अफगानिस्तान में 'मानवाधिकार' सुरक्षित नहीं ! रिपोर्ट में खुलासा, हत्या और मनमानी कर रहा तालिबान
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन ने गुरुवार को एक रिपोर्ट जारी की जिसमें तालिबान के अधिग्रहण के बाद से 10 महीनों में अफगानिस्तान में व्याप्त मानवाधिकारों की स्थिति को रेखांकित किया गया है। स्थिति दयनीय बताई गई है।
काबुल, 21 जुलाई : अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNAMA) ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें अफगानिस्तान में तालिबान शासन के 10 महीनों का लेखा-जोखा पेश किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि, देश में तालिबान शासन आने के बाद से देश की स्थिति क्या रही और वहां के हालात एकाएक एकदम खराब कैसे हो गए। खासकर रिपोर्ट में अफगानिस्तान में मानवाधिकार को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई है।

तालिबान कर रहा मनमानी
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) की रिपोर्ट में अफगान नागरिकों की सुरक्षा, न्यायेतर हत्याओं, यातना और दुर्व्यवहार, मनमानी गिरफ्तारी और नजरबंदी, अफगान महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के निष्कर्षों का विवरण देती है।

महिलाओं के अधिकारों को कुचला गया
काबुल में तालिबान शासन आने के बाद से वहां,महिलाओं के अधिकारों के पूरी तरह से कुचल दिया गया है। बेकसुर बेमौत मारे जा रहे हैं। अफगान नागरिकों को आतंकियों का साथी बताकर उनके साथ बुरा सलूक किया जाता है। एक रिपोर्ट में ते वहां सौ से अधिक लोगों की लाशें बरामद होने की बात कही गई थी। कई लोगों को तालिबान के सैनिकों ने गायब कर दिया है, जिनका अभी तक कोई अता-पता भी नहीं है।

यूएन की चौंकाने वाली रिपोर्ट
अफगानिस्तान से संबंधित यूएन की रिपोर्ट में 15 अगस्त 2021 से 15 जून 2022 की अवधि तक की स्थिति का जिक्र किया गया है। यह रिपोर्ट दुनिया के लिए चौंकाने वाला विषय है। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता संभालने के बाद से अब तक 2106 नागरिकों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ा है। जानकारी के मुताबिक, कुल 2106 लोगों में से 700 लोग मारे जा चुके हैं औक 1406 अब तक घायल हुए हैं। नागरिकों के साथ ये अत्याचार घातक हथियारों से किया गया है जिनमें आईईडी भी शामिल है। वहीं, गैर-न्यायिक हत्याएं, 178 नागरिकों को बिना किसी वजह की गिरफ्तारियां हुई हैं। रिपोर्ट में अन्य अत्याचार और दुर्व्यवहार के 56 मामले अब तक सामने आए हैं।

हत्या और मनमानी कर रहा तालिबान
रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान शासन में आईएस जैसे आतंकियों के साथ साठगांठ के आरोप में 59 लोगों की हत्या, 22 बिन वजह मनमानी गिरफ्तारियां हुई है। वहीं हिरासत में रखे गए 7 लोगों को यातनाएं दी गईं और उनके साथ बुरा सलूक किया गया। वहीं, 18 लोगों की गैर- न्यायिक हत्या कर दी गई। वहीं, बिना वजह 23 लोगों को अनौपचारिक तौर पर हिरासत में रखा गया।

पत्रकार, मीडिया कर्मी भी सरक्षित नहीं
रिपोर्ट में बताया गया है कि, तालिबान शासन में अफगानिस्तान में 173 पत्रकारों, मीडिया कर्मी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इस अवधि के दौरान छह पत्रकारों मारे जा चुके हैं। अन्य पत्रकारों, मीडिया कर्मियों के साथ बुरा बर्ताव, मनमानी गिरफ्तारी हुईं। UNAMA के अनुसार, चूंकि एक व्यक्ति को कई मामलों में प्रताड़ित किया जाता है, ऐसे में मानवाधिकार के उल्लंघनों की संख्या प्रभावित व्यक्तियों की संख्या से अधिक हो सकती है।

तालिबान राज में अफगानिस्तान का हाल बुरा है
अफगानिस्तान में तालिबान शासन (Taliban Govt. in Afghanistan) आने के बाद से देश की स्थिति चरमरा गई है। काबुल की धरती पर मानवाधिकार शब्द किताब के किसी पन्ने में दफन होकर रह गई है। ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW- Human Rights Watch)) के मुताबिक, एक जांच से पता चला है कि, वहां 100 से अधिक शवों को अफगानिस्तान के नंगरहार में स्थित एक नहर में फेंक दिया गया था। एचआरडब्ल्यू का आगे कहना है कि, तालिबान सुरक्षा बल लोगों के मानव अधिकारों का हनन करते हुए आम आदमी पर आतंकवादियों को आश्रय देने, उन्हें समर्थन करने का आरोप लगाकर जबरन गायब कर दे रहे हैं। जानकारी के मुताबिक फर्जी जांच के दौरान तालिबान के सैनिक लोगों का शोषण भी करते हैं।

महिलाएं असुरक्षित हैं तालिबान राज में
बता दें कि,अफगान संसद के एक पूर्व डिप्टी स्पीकर ने जिनेवा में मानवाधिकार परिषद (HRC) में महिला अधिकारों के मुद्दे पर हुई तत्काल बहस के दौरान कहा था कि, अफगानिस्तान में लड़कियां, महिलाएं आत्महत्या कर रही हैं। उनका सरेआम शोषण किया जा रहा है। यह दुनिया के लिए एक गंभीर विषय है। जानकारी के मुताबिक,हर रोज 1 या 2 महिलाएं अपनी जिंदगी से तंग आकर आत्महत्या (Afghan women commit suicide) कर रही हैं। एक पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं की ऐसी हालत निंदनीय है।












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