UK Elections 2024: यूके इलेक्शन में वोटिंग आज, ऋषि सुनक की हार तय, लेबर पार्टी की जीत के मायने क्या?
UK Elections 2024: यूनाइटेड किंगडम में आज लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होने जा रहा है, जिसमें कीर स्टारमर की लेबर पार्टी को प्रचंड जीत मिलने की संभावना है और ओपिनियन पोल्स में अनुमान लगाया गया है, कि ऋषि सुनक के लिए अपनी सीट बचाना भी मुश्किल साबित होने वाला है।
कुछ जनमत सर्वेक्षणों में लेबर पार्टी को हाउस ऑफ कॉमन्स (यूके संसद) की 650 सीटों में से 400 से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। इससे कंजरवेटिव पार्टी, जिसे टोरी पार्टी के नाम से भी जाना जाता है, उसका 14 साल पुराना शासन समाप्त हो जाएगा, जिसका नेतृत्व वर्तमान में भारतीय मूल के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक कर रहे हैं।

ऋषि सुनक सरकार से क्यों है निराशा?
2016 में यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के लिए मतदान करने के बाद से ब्रिटेन आर्थिक उथल-पुथल में घिरा हुआ है। वर्तमान में, ब्रिटिश मतदाताओं के लिए सबसे बड़ी चिंता उनके बिगड़ते जीवन स्तर हैं। जबकि महंगाई की दर अक्टूबर 2022 में 11.1% के शिखर पर पहुंचने के बाद मई में 2% तक गिर गई है। लेकिन, लोगों की इनकम में लगातार गिरावट जारी है और खाद्य कीमतें जुलाई 2021 के बाद से 20 प्रतिशत से ज्यादा पर बनी हुई है।
इसने निवर्तमान कंजर्वेटिव सरकार को आधुनिक ब्रिटिश इतिहास में पहली सरकार बना दिया है, जिसने ब्रिटिश लोगों के जीवन यापन को पहले से भी बदतर स्थिति में छोड़ दिया है।
थिंक टैंक रेजोल्यूशन फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 और 2024 के अंत के बीच घरेलू डिस्पोजेबल आय में 0.9% की कमी आने की संभावना है। रिकॉर्ड संख्या में नागरिक अब फुड स्टांप्स पर निर्भर हैं।
यह सब तब हो रहा है, जब टोरी पार्टी के सत्ता में रहने के 14 सालों के दौरान सार्वजनिक व्यय में लगातार कटौती की गई है। प्रसिद्ध नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) की भी स्थिति खराब हो गई है, जिसमें काफी संख्या में भारतीय मूल के प्रोफेशनल्स हैं। एनएचएस में डॉक्टरों की संख्या में लगातार गिरावट आई है, जबकि लोगों को मिलने वाला पेंशन, महंगाई के साथ तालमेल बिठाने में नाकाम रही है।

ऋषि सुनक की पार्टी में भी उथल-पुथल
ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन में भारी राजनीतिक अनिश्चितता आ गई है। ब्रेक्सिट का विरोध करने वाले कंजर्वेटिव प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को अपने पद से हाथ धोना पड़ा। इसके बाद चार अन्य कंजर्वेटिव प्रधानमंत्री आए, जिनमें से कोई भी 38 महीने से ज्यादा सत्ता में नहीं रहा।
- ब्रिटिश प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट में ऋषि सनक की पूर्ववर्ती लिज ट्रस ने 20 अक्टूबर 2022 को कार्यकाल संभाला था, लेकिन सिर्फ 49 दिनों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया, क्योंकि उन्होंने देश के लिए जो मिनी-बजट पेश किया था, उसने ब्रिटेन की इकोनॉमी को ध्वस्त करना शुरू कर दिया था। उन्होंने ऐसे समय में बजट पेश किया था, जब देश में तमाम सामानों की कीमतें और ऊर्जा लागत आसमान छू रही थीं और ब्रिटेन आर्थिक मंदी में प्रवेश कर रहा था।
- लिज ट्रस से पहले, बोरिस जॉनसन यूके के प्रधानमंत्री थे, लेकिन घोटालों की आंधी में उनका पद उड़ गया। जिसमें उनका कुख्यात "पार्टीगेट" भी शामिल था, जिसमें उन्हें और कंजर्वेटिव पार्टी के अन्य सदस्यों को कोविड-19 महामारी के चरम के दौरान शराब पार्टी करते हुए पकड़ा गया था, जबकि ब्रिटेन सख्त लॉकडाउन से गुजर रहा था। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन पर पार्टीगेट के अलावा भाई-भतीजावाद करने, अपने सांसदों के बारे में झूठ बोलने और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।
- बोरिस जॉनसन ने 24 जुलाई 2019 को थेरेसा मे की जगह ली थी, जब ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री ब्रेक्सिट के लिए एक व्यावहारिक योजना को अंतिम रूप देने में नाकाम रहीं थीं। 2016 में कैमरन के बाद प्रो-ब्रेक्सिट मे सत्ता में आईं, उन्होंने यूरोपीय संघ के साथ एक लाभदायक ब्रेक्सिट समझौते की रूपरेखा तैयार करने का वादा किया था।
- वर्तमान प्रधान मंत्री, ऋषि सुनक, डूबते हुए टोरी जहाज को पार लगाने में नाकाम रहे। अवैध आव्रजन को अपना पसंदीदा मुद्दा बनाते हुए, उन्होंने कंजर्वेटिव भ्रष्टाचार और आर्थिक कुप्रबंधन से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश की, लेकिन ऐसा कर नहीं पाए।
- रवांडा में अवैध अप्रवासियों को भेजने की उनकी नीति को कई ब्रिटेनवासियों ने अमानवीय माना है, और विपक्षी लेबर पार्टी को भी उन पर हमला करने के लिए बहुत सारे गोला-बारूद दिए हैं। वहीं, जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भी ऋषि सुनक के यूटर्न ने लेबर पार्टी को काफी फायदा पहुंचाया है।
मई महीने में आर्थिक मोर्चे पर कुछ सुधार के बाद, ऋषि सुनक ने समय से पहले चुनाव कराने का आह्वान कर दिया। लेकिन वो अपनी पार्टी को चुनाव अभियान के लिए तैयार नहीं कर पाए। पार्टी के अंदर कलह पहले से ही मची थी और 75 से ज्यादा मौजूदा सांसदों ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। ज्यादातर सांसदों ने पार्टी बदल ली, जिससे कंजर्वेटिव पार्टी के लिए राहें और मुश्किल हो गई हैं।
लेबर पार्टी अगर जीतती है, तो क्या मायने होंगे?
चुनाव से पहले लेबर पार्टी के नेता कीर स्टारमर ने वादा किया है, कि वे ब्रिटेन में बदलाव लाने वाले एजेंट बनेंगे। उन्होंने कहा है, कि उनकी सरकार का पहला मिशन आर्थिक विकास को बढ़ावा देना होगा।
लेबर पार्टी के घोषणापत्र के मुताबिक, पार्टी 9.2 अरब डॉलर की पूंजी के साथ एक 'राष्ट्रीय धन कोष' स्थापित करेगी, जिसका मकसद विकास और स्वच्छ ऊर्जा का समर्थन करने के लिए सार्वजनिक धन जुटाएंगे। जिसमें उन्होंने कहा है, कि एक हिस्सा सार्वजनिक फंड होगा, जबकि तीन हिस्सा निजी फंड होगा।
लेबर पार्टी ने "कामकाजी लोगों के लिए" टैक्स नहीं बढ़ाने की कसम खाई है। इसके अलावा, नेशनल इंश्योरेंस, वैट में भी कोई बढ़ोतरी नहीं करने का उन्होंने वादा किया है। वहीं कॉर्पोरेट टैक्स को 25% के मौजूदा स्तर पर सीमित रखने की घोषणा की गई है।
कीर स्टारमर ने यह भी वादा किया है, कि वह हर सप्ताह 40,000 अतिरिक्त नियुक्तियां करके रोजगार को प्रोत्साहित करेंगे और वो निजी क्षेत्र में भी नौकरियां बढ़े, इसके लिए काम करेंगे। इसके अलावा, उन्होंने NHS की भयावह हो चुकी स्थिति को सुधारने की भी कसम खाई है। उन्होंने बच्चों और वयस्कों के इलाज के लिए अतिरिक्त 8,500 नए कर्मचारियों की भर्ती करने का वादा किया है।
इसके अलावा, कीर स्टारमर, ऋषि सुनक की आव्रजन नीति के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने भी वीजा प्रतिबंध लागू करके, घरेलू कमी वाले क्षेत्रों में श्रमिकों को ट्रेनिंग देकर और सीमा सुरक्षा बढ़ाकर अवैध प्रवासन को कम करने का वादा किया है। लेबर पार्टी ने ऋषि सुनक की रवांडा नीति को खत्म करने का वादा किया है।

लेबर पार्टी 'अपनी आत्मा बेच रही है'?
माना जा रहा है, कि अगर लेबर पार्टी चुनाव जीतती है, तो कीर स्टारमर यूके के अगले प्रधानमंत्री होंगे।
लेकिन, स्टारमर के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, आलोचकों ने कहा है, कि लोगों का वोट हासिल करने के लिए उन्होंने "लेबर पार्टी की आत्मा बेच दी है"। आलोचकों का कहना है, कि स्टारमर बिना किसी विचारधारा के एक ऐसे व्यक्ति हैं, जो लेबर पार्टी को ज्यादा से ज्यादा वोट दिलाने के लिए "कुछ भी" कर सकते हैं।
कीर स्टारमर के नेतृत्व में लेबर पार्टी, जो अपनी वामपंथी विचारधारा के लिए जानी जाती रही है, उसने मजदूरों वाली विचारधारा छोड़ दी है और अपनी राजनीतिक स्पेक्ट्रम का काफी हद तक विस्तार कर लिया है। जिसमें भारत को लेकर उनकी नीति भी है। लेबर पार्टी हमेशा से पाकिस्तान का समर्थन और भारत का आलोचना करने के लिए जानी जाती रही है, लेकिन कीर स्टारमर ने पार्टी की कमान संभालने के बाद लगातार भारत की तारीफें की हैं और पिछले दिनों चुनाव कैम्पेन में उन्होंने जल्द से जल्द भारत के साथ फ्री ट्रेज एग्रीमेंट को लागू करने की कसम खाई है।
कीर स्टारमर ने 2020 में वामपंथी नेता जेरेमी कॉर्बिन की जगह ली थी। लेबर पार्टी के नेतृत्व के लिए उनके अभियान ने "10 प्रतिज्ञाओं" का एक सेट पेश किया था, जिसमें हथियारों की बिक्री की समीक्षा करना, अमीरों पर टैक्स लगाना लाना शामिल था। पार्टी नेता बनने के बाद से, स्टारमर ने इनमें से ज्यादातर वादों को छोड़ दिया है। गाजा में मौजूदा संघर्ष के बीच उन्होंने हर किसी को हैरान करते हुए इजराइल का समर्थन कर दिया है, जिसकी वजह से उनकी काफी आलोचना भी की गई है।
कीर स्टारमर की नीतियों और उन्होंने जो फैसले किए हैं, उसने लेबर पार्टी के वामपंथी नेताओं को अलग-थलग कर दिया है। कॉर्बिन जैसे पूर्व लेबर दिग्गज नेता, निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। वामपंथियों की जगह अब ब्रेक्सिट समर्थक नताली एल्फिके जैसे टोरी दलबदलुओं ने ले ली है।












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