AI से जुड़े खतरों को लेकर UNSC में पहली बार बैठक, चीन ने कहा- काबू करना जरूरी, US ने कही ये बात
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कि AI का जितनी तेजी से विकास हो रहा है, उसके संभावित खतरे भी नजर आने लगे हैं। इसे लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मंगलवार को पहली बार AI को लेकर बैठक की। ये बैठक इस महीने सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष ब्रिटेन ने बुलाई थी।
इस बैठक में चीन ने टेक्नोलॉजी के अनियंत्रित होने को लेकर चेतावनी दी। ड्रैगन ने इसकी तुलना 'रनवे हॉर्स' से की। वहीं, अमेरिका ने लोगों को सेंसर करने या दबाने के लिए इसके उपयोग के खिलाफ चेतावनी दी।

इस बैठक की अध्यक्षता करने वाले ब्रिटेन के विदेश सचिव जेम्स क्लेवरली ने कहा कि AI मानव जीवन के हर पहलू को मौलिक रूप से बदल देगा। उन्होंने कहा कि AI कोई सीमा नहीं जानता है। इसलिए इस पर नियंत्रित आकार देनी की जरूरत है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि AI की मदद से जलवायु परिवर्तन और अर्थव्यवस्था के सुधार में काफी मदद मिल सकती है।
बैठक में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी तेजी से अपने संभावित जोखिमों और लाभों को प्रकट करती है। गुटेरेस ने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र को 2026 तक युद्ध के स्वचालित हथियारों में AI के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता करना चाहिए।
चीनी ने कहा कि AI को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून और मानदंड लचीले होने चाहिए ताकि सभी देशों को अपने स्वयं के राष्ट्रीय स्तर के नियम स्थापित करने की आजादी मिल सके। चीन ने AI में प्रभुत्व हासिल करने की कोशिश के लिए बिना नाम लिए "विकसित देशों" की भी आलोचना की।
चीन ने कहा कि कुछ विकसित देश तकनीकी आधिपत्य पाने के लिए अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं और दुर्भावनापूर्ण तरीके से दूसरे देशों के तकनीकी विकास में बाधक बन रहे हैं। चीन का प्रतिनिधित्व करने वाले संयुक्त राष्ट्र में राजदूत झांग जून ने AI को "दोधारी तलवार" बताया।
झांग ने कहा, "चाहे वह अच्छा हो या बुरा, अच्छा या बुरा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि मानव जाति इसका उपयोग कैसे करती है, इसे कैसे नियंत्रित करती है और हम सुरक्षा के साथ वैज्ञानिक विकास को कैसे संतुलित करते हैं।"
बैठक में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने वाले संयुक्त राष्ट्र में उप अमेरिकी राजदूत, जेफरी डेलाउरेंटिस ने कहा कि शांति और सुरक्षा को कमजोर करने वाले मानवाधिकार जोखिमों से निपटने के लिए देशों को AI और अन्य उभरती टेक्नोलॉजी पर एक साथ काम करने की आवश्यकता है।
हालांकि जेफरी डेलाउरेंटिस ने अपरोक्ष रूप से जातीय अल्पसंख्यकों पर निगरानी रखने के लिए चीन द्वारा प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर कहा कि किसी भी सदस्य देश को लोगों को नियंत्रण करने, प्रतिबंधित करने, दबाने या कमजोर करने के लिए AI का उपयोग नहीं करना चाहिए।
वहीं, रूस ने इस बैठक को लेकर ही सवाल खड़ा कर दिया। रूस ने सवाल किया कि क्या वो परिषद, जिस पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी है, को AI पर चर्चा करनी चाहिए। रूस के उप संयुक्त राष्ट्र राजदूत दिमित्री पॉलींस्की ने कहा कि इसके लिए एक पेशेवर, वैज्ञानिक, विशेषज्ञता-आधारित चर्चा आवश्यक है जिसमें कई साल लग सकते हैं और यह चर्चा पहले से ही विशेष प्लेटफार्मों पर चल रही है।












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