यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को Time मैगजीन ने चुना 'पर्सन ऑफ द ईयर', ईरान की महिलाएं बनीं हीरो ऑफ द इयर
पर्सन ऑफ द इयर बनने वालों की दौड़ में जो नाम आखिर तक पहुंचे, उनमें ईरान के हिजाब विरोधी आंदोलनकारी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, एलन मस्क और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट शामिल हैं।

Image: PTI
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और 'स्पिरिट ऑफ यूक्रेन' को टाइम मैगजीन ने 'पर्सन ऑफ द ईयर 2022' चुना है। अपने ताजा अंक में टाइम मैगजीन ने जेलेंस्की को कवर पेज पर स्थान दिया है। 24 फरवरी को शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध में जेलेंस्की अपनी देश के साथ मजबूती से खड़े दिखे हैं। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यूक्रेन की आवाज को बुलंदी से रखा है और देश पर युद्ध थोपने के लिए रूस के राष्ट्रपति पुतिन के कदम की कड़ी आलोचना की है। इसके साथ ही ईरान में हिजाब विरोधी आंदोलन कर रही महिलाओं को हीरो ऑफ द इयर घोषित किया गया है।
टाइम ने जेलेंस्की की प्रशंसा की
टाइम ने यूक्रेनी राष्ट्रपति की प्रशंसा करते हुए लिखा है कि जेलेंस्की ने अपनी सुरक्षा की परवाह न करते हुए खुद को पूरी तरह से युद्ध में झोंक रखा है। वे लगातार अपने सैनिकों के बीच उनका हौसला बढ़ाने के लिए जाते हैं। जेलेंस्की अपने देश में ट्रेन से सफर करते हैं और इस सफर के दौरान भी जंग की अपडेट पर नजर रखते हैं। टाइम मैगजीन ने अपनी रिपोर्ट में उनके खेरासन दौरे का जिक्र किया है। जिसे यूक्रेन के सैनिकों ने हाल ही में रूस से आजाद करवाया था।
स्पिरिट ऑफ यूक्रेन भी बनी 'पर्सन ऑफ इ ईयर'
टाइम मैगजीन के अनुसार जंग की शुरुआत के पहले हफ्ते में ही उन्होंने यूरोपियन पार्लियामेंट को संबोधित किया और भावुकता से भरा संबोधन किया। उन्होंने कहा, "साबित करिए कि आप हमें जाने नहीं दोगे. साबित करो कि तुम वास्तव में यूरोपीय हो, और तब जीवन मृत्यु पर विजय प्राप्त करेगा, और प्रकाश अंधकार पर विजय प्राप्त करेगा। टाइम ने लिखा है कि इतना ताकतवर नेता कई साल में पहली बार देखा गया है। मैगजीन ने जेलेंस्की के साथ स्पिरिट ऑफ यूक्रेन को भी इसी कैटेगरी में जगह दी है।
ईरान की महिलाएं हीरो ऑफ द इयर
पर्सन ऑफ द इयर बनने वालों की दौड़ में कई नाम रहे जिनमें ईरान के हिजाब विरोधी आंदोलनकारी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, एलन मस्क और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट आदि शामिल हैं। ईरान में हिजाब विरोधी आंदोलन कर रही महिलाओं को हीरो ऑफ द इयर घोषित किया गया। महसा अमिनी की मौत के बाद शुरू हुए आंदोलन में अब तक करीब 300 लोगों की मौत हो चुकी है।












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