US China Trade Deal: ट्रंप का यू-टर्न! चीन से ट्रेड वार पर लगी ‘ब्रेक’ क्या टल जाएगा 100% टैरिफ का खतरा?
US China Trade Deal: अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों ने कई विवादास्पद मुद्दों पर सहमति बना ली है। यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात इस सप्ताह के अंत में होने वाली है।
इस डील के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक नई शुरुआत की संभावना बन रही है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ट्रंप द्वारा चीन से आयातित वस्तुओं पर लगाए जाने वाले "100% टैरिफ" का खतरा अब खत्म हो गया है।

वहीं, चीनी अधिकारियों ने ब्लूमबर्ग को बताया कि दोनों पक्षों के बीच एक प्रारंभिक सहमति बन चुकी है जिसमें एक्सपोर्ट कंट्रोल्स, फेंटानिल (एक शक्तिशाली ड्रग), और शिपिंग चार्जेज जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।
हाल के तनाव से अलग सकारात्मक संकेत
बीते कुछ हफ्तों से अमेरिका और चीन के बीच माहौल बेहद तनावपूर्ण था। चीन ने दुर्लभ धातुओं (Rare Earth Materials) के निर्यात पर नए प्रतिबंध लगाए थे, जिसके जवाब में ट्रंप प्रशासन ने 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इससे वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई थी कि दोनों देश फिर से पूर्ण व्यापार युद्ध (Trade War) की ओर बढ़ सकते हैं।
लेकिन अब दोनों पक्षों के लहजे में नरमी दिख रही है। एक चीनी अधिकारी के मुताबिक, "यह समझौता केवल तत्काल तनाव कम करने का नहीं बल्कि आने वाले महीनों में स्थिरता की दिशा में एक मजबूत कदम है।"
"100% टैरिफ अब टेबल से बाहर"
सीबीएस न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा, "हमारी दो दिन की बैठक बहुत सकारात्मक रही। ट्रंप का जो अतिरिक्त 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, वह अब टेबल से बाहर है। इसी तरह चीन द्वारा तत्काल निर्यात नियंत्रण लगाने की धमकी भी अब खत्म हो गई है।"
बेसेंट ने बताया कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच होने वाला समझौता मौजूदा टैरिफ ट्रूस (Tariff Truce) को आगे बढ़ाएगा। इसके अलावा, टिकटॉक की बिक्री पर चल रहे विवाद को भी सुलझाने की दिशा में प्रगति हुई है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि रेयर अर्थ मैग्नेट्स (Rare Earth Magnets) की सप्लाई बाधित न हो - जो इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों के लिए बेहद जरूरी हैं।
चीन करेगा अमेरिकी सोयाबीन की "बड़ी खरीद"
बेसेंट ने इंटरव्यू में यह भी बताया कि चीन ने अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत के बाद अमेरिकी सोयाबीन की "महत्वपूर्ण" खरीद करने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा, हमारे चीनी समकक्षों के साथ बातचीत के बाद यह तय हुआ है कि बीजिंग बड़ी मात्रा में अमेरिकी सोयाबीन खरीदेगा। यह अमेरिकी किसानों के लिए बड़ी राहत होगी।
दरअसल, चीन अमेरिकी किसानों के लिए सबसे बड़ा बाजार रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक तनाव और टैरिफ विवादों की वजह से चीन ने अमेरिकी सोयाबीन की खरीद में भारी कटौती की थी। इस वजह से अमेरिकी किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया था। अब यदि बीजिंग अपने वादे पर अमल करता है तो यह अमेरिकी कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक मोड़ साबित हो सकता है।
ट्रंप और शी जिनपिंग की ऐतिहासिक मुलाकात की तैयारी
यह समझौता उस समय हुआ है जब डोनाल्ड ट्रंप, व्हाइट हाउस में वापसी के बाद पहली बार अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग से आमने-सामने मिलने जा रहे हैं। इस मुलाकात को लेकर वैश्विक स्तर पर उम्मीदें और चिंताएं दोनों हैं - क्योंकि इस बैठक से यह तय होगा कि अमेरिका-चीन संबंध आने वाले वर्षों में किस दिशा में बढ़ेंगे।
विश्लेषकों के अनुसार, अगर यह ट्रंप-शी बैठक सफल रहती है, तो इससे वैश्विक व्यापार बाजार में स्थिरता लौट सकती है और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। वहीं, असफलता की स्थिति में बाजारों में फिर से उथल-पुथल देखी जा सकती है।
अभी तक जो संकेत मिल रहे हैं, वे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि अमेरिका और चीन दोनों ही अब टकराव की बजाय सहयोग की राह पर लौटना चाहते हैं। ट्रंप प्रशासन का टैरिफ हटाने का कदम और चीन का सोयाबीन खरीदने का वादा इस बात की गवाही देता है कि दोनों देश अपने हितों को सुरक्षित रखते हुए वैश्विक व्यापार व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने की कोशिश में हैं।












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