे जुड़े घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहा है। भारत हमेशा से यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हितों और जनता की जरूरतों पर आधारित होती है। फिलहाल, नई दिल्ली वाशिंगटन के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों और अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रही है।












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