UK census: इंग्लैंड में पहली बार ईसाई हुए अल्पसंख्यक, मुस्लिम तेजी से बढ़े, हिन्दू भी काफी कम

ईसाइयों की संख्या में आई कमी ने ईसाई धर्मगुरुओं की टेंशन बढ़ा दी है। इंग्लैंड में चर्च की तरफ से धर्म का प्रचार करने की अपील की गई है, लेकिन दिक्कत ये है, कि नये ब्रिटिश समाज में लोगों का धर्म से मोहभंग हो रहा है।

UK census 2022: यूनाइटेड किंगडम में करवाए गये जनगणना में बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले आंकड़े आए हैं और पता चला है, कि पहली बार ब्रिटेन में ईसाई अल्पसंख्यक हो गये हैं। जनगणना में पता चला है, कि पहली बार इंग्लैंड और वेल्स में ईसाइयों की संख्या काफी कम हो गई है और दूसरे धर्मों को मानने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है, जबकि यूके में आधिकारिक धर्म ईसाई है। ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स ने मंगलवार को साल 2021 के लिए जनगणना रिपोर्ट जारी की है और पिछली जनगणना के मुकाबले, ब्रिटेन में श्वेत आबादी में भी कमी आई है और एक दशक में ब्रिटेन में धार्मिक लोगों की आबादी भी घटी है।

यूके जनगणना रिपोर्ट क्या कहता है?

यूके जनगणना रिपोर्ट क्या कहता है?

सल 2021 की जनगणना रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लैंड और वेल्स की लगभग 46.2% आबादी ने ही खुद को ईसाई बताया, जो एक दशक पहले, यानि ठीक पिछली बार की जनगणना के मुताबिक, जिनकी आबादी 59.3% थी। वहीं, मुस्लिम आबादी में इजाफा देखने को मिला है और मुस्लिम जनसंख्या 4.9% से बढ़कर 6.5% हो गई है, जबकि ब्रिटेन में हिंदुओं की आबादी 1.7 प्रतिशत है। वहीं, सबसे हैरान करने वाली बात ये है, कि इंग्लैंड में हर तीन लोगों में एक ने, यानि करीब 37 प्रतिशत लोगों ने कहा कि, वो किसी भी धर्म को नहीं मानते हैं, यानि वो नास्तिक हैं। ये आंकड़ा साल 2011 के जनगणना के मुताबिक 25 प्रतिशत था। आपको बता दें कि, यूके के बाकी हिस्से, जैसे स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड अपनी जनगणना रिपोर्ट अलग से प्रकाशित करते हैं।

ईसाइयों की संख्या घटने से खलबली

ईसाइयों की संख्या घटने से खलबली

वहीं, ईसाइयों की संख्या में आई कमी ने ईसाई धर्मगुरुओं की टेंशन बढ़ा दी है। वहीं, सेक्युलर कैम्पेनर्स का कहना है, कि ब्रिटिश समाज में जिस तरह से धार्मिक बदलाव हो रहे हैं, उस तरीके पर विचार होना चाहिए। यूके में इंग्लैंड के स्कूलों में जो चर्च चलते हैं, उसे ब्रिटेन सरकार फंड करती है। वहीं, एंग्लिकन बिशप संसद के ऊपरी कक्ष में बैठते हैं, और सम्राट "विश्वास का रक्षक" और चर्च का सुप्रीम गवर्नर माना जाता है। चैरिटी ह्यूमनिस्ट्स यूके के मुख्य कार्यकारी एंड्रयू कॉपसन ने कहा कि, "गैर-धार्मिकों की नाटकीय वृद्धि" ने यूके को "निश्चित रूप से पृथ्वी पर सबसे कम धार्मिक देशों में से एक बना दिया है।" उन्होंने कहा कि, "इन जनसंख्या परिणामों के बारे में सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक यह है, कि राज्य से ही जनसंख्या कैसे अलग है?" उन्होंने कहा कि, "यूरोप के किसी भी राज्य में ऐसा धार्मिक ढांचा नहीं है, जैसा हम कानून और सार्वजनिक नीति के मामले में करते हैं, जबकि गैर-धार्मिक आबादी तेजी से बढ़ रही है।"

'ईसाई धर्म की प्रचार की जरूरत'

'ईसाई धर्म की प्रचार की जरूरत'

इंग्लैंड के चर्च के सबसे वरिष्ठ धार्मिक गुरुओं में से एक यॉर्क के आर्कबिशप स्टीफन कॉटरेल ने कहा कि, ये कोई आश्चर्यजनक आंकड़े नहीं हैं, लेकिन यह ईसाइयों के लिए एक चुनौती है, कि वे अपने धर्म को बढ़ावा देने के लिए कड़ी मेहनत करें। उन्होंने कहा कि, "हमने उस युग को पीछे छोड़ दिया है, जब बहुत से लोग लगभग ऑटोमेटिक रूप से ईसाई के रूप में पहचाने जाते थे, लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है, जबकि कई और सर्वेक्षण लगातार दिखा रहे हैं, कि कैसे अभी भी लोग आध्यात्मिक सत्य और ज्ञान और जीने के लिए मूल्यों के लिए धर्म का सहारा चाहते हैं"। जनसंख्या के आंकड़ों के मुताबिक, इंग्लैंड और वेल्स में लगभग 82% लोग श्वेत समूह के हैं, जो साल 2011 के मुताबिक 86 प्रतिशत थे। यानि, श्वेत लोगों की आबादी में 4 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, करीब 9 प्रतिशत लोग एशियाई समुदाय से हैं, जबकि 5 प्रतिशत अश्वेत और 3 प्रतिशत लोग मिश्रित समूह से हैं। वहीं, 2 प्रतिशत आबादी अलग अलग जातीय समूह से हैं।

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