अमेरिका ने कहा- क्षेत्रीय और वैश्विक ताकत के तौर पर भारत का स्वागत है, दिल्ली के लिए रवाना पोंपेयो
वॉशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपेयो 2+2 वार्ता में हिस्सा लेने के लिए भारत रवाना हो चुके हैं। पोंपेयो ने भारत आने से पहले ट्वीट किया है और अमेरिकी विदेश विभाग की तरफ से भी भारत को लेकर एक बड़ा बयान दिया गया है। विदेश विभाग की तरफ से कहा गया है कि अमेरिका, एक क्षेत्रीय और वैश्विक ताकत के तौर पर उभरते हुए भारत का स्वागत करता है। यह तीसरी 2+2 वार्ता है जो 27 अक्टूबर से आयोजित होगी।

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विदेश मंत्री पोंपेयो भारत के लिए रवाना
भारत रवाना होने से पहले विदेश मंत्री माइक पोंपेयो ने ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, 'भारत, श्रीलंका, मालदीव और इंडोनेशिया की मेरी यात्रा आज से शुरू हो रही है। मैं इस अवसर के लिए शुक्रिया अदा करता हूं जिसकी बाद हम अपने साथियों के साथ उस साझा नजरिए को मजबूत कर सकेंगे जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र को एक आजाद, मजबूत और समृद्धशाली बनाने से जुड़ा है।' दूसरी तरफ पोंपेयो के ऑफिस, अमेरिकी विदेश विभाग की तरफ से भी एक बयान जारी किया गया है। इस बयान में कहा गया है, 'अमेरिका, भारत के क्षेत्रीय और वैश्विक ताकत के तौर पर उभरने का स्वागत करता है। अब अमेरिका, भारत के सुरक्षा परिषद में शुरू होने वाले कार्यकाल के दौरान साथ में मिलकर काम करने और करीबी सहयोग को मजबूत करने की दिशा की तरफ देख रहा है।' संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत का कार्यकाल एक जनवरी 2021 से आरंभ हो रहा है।
भारत, दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपेयो अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर और अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर अपने भारतीय समकक्ष राजनाथ सिंह के साथ मीटिंग करेंगे। दोनों अमेरिकी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोवाल से भी मीटिंग करेंगे। विदेश विभाग की तरफ से कहा गया है कि दोनों देशों के बीच एक मजबूत द्विपक्षीय साझेदारी है जिसे कई आदर्शों के साथ ही ही एक आजाद हिंद-प्रशांत पर आधारित है। विदेश विभाग ने इसके साथ ही अमेरिका और भारत को दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र करार दिया है। विदेश विभाग ने हाल ही में जापान के टोक्यो में हुई क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठ का जिक्र भी किया है। विभाग की तरफ से कहा गया है कि विदेश मंत्री माइक पोंपेयो ने भारत, जापान और अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्षों से मुलाकात की थी। इस दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लोकतंत्रों की तरफ से एक मजबूत आपसी संबंधों की विचारधारा का प्रदर्शन किया गया था।












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