अफगानिस्तान में अमेरिका ने लॉन्च किया खतरनाक ऑपरेशन, क्या अब काबू में आएगा तालिबान ?
अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश के बाद वायुसेना ने तालिबान के खिलाफ विध्वंसक ऑपरेशन लॉन्च कर दिया है।
काबुल, अगस्त 08: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अफगानिस्तान में तीन प्रमुख शहरों की ओर बढ़ रहे तालिबान आतंकवादियों को निशाना बनाने के लिए बी-52 बमवर्षक और स्पेक्टर गनशिप को एयरस्ट्राइक का आदेश दे दिया है। अमेरिका का ये काफी खतरनाक बमवर्षक विमान माना जाता है और 1950 से ही अमेरिकन आर्मी की सेवा कर रहा है। इसकी सबसे खास बात ये है कि ये हथियारों के साथ एक साथ 8 हजार मील की यात्रा कर सकता है और दुश्मनों पर बमबारी कर वापस लौट सकता है। लेकिन सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या अब अमेरिकी सेना अफगानिस्तान में तालिबान को रोक पाएगी?

बाइडेन ने दिया हमले का आदेश
अफगानिस्तान में लगातार बेगुनाहों का कत्लेआम करने वाले तालिबान के खिलाफ जो बाइडेन ने अमेरिकी वायुसेना को खुला आदेश दे दिया है कि वो तालिबान पर भीषण हमलों को अंजाम दे। अब अमेरिकी वायुसेना अफगानिस्तान में तीन शहरों की तरफ बढ़ रहे तालिबान को रोकने के लिए आसमान से बम बरसाएगी और स्पेक्टर गनशिप से हमला करेगी। वहीं, जो बाइडेन के आदेश के बाद अब अमेरिकी वायुसेना के तमाम विध्वंसक विमान लगातार अफगानिस्तान के अलग अलग इलाकों में उड़ान भर रहे हैं और माना जा रहा है कि अमेरिकी ऑपरेशन में तालिबान का भारी नुकसान होगा।
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विध्वंसक हथियार है बी-52 विमान
अमेरिका ने सोवियत संघ से शीत युद्ध के दौरान भी 1950 के दशक में इस विमान का इस्तेमाल किया था और उसके बाद से बी-52 विमान को कई बार अपग्रेड किया गया है। इस विमान का इस्तेमाल अमेरिकी सेना सीरिया, इराक, अफगानिस्तान और वियतनाम युद्ध में भी कर चुकी है और बी-52 बमवर्षक विमान दुश्मनों के लिए काल से कम नहीं है। इस विमान के जरिए एक बार में 70 हजार पाउंड पेलोड लेकर उड़ा जा सकता है और ये विमान करीब 13 हजार किलोमीटर तक लगातार उड़ान भरने में सक्षम है। सबसे खतरनाक बात ये है कि इस विमान के जरिए एक बार में एक पूरे शहर को पूरी तरह से बर्बाद किया जा सकता है।

काफी तेजी से आगे बढ़ता तालिबान
अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन सेना ने जैसे ही ही अफगानिस्तान से निकलने का ऐलान किया था, ठीक वैसे ही तालिबान ने अपने पैर अफगानिस्तान में पसारने शुरू कर दिए थे। वहीं, अमेरिका ने अफगान सैनिकों को खतरनाक हो चुके तालिबान से निपटने के लिए छोड़ दिया और अब स्थिति ये है कि अफगानिस्तान के 400 जिलों में से 218 जिलों पर तालिबान का वियंत्रण स्थापित हो चुका है और अफगान सेना, तालिबानी आतंकियों से लड़ाई करने में कमजोर पड़ रही है। वहीं, तालिबान ने दो राज्यों की राजधानियों पर कब्जा कर लिया है। इससे पहले तालिबान ने जोजजान में शेबर्गन शहर पर कब्जा कर लिया है, जिसकी पुष्टि अफगान सरकार कर चुकी है। वहीं, प्रांतीय राजधानी पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने जेलों में बंद तमाम अपराधियों को आजाद कर दिया है।

अमेरिका ने शुरू किया ऑपरेशन
अमेरिकी रक्षा सूत्रों ने द टाइम्स को बताया कि बी-52 और एसी-130 विमानों के जरिए कंधार, हेरात, हेलमंद प्रांत और लश्कर गार के आसपास तालिबानी आतंकियों को निशाना बना रहे हैं। B-52s कतर से बाहर काम कर रहे हैं, जबकि विमानवाहक पोत यूएसएस रोनाल्ड रीगन अरब सागर में तैनाती पर है। परमाणु शक्ति से चलने वाले इस युद्धपोत में F/A-18 सुपर हॉर्नेट का बेड़ा है। अफगान वायु सेना कुछ टर्बो-प्रोप लाइट अटैक एयरक्राफ्ट जैसे ए-29 सुपर ट्यूकानो से लैस है।

क्या अब काबू में होगा तालिबान ?
तालिबान ने शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिमी निमरोज प्रांतीय राजधानी जरांज पर कब्जा कर लिया, जहां सरकार का कहना है कि वह अभी भी राजधानी के अंदर विद्रोहियों से जूझ रही है। शेबर्गन विशेष रूप से रणनीतिक है, क्योंकि यह अमेरिकी सहयोगी उज़्बेक सरदार राशिद दोस्तम का गढ़ है, जिनकी मिलिशिया अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा बलों की सहायता कर रही है। हालांकि, तालिबानी हमले में मिलिशिया को काफी नुकसान पहुंचा है। और इन इलाकों से तालिबान को खदेड़ने के लिए ही अमेरिका ऑपरेशंस चला रही है। लेकिन, सवाल उट रहे हैं कि क्या अब अमेरिकी सैनिक तालिबान को खदेड़ पाएंगे या फिर तालिबान अब इस स्थिति में चुका है कि वो अफगानिस्तान पर जल्द कब्जा कर ले।












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