काबुल पर कब्जे के लिए निकला तालिबान, रोकने के लिए अमेरिका ने भेजा F-16 विमान, आर-पार की जंग?
अफगानिस्तान से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने आनन-फानन में अपना लड़ाकू विमान एफ-16 को अपने कतर स्थिति एयरबेस से काबुल भेजा है।
काबुल, अगस्त 08: अफगानिस्तान सरकार पर लगातार खतरा मंडराता जा रहा है और दो प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा करने के बाद अब आशंका जताई जा रही है कि अफगानिस्तान के कई प्रांतीय राजधानियों पर तालिबान का कब्जा हो सकता है। इन सबके बीच खबर आ रही है कि अमेरिका ने अफगानिस्तान सरकार को बचाने के लिए कतर स्थित मध्य कमान से एफ-16 लड़ाकू विमानों को काबुल भेज दिया है, जहां अमेरिकी फाइटर जेट लगातार गश्ती कर रहे हैं वहीं कुछ एयरक्राफ्ट तालिबान के इलाकों में बमबारी कर रहे हैं।

काबुल में अमेरिकी विमान
अफगानिस्तान से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने आनन-फानन में अपना लड़ाकू विमान एफ-16 को अपने कतर स्थिति एयरबेस से काबुल भेजा है जो लगातार राजधानी में गश्त ऑपरेशन चला रही है। वहीं, इससे पहले अमेरिकी बमवर्षक जहाज बी-52 और एसी-10 लगातार तालिबान के ठिकानों पर हमला कर रहे हैं, जबकि एफ-16 को अफगानिस्तान सरकार को तालिबान से बचाने के लिए भेजा गया है, ताकि कट्टर इस्लामी सुन्नी पश्तून तालिबान को अफगानिस्तान की राजधानी पर कब्जा करने से रोका जाए। वहीं, रिपोर्ट आ रही है कि अमेरिकी एफ-16 लड़ाकू विमान ने तालिबान को रोकने के लिए पूर्वी और दक्षिण अफगानिस्तान पर बमबारी की है। जबकि, तीन प्रांतों की राजधानी पर कब्जा करने के लिए तालिबान काफी खतरनाक लड़ाई कर रहा है। वहीं कुदूज में अफगान सेना को भारी नुकसान होने की खबर है, जिसकी पुष्टि अफगानिस्तान सेना ने की है।

लाड़कू विमान एफ-16 से बमबारी
अमेरिकी वायु सेना की मध्य कमान, दक्षिण और पूर्वी अफगानिस्तान के पश्तून गढ़ों में तालिबान के ठिकानों पर हमला करने के लिए भारी-भरकम बी-52 बमवर्षकों और एसी-10 स्पेक्टर गनशिप का इस्तेमाल कर रही है। अमेरिकी विमानों ने जौजान में शेबर्गन और हेलमंद में लश्कर गाह पर भी बमबारी की है। आपको बता दें कि अमेरिकी सेना को 31 अगस्त को अफगानिस्तान से बाहर निकलना है। काबुल स्थित राजनयिकों के अनुसार, यह स्पष्ट है कि तालिबान, पड़ोसी देश पाकिस्तान से सार्वजनिक आश्वासन के बावजूद, बातचीत के माध्यम से सत्ता साझा करने के मूड में नहीं है और अमेरिका और ब्रिटेन की पूरी रणनीति चरमरा गई है। वहीं, इस्लामाबाद में 17 अगस्त से 19 अगस्त तक होने वाली शांति प्रक्रिया बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। बताया जा रहा है कि इस्लामाबाद में बैठक रखना ब्रिटेन के सेना प्रमुख जनरल निक कार्टर और यूएस-अफगान विशेष प्रतिनिधि ज़ाल्मय खलीलज़ाद के दिमाग की उपज थी।

इस्लामाबाद जाएंगे अफगान राष्ट्रपति ?
रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान की खराब स्थिति के बीच अब पाकिस्तान चाह रहा है कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी को इस्लामाबाद के राजकीय दौरे पर बुलाया जाए और उनकी मुलाकात आमने-सामने तालिबान के नेताओं से करवाई जाए। हालांकि, रिपोर्ट है कि अफगान राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का राजकीय दौरा करने से साफ इनकार कर दिया है और उन्होंने पाकिस्तान पर तालिबान को बढ़ावा देने और अफगानिस्तान की बर्बाद स्थिति के पीछे पाकिस्तान को ही जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, रिपोर्ट है कि पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं ने तालिबान के मुल्ला याकूब और सिराजुद्दीन हक्कानी जैसे नेताओं से इस्लामाबाद में बैठक को लेकर बातचीत की है। अफगान सेना की बैठक भी 11 अगस्त को दोहा में निर्धारित है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, कतर, तुर्की और ईरान के विशेष अधिकारी शामिल होंगे। वहीं, तालिबान के साथ अपने करीबी रिश्ते की वजह से पाकिस्तान पूरी कोशिश कर रहा है कि भारत को इस बैठक से अलग रखा जाए।

काबुल की तरफ बढ़ता तालिबान
एक तरफ पाकिस्तान इस्लामाबाद में बैठक करवाना चाहता है, तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान सरकार को बचाने के लिए अमेरिका को एफ-16 फाइटर जेट को काबुल में गश्त पर भेजना पड़ा है। रिपोर्ट है कि तालिबान जल्द की आधा दर्जन से ज्यादा अफगानिस्तान के प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर लेगा, ऐसे में अनिश्चितता का खतरा अफगान सरकार पर ही होगा। तालिबान साफ कर चुका है कि बातचीत करने की उसकी पहली शर्त ही ये है कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी इस्तीफा दें और जानकार बताते हैं कि तालिबान का ये नया डिमांड पाकिस्तान के इशारे पर है, क्योंकि अफगान सरकार लगातार पाकिस्तान पर स्थिति खराब करने के आरोप लगा रही है। अफगानिस्ता के उपराष्ट्रपकि भी पाकिस्तान पर काफी आक्रामक हैं।

तीन प्रांतों में भीषण लड़ाई जारी
दूसरी तरफ अफगानिस्तान के सैनिकों ने अब तालिबान पर हवाई हमला काफी तेज कर दिया है और टोलो न्यूज के मुताबिक तीन प्रांतों में अफगान सेना और तालिबान के बीच काफी खतरनाक लड़ाई हो रही है। कुंदुज में तालिबान को रोकने की कोशिश लगातार अफगान सेना कर रही है। लेकिन, बताया जा रहा है कि कि तालिबान ने चौक-ए-कुंदुज पर कब्जा कर लिया है। वहीं, उस इलाके से दर्जनों परिवार अपनी जान बचाने के लिए घरों को खाली कर निकल गये हैं। अफगान कमांडो का नेतृत्व करने वाले एक कमांडर ताज मोहम्मद ने टोलो न्यूज से कहा कि, "दुश्मनों ने पिछले 24 घंटों में कुंदुज शहर में हमले काफी तेज कर दिए हैं, जिसमें उन्हें भारी नुकसान हुआ है।" हालांकि, उन्होंने कुंदुज के निवासियों को आश्वासन दिया कि सुरक्षा बल शहर की रक्षा करेंगे। ऐसे में सवाल ये है कि क्या अब तालिबान काबुल पर कब्जा करने वाला है और दूसरा सवाल ये है कि 31 अगस्त तक अफगानिस्तान से बोरिया बिस्तर बांधने को बेकरार अमेरिका क्या अफगान सरकार को बचा पाएगा?












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