रूस ने 108 दिनों बाद पलटी यूक्रेन की बाजी, दसों हजार सैनिकों को खोकर पुतिन मना पाएंगे जश्न?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 108 दिन पहले यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने के आदेश दिए थे, लेकिन युद्ध बीतने के साथ साथ रूसी सेना के लिए यूक्रेन पर अधिपत्य करना मुश्किल होने लगा...
मॉस्को/कीव, जून 12: फरवरी महीने में 24 तारीख को जब यूक्रेन के खिलाफ रूस ने 'सैन्य अभियान' शुरू किया था, तो सभी को यही लगा, कि ये लड़ाई महज हफ्ते भर में खत्म होने वाली है। लेकिन, एक महीने की लड़ाई के बाद रूस के सामने से जीत काफी दूर हो गई और राजधानी कीव पर कब्जा करने में नाकामयाब रही रूसी सेना राजधानी को छोड़कर वापस लौट गई। एक महीने की लड़ाई के बाद रूस ने अपने लक्ष्यों को चुनना शुरू किया और पूर्वी यूक्रेन को नये लक्ष्य के तौर पर चुना। लेकिन, अब जाकर यूक्रेन के पास हथियार खत्म होने लगे हैं और पश्चिमी देशों से यूक्रेन को मिल रही मदद ने गैस की कीमतों को काफी ज्यादा बढ़ा दिया है, वहीं अब सवाल अमेरिका में भी उठ रहे हैं, कि आखिर यूक्रेन को कितनी मदद दी जानी है?

यूक्रेन युद्ध के 108 दिन पूरे
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 108 दिन पहले यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने के आदेश दिए थे, लेकिन युद्ध बीतने के साथ साथ रूसी सेना के लिए यूक्रेन पर अधिपत्य करना मुश्किल होने लगा और फिर रूसी सेना ने यूक्रेन के पूर्वी हिस्से पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए अत्यंत भीषण खूनी संघर्ष शुरू कर दिया। जिसमें अब रूसी सैनिकों को कामयाबी मिलने लगी है। हालांकि, शनिवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने एक बार फिर जीत का वादा किया। उन्होंने कहा कि, 'हम निश्चित रूप से इस युद्ध में जीत हासिल करने जा रहे हैं'। उन्होंने एक वीडियो उपस्थिति में सिंगापुर में एक सम्मेलन में कहा कि, 'यूक्रेन में युद्घ के मैदान से भविष्य की दुनिया के नये नियमों का फैसला किया जा रहा है'।

यूक्रेन पर एकजुट होता गया यूरोप
यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद अंधाधुंध हमलों ने पश्चिमी देशों को एकजुट करना शुरू कर दिया। यूक्रेन पर बरसते बम के गोलों से पश्चिमी देश एकत्रित होने लगे और आक्रोश रूस पर प्रतिबंधों के तौर पर फूटा। लेकिन ये लड़ाई प्रतिबंधों से आगे बढ़ गई और अब दुनिया के कई हिस्सों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है। सोमिलिया समेत कई अफ्रीकी देशों में भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है, तो दुनिया के अन्य देशों के साथ साथ पश्चिमी देशों और अन्य देशों की सरकारों और अर्थव्यवस्थाओं पर बढ़ता दबाव परेशानी पैदा कर रहा है।

इस वक्त लड़ाई की क्या स्थिति है?
इस वक्त पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में लड़ाई लड़ी जा रही है और रूस का मकसद पूर्वी यूक्रेन को पूरी तरह से अलग कर देना है। रूस के भारी हथियार पूर्वी यूक्रेन में तबाही मचा रहे हैं, लेकिन पश्चिमी हथियारों के दम पर यूक्रेन ने भी रूस को भारी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन, यूक्रेन के शहरों से लेकर गांव तक तोप के गोले बिछे हुए हैं और यूक्रेन की धरती बारूद से झुलसी हुई है। हालांकि, पूर्वी यूक्रेन के करीब 80 प्रतिशत हिस्से पर रूस का कब्जा हो चुका है, लेकिन एक बार फिर से यूक्रेन ने पलटवार करना शुरू कर दिया है। यूक्रेनी सैनिको ने रूसी कब्जे में आए प्रमुख क्षेत्रीय शहर सिविएरोडोनेट्सक में फिर से घेरना शुरू कर दिया है और रिपोर्ट के मुताबिक, रूस को भारी नुकसान भी हुआ है। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने भी कबूल किया है, कि युद्घ में हर दिन 100 से ज्यादा सैनिकों की मौत हो रही है और उन्हें आगे की लड़ाई लड़ने के लिए और अधिक हथियारों और गोला-बारूद की सख्त जरूरत है।

यूक्रेनी शहरों पर रूस का नियंत्रण
रूस भी अपने कब्जे वाले शहरों में नियंत्रण स्थापित करने में आगे बढ़ रहा है, जिसमें मारियुपोल शहर भी है, जो ब्लैक सी के पास स्थित है। मारियुपोल पर कब्जा यूक्रेन की बाकी आबादी को समझाने और मजबूर करने के लिए है, कि उनका भविष्य पुतिन के अपने बहाल साम्राज्य के रूप में है। वहीं, खेरसॉन और मेलिटोपोल जैसे शहरों पर अब पूरी तरह से रूसी सैनिकों का नियंत्रण हैं। और इन शहरों में रहने वाले लोग अगर काम करना चाहते हैं, तो फिर उन्हें रूसी पासपोर्ट हासिल करना होगा। वहीं, इन क्षेत्र में रहने वाले लोगों को मास्को के प्रति वफादारी दिखानी होगी।

पुतिन का ‘पीटर द ग्रेट’ अवतार
रूस के पहले सम्राट पीटर द ग्रेट के साथ पुतिन की तुलना करने वाला प्रचार, मारियुपोल के लोगं को डराता है और और शहर के मेयर के सलाहकार पेट्रो एंड्रीशचेंको ने इसे "छद्म ऐतिहासिक" हमला कहा है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अपनी जो तुलना की है, वह रूसी राष्ट्रपति के दिल को काफी प्रिय है। उन्होंने बार-बार जोर देकर कहा है कि यूक्रेन एक वास्तविक राष्ट्र नहीं है और इसकी असली पहचान रूसी है। हालांकि, उनके आक्रमण ने पहले से अकल्पनीय तरीकों से यूक्रेनी राष्ट्रीय पहचान को मजबूत ही किया है। रूस की अपनी कठिनाइयां हैं, विशेष रूप से दक्षिणी यूक्रेन में, जहां खेरसॉन की प्रांतीय राजधानी को युद्ध में पहले ही कब्जा कर लिया गया था, वहां हाल के हफ्तों में यूक्रेन के पूर्व सैनिकों और नागरिकों के द्वारा रूसी सैनिकों पर हमलों में तेजी आई है। युद्ध में रूसी नुकसान अभी तक ज्ञात नहीं हैं, लेकिन निश्चित रूप से दसियों हज़ार रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं और इसका असर सीधे तौर पर ये हो रहा है, कि रूस पर निरंकुश पुतिन का शासन धीरे धीरे कमजोर होने लगा है।












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