UAE ने भारतीय गेहूं के एक्सपोर्ट और री-एक्सपोर्ट पर लगाई रोक, वैश्विक खाद्य संकट के चलते फैसला

फरवरी महीने में भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापारिक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने के उद्देश्य से एक कॉम्प्रिंहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किए थे।

दुबई, जून 15: भारत के सबसे घनिष्ठ देशों में से एक संयुक्त अरब अमीरात ने भारतीय गेहूं के एक्सपोर्ट और रीएक्सपोर्ट को चार महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है। संयुक्त अरब अमीरात ने अगले चार महीने के लिए भारतीय गेहूं को लेकर बड़ा फैसला लिया है।

भारतीय गेहूं पर लगाई रोक

भारतीय गेहूं पर लगाई रोक

इस वक्त पूरी दुनिया में गेहूं संकट चल रहा है और ऐसे वक्त में यूएई ने भारत से गेहूं के एक्सपोर्ट और री-एक्सपोर्ट को चार महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है। यूएई राज्य समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भारत से उत्पन्न होने वाले गेहूं और आटे के निर्यात और पुन: निर्यात में चार महीने के निलंबन का आदेश दिया है, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अनाज उत्पादक है। यूएई सरकार का ये आदेश 13 मई 2022 से अगले चार महीने के लिए लागू हो रहा है। आपको बता दें कि, भारत सरकार ने भी 13 मई 2022 को ही गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था और भारत सरकार ने कहा था कि, सरकार से सरकार स्तर पर ही गेहूं का निर्यात किया जाएगा।

यूएई सरकार के फैसले का मतलब

यूएई सरकार के फैसले का मतलब

खाड़ी देश के अर्थव्यवस्था मंत्रालय ने अपने कदम के कारण के रूप में वैश्विक व्यापार प्रवाह में रुकावट का हवाला दिया है, हालांकि, यूएई सरकार की तरफ से कहा गया है कि, भारत सरकार ने घरेलू खपत के लिए संयुक्त अरब अमीरात को गेहूं के निर्यात को मंजूरी दी थी। गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बाद से भारत सरकार अब तक 469,202 टन गेहूं के शिपमेंट की अनुमति दे चुकी है। यूएई सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि, भारतीय गेहूं का निर्यात या फिर पुन: निर्यात करने वाली कंपनियां, जो 13 मई से पहले लाए गये भारतीय गेहूं को बेचना चाहते हैं, उन्हें पहले यूएई वित्त मंत्रालय में आवेदन देना होगा।

फरवरी में हुआ है अहम समझौता

फरवरी में हुआ है अहम समझौता

आपको बता दें कि, भारत और यूएई घनिष्ठ व्यापारिक पार्टनर्स हैं। और संयुक्त अरब अमीरात और भारत ने इसी साल फरवरी में एक व्यापक व्यापार और निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जो एक-दूसरे के सामानों पर सभी शुल्कों में कटौती करता है। इसके साथ ही दोनों देशों ने अगले पांच सालों में अपने वार्षिक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। यूएई और भारत सरकार के बीच सीईपीए समझौता एक मई को प्रभावी हुआ है।

100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

फरवरी महीने में भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापारिक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने के उद्देश्य से एक कॉम्प्रिंहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किए थे। पिछले कुछ सालों में भारत और संयुक्त अरब अमीरात काफी करीब आए हैं और अभी तक यूएई का सिर्फ चीन के साथ ही 100 अरब डॉलर से ज्यादा का द्विपक्षीय व्यापार था, लेकिन पिछले साल आखिरी महीनों में भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए यूएई का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया।

भारत के लिए कितने अहम हैं खाड़ी देश

भारत के लिए कितने अहम हैं खाड़ी देश

खाड़ी देशों में भारत की मौजूदगी सालों से रही है और संयुक्त अरब अमीरात के साथ साथ सऊदी अरब, कतर, ओमान और कुवैत जैसे देशों में भारत के करीब सवा करोड़ से ज्यादा नागरिक रहते हैं। इतना ही नहीं, इन देशों में रहने वाले भारतीयों से साल 2021 में भारत को 87 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा आया, लिहाजा मोदी सरकार जानती है, कि खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध को अगर और भी ज्यादा मजबूत किया जाए, तो इसका जबरदस्त फायदा भारत को मिल सकता है। लिहादा खुद पीएम मोदी ने 2015, 2018 और 2019 में यूएई के शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकात की और दोनों देशों के संबंधों को नये स्तर पर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। पीएम मोदी से पहले भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 1981 में संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की थी।

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