चांद तक यात्रा के लिए स्पेस सुपरहाइवे बनाएगी अमेरिकी सेना, जानिए चीन को पछाड़ने का क्या है प्लान?

अंतरिक्ष रेस में चीन को पीछा छोड़ने के लिए अमेरिका ने अंतरिक्ष में स्पेस सुपरहाइवे बनाने की घोषणा की है, जिससे चांद की यात्रा करना काफी आसान हो जाएगा।

वॉशिंगटन, अक्टूबर 25: अंतरिक्ष में बादशाहत कायम करने के लिए अमेरिका और चीन के वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं और इसी कड़ी में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी सेना ने एक ऐसे सुपरहाइवे बनाने का ऐलान किया है, जिससे चांद तक का सफर और आसान हो जाएगा। चांद तक की यात्रा को आसान बनाने के लिए अमेरिकी सेना ने 'स्पेस सुपरहाइवे' बनाने की बात कही है और वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि भविष्य में इस स्पेस सुपरहाइवे के जरिए इंसान चांद तक की यात्रा बेहद आसानी से कर सकेंगे। (सभी तस्वीर प्रतीकात्मक)

अंतरिक्ष में 'सुपरहाइवे' का निर्माण

अंतरिक्ष में 'सुपरहाइवे' का निर्माण

दावा किया गया है कि, जिस तरह से अभी एक आम आदमी परिवार के साथ कोई यात्रा प्लान करता है, आने वाले भविष्य में उसी तरह से चांद तक की यात्रा की जा सकती है। यूएस ट्रांसपोर्टेशन कमांड और यूएस स्पेस फोर्स भविष्य के अंतरिक्ष सुपरहाइवे सिस्टम को बनाने जा रही है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, वाणिज्यिक साझेदार और सहयोगी कई हब का इस्तेमाल करके चंद्रमा या उससे आगे की नियमित यात्राएं करने के काबिल हो जाएंगे। इस सुपर स्पेस हाइवे में वो ईंधन का निर्माण कर सकते हैं, अंतरिक्ष यान की मरम्मत कर सकते हैं और यहां तक कुड़-करकट भी फेंक सकते हैं।

चांद की आरामदायक यात्रा

चांद की आरामदायक यात्रा

अंतरिक्ष में सुपरहाइवे बनाने के पीछे अमेरिका का बड़ा उद्येश्य चीन की विस्तारवादी नीति से आगे निकलने की है। अमेरिका का मानना है कि, इससे पहले की चीन अंतरिक्ष में किसी विशालकाय प्रोजेक्ट बनाए, अमेरिका को अपना सुपरहाइवे तैयार कर लेना चाहिए। अंतरिक्ष अनुसंधान को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए स्पेस फोर्स ब्रिगेडियर जनरल जॉन ऑल्सन ने कहा कि, ''हम लगातार अलग अलग देशों की अंतरिक्ष नीतियों को देख रहे हैं और हमने चीन की नीतियों को भी देखा है और हमने तय किया है कि, हम अपने सहयोगियों की मदद से इस काम को जल्द पूरा करेंगे। हमने इस तरह के मानत तैयार किए हैं, हमने ऐसे सिद्धांत बनाए हैं, जिनके जरिए हम एक शासन चलाया जा सके''

चांद मिशन, चीन बनाम अमेरिका

चांद मिशन, चीन बनाम अमेरिका

आपको बता दें कि, चीन और अमेरिका के बीच मिशन चांद को लेकर रेस चल रही है और इस वक्त भी अमेरिका का चांद मिशन चीन से काफी आगे है, लेकिन चीन की रफ्तार अमेरिका से तेज है। लिहाजा अब अमेरिका अपनी गति को तेज करना चाहता है, ताकि वो चीन से काफी आगे निकल सके। अमेरिका इस वक्त एक बार फिर से इंसानों को चांद पर उतारने की तैयारी कर रहा है। वहीं, अमेरिका के स्पेस जनरल जॉन ने चीन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि, हम चांद पर उस स्थान का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, जिस स्थान पर अड्डा बनाया जा सके। आपको बता दें कि, 1967 में ऑउटरस्पेस संधि के तहक दुनिया का कोई भी देश अंतरिक्ष में या फिर चांद पर अपनी संप्रभुता का दावा नहीं कर सकता है, यानि, चंद्रमा को अपना हिस्सा नहीं बता सकता है, भले ही वो चांद पर सबसे पहले क्यों ना पहुंच जाए।

'सुरक्षा का हिस्सा है चंद्रमा'

'सुरक्षा का हिस्सा है चंद्रमा'

अमेरिकी स्पेस जनरल ने कहा कि, ''वे मानते हैं कि चंद्रमा इंसानों के अगले कदम की तकदीर है, दुनिया के अर्थशास्त्र का नया हिस्सा है और चंद्रमा अमेरिका के लिए सुरक्षा समीकरण का हिस्सा है। वहीं, पैनल पर बोलते हुए एक्सप्लोरेशन आर्किटेक्चर कॉरपोरेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम जिमेनेस ने कहा कि, अंतरिक्ष में सुपरहाइवे बनाने का मिशन जल्द आकार लेने वाला है। उन्होंने कहा कि, "इस दशक के भीतर या फिर अगले दशक के मध्य तक हम चंद्र के सतह की तरफ संचालन का काम शुरू कर देंगे।" पिछले साल अंतरिक्ष और पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचने पर ध्यान केंद्रित करने वाली छोटी अंतरिक्ष कंपनियों में 7.2 अरब डॉलर से अधिक का निवेश देखा गया था, जिसको लेकर सैम जिमेनेस ने कहा कि, "हम उस पैसे को कक्षीय डोमेन में ले जाते हुए देख रहे हैं, जहां वे डिपो बनाने देख रहे हैं"।

चंद्रमा के लिए चीन की तैयारी

चंद्रमा के लिए चीन की तैयारी

आपको बता दें कि, चीन भी काफी तेज रफ्तार से मिशन चंद्रमा चला रहा है और पृथ्वी की कक्षा में कई किलोमीटर बड़े आकार का एक विशालकाय मेगास्ट्रक्चर बनाने की तैयारी कर रहा है। जिसमें सोलर पावर प्लांट, टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स, गैस स्टेशन और ऐस्टरॉइड खनन की भी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इस बाबत चीन के नैचुरल साइंस फाउंडेशन ने अपने पंचवर्षीय प्लान की घोषणा भी की थी, जिसमें कहा गया था कि, वैज्ञानिकों को इस तरह की टेक्नोलॉजी और टेक्निक विकसित करने का निर्देश दिया जा चुका है और शोधकर्ता काफी तेजी से काम कर रहे हैं। जिसे देखते हुए अमेरिका ने भी तेजी के साथ एक ऐसे सुपरहाइवे के निर्माण की बात करनी शुरू कर दी है, जिसके जरिए अंतरिक्ष से चांद तक आसानी से पहुंचा जा सके।

चंद्रमा पर बस्ती बसाने का मिशन

चंद्रमा पर बस्ती बसाने का मिशन

हाल ही में चीन ने चंद्रमा के लिए कई मिशन का ऐलान किया था, जिसके बाद अब अमेरिका ने हथियार निर्माता कंपनी नॉर्थरोप ग्रुमैन कॉर्प (Northrop Grumman Corp) से हाथ मिलाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नॉर्थरोप ग्रुमैन कॉर्प ने नासा का एक कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर लिया है, जो 935 मिलियन डॉलर का है। इसके तहत चंद्रमा के आर्बिट में रहने योग्य क्वार्टर बनाए जाएंगे। इसकी आधिकारिक घोषणा इसी साल जुलाई में कर दी गई थी। कंपनी के मुताबिक अंतरिक्ष यात्री इन्हीं क्वार्टर में रहेंगे। साथ ही हैबिटेशन एंड लॉजिस्टिक्स आउटपोस्ट में अनुसंधान करेंगे।

चीन और रूस का संयुक्त मिशन

चीन और रूस का संयुक्त मिशन

इसके साथ ही रूस और चीन ने चंद्रमा मिशन के लिए भी हाथ मिलाया है। जिसके तहत वो एक ज्वाइंट इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन (ILRS) बनाएंगे। ये एक तरह की प्रयोगशाला होगी, जो चंद्रमा पर काम करेगी। दोनों देश अब चंद्रमा की सतह पर दीर्घकालिक, स्वायत्त और व्यापक वैज्ञानिक प्रयोग आधार के लिए अन्य सहयोगी देशों की तलाश कर रहे हैं। इससे जुड़े एक समझौते पर मार्च में दोनों देशों ने हस्ताक्षर भी किया था। जिसमें चंद्रमा और उसकी कक्षा दोनों में रिसर्च सेंटर का निर्माण शामिल है।

क्या है रोडमैप?

क्या है रोडमैप?

रोडमैप के मुताबिक जब तक दोनों देश अपने क्रू को पूरी तरह से ट्रेन्ड नहीं कर देते, तब तक स्टेशन ऑटोमैटिक तरीके से संचालित होगा। इसके अलावा प्रारंभिक खोज मिशन इस साल के अंत तक शुरू होने की संभावना है, जबकि चंद्रमा पर बेस के निर्माण का काम 2025 में शुरू हो सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि पूरा काम 2035 तक पूरा हो जाएगा। वैसे अमेरिका, भारत जैसे देश भी चंद्रमा को लेकर कई मिशन को अंजाम देने में जुटे हैं। मामले में चीनी अंतरिक्ष एजेंसी के डिप्टी हेड वू यान्हुआ ने कहा उन्होंने रूस के साथ मिलकर ILRS प्रोग्राम शुरू किया है, जो भी अंतरराष्ट्रीय भागीदार इसमें हिस्सा लेना चाहते हैं, उनका स्वागत है। इस प्रोग्राम का पहला फेस इस साल के अंत तक शुरू हो जाएगा। इसके बाद 2026 से 2035 के बीच दूसरा फेस चलेगा। फिर 2036 से तीसरे फेस की शुरुआत होगी।

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