Donald Trump New Tariff Plan: चीन पर निर्भरता कम करने की तैयारी! अमेरिका लगाएगा सेमीकंडक्टर और दवाओं पर टैक्स
Donald Trump Tariff Plans: अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर से चर्चा में है। इस बार मामला स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर लगने वाले नए टैरिफ से जुड़ा है। अमेरिका के वाणिज्य सचिव (Commerce Secretary) हॉवर्ड लुटनिक ने संकेत दिए हैं कि इन उत्पादों पर जल्द ही विशेष प्रकार का टैक्स (टैरिफ) लगाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह कदम सिर्फ आयात को रोकने के लिए नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा फैसला है।
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में इन प्रोडक्ट्स को भारी टैरिफ से अस्थायी छूट दी थी, जिससे Apple जैसी बड़ी टेक कंपनियों को राहत मिली थी। लेकिन अब सरकार इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को "सेमीकंडक्टर टैरिफ" के तहत लाने जा रही है। यह नीति अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिशों का हिस्सा है।

'ये राहत स्थायी नहीं है'
लुटनिक ने साफ किया कि ये राहत सिर्फ कुछ समय के लिए है। आने वाले समय में इन सभी उत्पादों को "सेमीकंडक्टर टैरिफ" के तहत शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि सेमीकंडक्टर, चिप्स, फ्लैट पैनल्स और अन्य जरूरी तकनीकी उपकरण अमेरिका में ही बनाए जाएं। हम इन चीजों के लिए चीन या साउथईस्ट एशिया पर निर्भर नहीं रह सकते।"
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दवाओं पर भी लगेगा टैरिफ
लुटनिक ने यह भी कहा कि आने वाले एक-दो महीनों में दवाओं (फार्मास्यूटिकल्स) पर भी टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रशासन एक ऐसा टैरिफ मॉडल लागू करना चाहता है, जिससे सेमीकंडक्टर और दवा उद्योग अमेरिका में दोबारा स्थापित हो सके।
'यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला'
कॉमर्स सेक्रेट्री ने यह भी कहा कि यह सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है। "ये छूट स्थायी नहीं है और इन्हें किसी समझौते के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता। ये ऐसे उत्पाद हैं जिन्हें अमेरिका में ही बनाना जरूरी है।"
चीन पर 145% का भारी टैक्स
2 अप्रैल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार में असंतुलन का हवाला देते हुए कई देशों पर भारी टैरिफ की घोषणा की थी। हालांकि, 9 अप्रैल को उन्होंने चीन को छोड़कर बाकी ज्यादातर देशों के लिए इन टैरिफ को 90 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया। ट्रंप प्रशासन ने चीन से आने वाले सामान पर 145% का भारी टैरिफ लगाया है, जबकि बाकी देशों के लिए 10% का बेसलाइन ड्यूटी लागू की गई है।
ग्लोबल बाजारों में हड़कंप
टैरिफ की इस नीति के कारण ग्लोबल शेयर मार्केट में चार दिनों तक गिरावट देखी गई और व्यापार में उथल-पुथल मच गई। इससे दुनिया भर में मंदी की आशंका भी जताई जा रही है।
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