US Death Penalty: मौत की सजा पर निर्दयी हुए ट्रंप! इलेक्ट्रिक चेयर-फायरिंग स्क्वॉड की वापसी, प्रोसेस भी तेज
US Death Penalty: अमेरिका के Department Of Justice ने गंभीर अपराधों के लिए सजा-ए-मौत (Death Penalty) के तरीकों में बड़ा बदलाव करते हुए फायरिंग स्क्वॉड, इलेक्ट्रोक्यूशन और गैस एस्फिक्सिएशन जैसे पुराने तरीकों को फिर से अपनाने का ऐलान किया है। डिपार्टमेंट ने यह भी कहा कि मृत्युदंड के मामलों को तेजी से निपटाने के लिए आंतरिक प्रक्रियाओं को आसान और तेज बनाया जाएगा। इसके साथ ही, यह पहले ट्रंप प्रशासन के घातक इंजेक्शन प्रोटोकॉल को फिर से लागू कर रहा है, जिसमें अब मृत्युदंड देने के दूसरे तरीके भी शामिल होंगे।
ट्रंप की वापसी के बाद सख्त रुख
पिछले जनवरी में दोबारा सत्ता में लौटने के बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्याय विभाग को साफ निर्देश दिए थे कि हिंसक बलात्कारियों, हत्यारों और खतरनाक अपराधियों से अमेरिकियों की सुरक्षा के लिए सजा-ए-मौत का कड़ाई से पालन किया जाए। नई नीति के मुताबिक, किसी भी कैदी को तब तक फांसी नहीं दी जाएगी जब तक उसकी सभी कानूनी अपीलें पूरी तरह खत्म नहीं हो जातीं। यानी प्रक्रिया तेज जरूर होगी, लेकिन कानूनी स्टेप्स पूरे होने के बाद ही अंतिम सजा दी जाएगी।

फायरिंग स्क्वॉड को पहली बार मिली स्पष्ट मंजूरी
एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप सरकार ने पहली बार साफ तौर पर फायरिंग स्क्वॉड (गोली मारकर मौत की सजा देना) को मंजूरी दी है। हालांकि 2020 के एक नियम में पहले ही यह कहा गया था कि जिस राज्य में जो तरीका वैध है, वहां वही तरीका अपनाया जा सकता है। यह नया फैसला सीधे तौर पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के उस रुख को बदलता है, जिसमें उनके प्रशासन ने अपने स्तर पर मौत की सजा देने पर रोक लगा दी थी।
बाइडेन ने बदली थी 37 कैदियों की सजा
दिसंबर 2024 में जो बाइडेन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मौत की सजा के ऐलान के बावजूद 37 कैदियों की सजा को बदलकर बिना पैरोल के आजीवन कारावास में बदल दिया था। इस फैसले के बाद केवल 3 कैदी ही ऐसे बचे थे, जिन्हें मृत्युदंड का सामना करना था। इससे साफ था कि बाइडेन प्रशासन मौत की सजा को कम करने के पक्ष में था।
अमेरिका में मौत की सजा पर बंटा हुई राय
अमेरिका में मौत की सजा को लेकर लोगों की राय एक जैसी नहीं है। गैलप की 2025 के अंत की रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 52% लोग ही मौत की सजा के पक्ष में हैं। यह आंकड़ा 1994 के 80% के मुकाबले काफी कम है। यानी समय के साथ लोगों का समर्थन घटा है और अब यह मुद्दा ज्यादा विवादित बन चुका है।
सजा-ए-मौत की निष्पक्षता पर सवाल
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अब रिकॉर्ड स्तर पर कम लोग मानते हैं कि सजा-ए-मौत निष्पक्ष तरीके से लागू होता है। यानी लोगों को सिस्टम पर भरोसा कम हो रहा है। यही वजह है कि इस सजा को लेकर लगातार बहस तेज होती जा रही है।
दुनिया में क्या है स्थिति?
अगर ग्लोबल लेवल पर देखें तो अमेरिका इस समय पूरे अमेरिकी महाद्वीप में एकमात्र ऐसा देश है, जो सक्रिय रूप से मौत की सजा को लागू करता है। दुनिया के दो-तिहाई से ज्यादा देशों ने या तो इसे कानून से हटा दिया है या व्यवहार में लागू करना बंद कर दिया है। इससे अमेरिका का रुख बाकी दुनिया से काफी अलग दिखाई देता है।
रूस का मामला भी दिलचस्प
रूस में कानूनी तौर पर सजा-ए-मौत अभी भी मौजूद है, लेकिन 1996 से इस पर रोक लगी हुई है। हाल ही में हुए एक सर्वे में लगभग आधे लोग इसे फिर से लागू करने के पक्ष में दिखे। हालांकि वहां के सांसदों का कहना है कि संवैधानिक न्यायालय के फैसले को पलटना आसान नहीं है, इसलिए इसे दोबारा लागू करना लगभग असंभव है।
क्या कहता है पूरा मामला?
कुल मिलाकर, अमेरिका में सजा-ए-मौत को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ सरकार इसे सख्ती से लागू करने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ जनता का समर्थन धीरे-धीरे कम हो रहा है। ऐसे में यह मुद्दा सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि नैतिकता, राजनीति और समाज के बीच चल रही बहस का भी हिस्सा बन गया है।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।












Click it and Unblock the Notifications