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यूक्रेन के 20% हिस्से पर कब्जा, 50 हजार से ज्यादा की मौत, अर्थव्यवस्था ध्वस्त... रूसी हमले के 100 दिन पूरे

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 24 फरवरी को यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने का आदेश दिया था और ऐसा लगा, कि ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते में रूस पूरी तरह से यूक्रेन पर कब्जा कर लेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ...

कीव/मॉस्को, जून 03: यूक्रेन पर रूसी हमले के 100 दिन पूरे हो चुके हैं और तबाही के इन 100 दिनों में यूक्रेन पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है, लेकिन रूस अभी भी थमा नहीं है और ये लड़ाई अभी भी लगातार जारी है। पिछले 100 दिनों की लड़ाई में कई बार ऐसा लगा, कि शायद अब युद्ध थम सकता है, लेकिन महसूस यही हुआ, कि कुछ ताकतें असल में इस युद्ध को खत्म होने ही नहीं देना चाहती हैं, वहीं रूस ने काफी सैनिकों को गंवाने के बाद भी करीब 20 प्रतिशत यूक्रेनी हिस्से पर कब्जा कर लिया है।

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    100 Days of Ukraine War: युद्ध से क्या खोया क्या पाया?| Full Report| वनइंडिया हिंदी । #International
    यूक्रेन युद्ध के 100 दिन

    यूक्रेन युद्ध के 100 दिन

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 24 फरवरी को यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने का आदेश दिया था और ऐसा लगा, कि ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते में रूस पूरी तरह से यूक्रेन पर कब्जा कर लेगा, लेकिन यूक्रेन के प्रतिरोध ने रूस को रोक दिया और युद्ध के एक महीने के बाद जब रूस को लगने लगा, कि अब उसके लिए कीव पर कब्जा करना मुमकिन नहीं है, तो फिर रूस ने पूरी तरह से ध्यान पूर्वी यूक्रेन के डोनबास किया और अभी तक डोनबास के करीब 95 प्रतिशत हिस्से पर रूस का पूरी तरह से नियंत्रण हो चुका है, जिसमें मारियुपोल भी शामिल है। वहीं, सेवेरोदोनेत्स्क पर कब्जा करने के लिए रूस और यूक्नेनी सेना के बीच भयंकर संघर्ष हो रहा है। रूस अभी भी इस क्षेत्र में बमबारी और मिसाइल हमले कर रहा है।

    तबाह हो चुका है यूक्रेन

    तबाह हो चुका है यूक्रेन

    यूक्रेन की सरकार ने आखिरकार कबूल कर लिया है, कि रूस ने यूक्रेन के 20 प्रतिशत क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले लिया है और व्लादिमीर पुतिन की सेना पूर्वी डोनबास क्षेत्र को हथियाने के लिए भीषण जंग लड़ रही है। 24 फरवरी को आक्रमण के पहले दिन रूस के एक लाख से ज्यादा सैनिक यूक्रेन की सीमा के भीतर दाखिल हुए थे और विश्लेषकों ने गंभीर भविष्यवाणियां कीं थी, कि मॉस्को की सेना कुछ ही दिनों में जीत हासिल कर लेंगी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। इसके बजाय, यूक्रेन की सेना ने रूस के 'विशेष सैन्य अभियान' के खिलाफ 100 दिनों में अभी भयंकर रक्षा की है। राजधानी कीव के चारों ओर से रूसी सेना को खदेड़ने के बाद पुतिन के सैनिकों को देश के पूर्वी हिस्से पर कब्जा करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकने लिए मजबूर कर दिया। हालांकि, अंधाधुंध रूसी गोलाबारी में हजारों नागरिक मारे गए हैं और लाखों लोगों को अपने घरों से भागने के लिए मजबूर किया गया है और पुतिन के सैनिकों द्वारा किए गए युद्ध अपराधों को उजागर किया गया है।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति ने क्या कहा?

    यूक्रेन के राष्ट्रपति ने क्या कहा?

    हालांकि, 2014 के मुकाबले इस बार रूसी सैनिकों को काफी ज्यादा प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है और उनकी रफ्तार भी काफी कम रही है, फिर भी रूसी सेना ने 16 हजार 600 वर्ग मील पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने गुरुवार को लक्ज़मबर्ग के सांसदों को संबोधित करते हुए कहा, "आज, हमारे क्षेत्र का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा कब्जा करने वालों के नियंत्रण में है।" उन्होंने कहा कि, पूर्वी डोनबास पर रूस का हमला अब हर दिन 100 यूक्रेनी सैनिकों को मार रहा है। वहीं, विश्लेषकों का कहना है कि, यूक्रेनी सेना के पास पश्चिमी देशों के हथियार नहीं पहुंच पाए हैं, इसीलिए उन्हें भारी नुकसान हुआ है। वहीं, जेलेंस्की ने एक बार फिर से यूरोप को चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर यूक्रेन की जीत होती है, तो ही यूरोप अपनी स्वतंत्रता के साथ आगे बढ़ सकता है, नहीं तो आज नहीं तो कल...हर किसी के लिए ‘काला समय' आएगा।

    चरमरा गई यूक्रेन की अर्थव्यवस्था

    चरमरा गई यूक्रेन की अर्थव्यवस्था

    इन 100 दिनों की लड़ाई में, इसमें कोई संदेह नहीं, कि यूक्रेनी सेना ने रूस के सामने घुटने नहीं टेके, बल्कि अपना सिर कटा लिया, बावजूद इसके यूक्रेन बहुत हद तक तबाह हो चुका है। यूक्रेन ने सिर्फ अपना 20 प्रतिशत हिस्सा गंवा चुका है, बल्कि यूक्रेन में उद्योग धंधे और यूक्रेन की अर्थव्यवस्था भी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। यूक्रेन के औद्योगिक ठिकाने, यूक्रेनी बंदरगाहों और यूक्रेन के दर्जनों अनाज के गोदाम पर रूस के नियंत्रण में हैं। जो यूक्रेन कई देशों को गेहूं की सप्लाई करता था और जिस यूक्रेन को ‘रोटी का कटोरा' कहा जाता था, वो यूक्रेन अब भूख से भी जंग लड़ रहा है। वहीं, पश्चिमी देशों ने, खासकर ब्रिटेन ने कहा है कि, यूक्रेन के अनाज भंडारों पर कब्जा कर रूस अब खाने को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।

    रूस और यूक्रेन को सैन्य नुकसान

    रूस और यूक्रेन को सैन्य नुकसान

    एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नाटो ने अनुमान लगाया है, कि यूक्रेन पर हमला करने के बाद एक जून तक रूस के करीब 12 हजार से 15 हजार सैनिक मारे गये हैं या घायल हुए हैं। हालांकि, नाटो का कहना है कि, वास्तविक आंकड़े इससे अलग भी हो सकते हैं। वहीं, नाटो ने ये नहीं बताया, कि यूक्रेन के कितने सैनिक मारे गये हैं, लेकिन राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि, हर दिन 50 से 100 यूक्रेनी सैनिक मारे जा रहे हैं। वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, अभी तक करीब 10 हजार यूक्रेनी सैनिक मारे गये हैं और करीब 20 हजार यूक्रेनी सैनिक घायल हुए हैं। वहीं, युद्ध को लेकर रूस ने दावा किया है, कि उसने करीब 8 हजार यूक्रेनी सैनिकों को कैद किया है। यानि, कुल मिलाकर देखें, तो 23 हजार से 38 हजार के बीच यूक्रेनी सैनिक इस लड़ाई से बाहर हो चुके हैं।

    लिसिचन्स्क सिटी पूरी तरह बर्बाद

    लिसिचन्स्क सिटी पूरी तरह बर्बाद

    अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन एक अधिकारी ने कहा कि, पूर्वी यूक्रेन के लिसिचन्स्क सिटी में करीब 60 प्रतिशत इन्फ्रास्ट्रक्चर और आवासी भवन रूसी हमले में ध्वस्त हो चुके हैं। वहीं, लिसिचन्स्क सिटी मिलिट्री-सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख ऑलेक्ज़ेंडर ज़िका ने यूनियन समाचार एजेंसी को बताया कि, नॉन-स्टॉप रूसी गोलाबारी ने बिजली, प्राकृतिक गैस, टेलीफोन और इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया था। वहीं, अधिकारी ने कहा कि, लिसिचन्स्क सिटी में करीब 97 हजार लोग रहते थे, लेकिन अब सिर्फ 20 हजार लोग ही शहर में बचे हैं।

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