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अमेरिका अब नहीं होगा दिवालिया, यूएस हाउस ने पास किया कर्ज की सीमा बढ़ाने वाला बिल, दुनिया से बड़ा संकट टला

अमेरिका में राजनीति रस्साकसी की वजह से डिफॉल्ट होने का खतरा मंडरा रहा था। बाइडेन प्रशासन को रिपब्लिकन पार्टी के सामने एक कदम पीछे होना पड़ा है।

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US Default News: सुपरपावर अमेरिका के ऊपर से मंडरा रहा दिवालिया होने का खतरा अब टल गया है और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने कर्ज की सीमा रेखा को बढ़ाने वाला बिल पास कर दिया है।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने कर्ज की लिमिट बढ़ाने वाला बिल उस वक्त पास किया है, जब अमेरिका के पास सिर्फ पांच दिनों का समय बचा था और अमेरिकी ट्रेजरी ने बताया था, कि अगर 5 जून तक कर्ज की सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो देश डिफॉल्ट हो जाएगा।

इस बिल के पास होने का मतलब है, कि अमेरिकी सरकार, जिसके खर्च करने की क्षमता 31.4 ट्रिलियन डॉलर थी, उस सीमा रेखा को सस्पेंड कर दिया गया है और खर्च करने की नई सीमा रेखा तय की गई है, जिसके पक्ष में अमेरिका की दोनों राजनीतिक पार्टियां, डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन के सांसदों ने वोट डाला। हालांकि, दोनों ही पार्टियों के कई सांसदों ने बिल के खिलाफ भी वोट डाला।

प्रतिनिधि सभा ने पास किया बिल

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा, जिसमें रिपब्लिकन पार्टी को बहुमत है, उसमें इस बिल को 314-117 के बहुमत से बिल को पास किया गया और कानून बनाने के लिए उसे सीनेट में भेजा जाएगा। सीनेट में पास होने के बाद बिल को राष्ट्रपति जो बाइडेन के पास भेजा जाएगा और उनके दस्तखत के बाद कर्ज की सीमा बढ़ाने वाला कानून बन जाएगा। कानून के बनते ही बाइडेन प्रशासन अपने बिलों का भुगतान करने में सक्षम हो जाएगी और अमेरिका डिफॉल्ट होने से बच जाएगा।

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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन को उम्मीद है, कि देश को डिफॉल्ट से बचाने वाला बिल तय समय से पहले उनकी डेस्क पर होगा।

एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अगर अमेरिका डिफॉल्ट होता है, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसके विनाशकारी परिणाम होंगे। ये ना सिर्फ अमेरिका की इकोनॉमी को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि दुनिया भर के वित्त बाजार को अस्थिर कर देगा। हालांकि, अब उम्मीद है, कि ऐसा नहीं होगा।

कर्ज की सीमा रेखा को बढ़ाने वाले बिल को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रतिनिध सभा के स्पीकर केविन मैकार्थी के बीच दो दिन पहले एक समझौता किया गया था। जिसके बाद बिल को प्रतिनिधि सभा में पेश किया गया है। हालांकि, इस समझौते के बाद भी रिपब्लिकन पार्टी के 71 सांसदों ने बिल के विरोध में वोट डाला, लेकिन 165 डेमोक्रेटिक सदस्यों के समर्थन की वजह से प्रतिनिधि सभा में बिल आसानी से पास हो गया।

आपको बता दें, कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी 222-213 बहुमत से सदन को नियंत्रित करते हैं।

ये बिल अमेरिका की सरकार को 1 फरवरी 2025 तक के लिए उधारी की सीमा को अस्थाई तौर पर बढ़ाने की इजाजत देता है। यानि, बाइडेन सरकार के कार्यकाल खत्म होने के बाद जब देश में नई सरकार का गठन होगा, तो फिर नई सरकार, सरकार के खर्च करने की सीमा को लेकर फैसला करेगी।

प्रतिनिधि सभा में पास बिल में क्या है?

प्रतिनिधि सभा में जिस बिल को पास किया गया है, उसे राष्ट्रपति बाइडेन और हाउस स्पीकर केविन मैकार्थी के बीच हुए समझौते के बाद तैयार किया गया था।

ये बिल बाइडेन प्रशासन को अगले दो सालों में कई सरकारी खर्च करने की सीमा को सीमित करेगा। वहीं, कुछ ऊर्जा परियोजना के लिए भी अनुमति देने की प्रक्रिया को तेज करेगा। इसके अलावा, इस्तेमाल नहीं किए गये कोविड फंड को जारी होने से रोकेगा। इसके साथ ही, अमेरिका अब दुनियाभर में जो सोशल कार्यक्रम चलाता है, उसकी फंडिग में भी कमी कर दी गई है। उदाहरण के तौर पर अमेरिका, पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन समेत कई स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए फंड जारी करता है, जिसपर अब रोक लगा दी गई है। इसका असर भारत में भी चलने वाले कई कार्यक्रमों पर पड़ेगा।

कांग्रेस बजट कार्यालय ने बिल पास होने के बाद कहा है, कि कानून बनने के बाद अगले एक दशक में अमेरिका करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर की बचत करेगा। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी का लक्ष्य इस बचत को बढ़ाकर 4.8 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने की थी, जिससे अमेरिका का घाटा 3 ट्रिलियन डॉलर तक कम होता, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

डेट सीलिंग संकट क्या है?

दुनिया की हर सरकार की तरह अमेरिका की सरकार भी अपने खर्च की पूर्ति के लिए कर्ज लेती है और अमेरिका की सरकार की खर्च करने की सीमा रेखा क्या होगी, इसका फैसला अमेरिका की संसद यानि प्रतिनिधि सभा में तय किया जाता है।

अमेरिका की सरकार टैक्स और दूसरे सोर्स से जितना कमाती है, उससे कई गुना ज्यादा खर्च करती है और उस गैप को भरने के लिए भारी-भरकम कर्ज लेती है। अमेरिका के लिए ऐसा करना एक सामान्य प्रक्रिया है, क्योंकि अमेरिका दुनियाभर में वेलफेयर कार्यक्रमों का संचालन करता है। अमेरिका में साल 1978 के बाद से खर्च करने की सीमा रेखा को 78 बार बढ़ाया जा चुका है और इस वक्त सरकार की खर्च करने की सीमा रेखा 31.4 ट्रिलियन डॉलर है।

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    प्रतिनिधि सभा, यानि अमेरिकी संसद ने इसी सीमा रेखा को नया बिल पास कर सस्पेंड कर दिया है और सीनेट में पास होने के बाद जैसे ही रष्ट्रपति जो बाइडेन उसपर दस्तखत करेंगे, ये बिल कानून बन जाएगा और अमेरिका डिफॉल्ट होने से बच जाएगा।

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