J-20: भारत के जिगरी दोस्त ने अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को ठुकराया, चीन से खरीदेगा J-20 फिफ्थ जेनरेशन विमान
F-35 Vs J-20 Fighter Jet: एफ-35 लड़ाकू विमान की ये जबरदस्त हार है, जिसका अंदाजा अमेरिका ने सपने में भी नहीं किया होगा। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान F-35 लाइटनिंग II को खारिज करने के बाद, संयुक्त अरब अमीरात को लेकर रिपोर्ट है, कि वो चीन से पांचवीं पीढ़ी के J-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने की योजना बना रहा है।
चीन के चेंगदू एयरोस्पेस कॉर्पोरेशन ने चीन की वायुसेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) के लिए ट्विनजेट ऑल-वेदर स्टील्थ लड़ाकू विमान चेंगदू जे-20 को डिजाइन और डेवलपमेंट किया था और इस बात की प्रबल संभावना बन गई है, कि यूएई और चीन जल्द ही एक बड़े सौदे का ऐलान कर सकते हैं।

साल 2020 में UAE ने अमेरिका से एफ-35 फाइटर जेट खरीदने की इच्छा जताई थी, लेकिन संबंधों के सामान्यीकरण के बावजूद इजराइल इस डील से असुरक्षित महसूस कर रहा था। इजराइल का मानना था, कि अगर यूएई इस फाइटर जेट को खरीदता है, तो उसकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है। इजराइल लगातार अपने पड़ोसी देशों के अमेरिका से होनों वाले किसी भी हथियार डील पर पैनी नजर रखता है और अमेरिका को अपने पड़ोसियों को किसी फाइटर जेट या किसी एडवांस टेक्नोलॉजी को देने से रोकता रहा है।
जिसको लेकर नेशनल इंटरेस्ट के एक लेख में तर्क दिया गया है, कि "यह तनाव अब यूएई को चीन जैसे अन्य संभावित सैन्य आपूर्तिकर्ताओं की ओर ले जा सकता है।"
चीन से क्यों J-20 लड़ाकू विमान खरीद सकता है UAE?
पिछले कुछ सालों में चीन और यूएई के बीच की करीबी काफी बढ़ी है और अगर यूएई, चीन से लड़ाकू विमान खरीदता है, तो ये अमेरिका-खाड़ी रणनीतिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
UAE और चीन के बीच वायु सेना से वायु सेना के बीच संबंध बढ़ रहे हैं। 23 अप्रैल को, संयुक्त अरब अमीरात के कमांडर मेजर जनरल सालेह मोहम्मद बिन मजरेन अल अमेरी ने बीजिंग का दौरा किया था और चीनी रक्षा मुख्यालय में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी-एयर फोर्स (PLAF) के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल चांग डिंगकिउ से मुलाकात की।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अगर यूएई जे-20 फाइटर जेट को चुनता है, तो उसके लिए ये एक फायदे का सौदा हो सकता है, क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात पहले ही चीनी फाल्कन L-15 एडवांस ट्रेनिंग विमान खरीद चुका है। एल-15 की डिलीवरी को मध्य पूर्व रक्षा बाजार में चीन की पकड़ मजबूत होने के तौर पर देखा जा रहा है।
यदि यूएई अपने बेड़े के लिए जे-20 को चुनता है, तो यह वास्तव में इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को बदल कर रख देगा। संयुक्त अरब अमीरात, मध्य पूर्व में एक प्रभावशाली भूमिका निभाता है और संयुक्त राज्य अमेरिका का एक प्रमुख भागीदार है। वे रक्षा, अप्रसार, व्यापार, कानून प्रवर्तन, ऊर्जा नीति और सांस्कृतिक आदान-प्रदान सहित विभिन्न मुद्दों पर सहयोग करते हैं।
चीनी मीडिया ने दावा किया है, कि "J-20 जैसे उच्च-स्तरीय लड़ाकू विमानों की उपस्थिति" अमेरिका के विशेष आपूर्ति पैटर्न को चुनौती देगी। उसका कहना है, कि संयुक्त अरब अमीरात और मध्य पूर्व के अन्य तेल-समृद्ध देशों ने हमेशा अपनी सेनाओं के लिए सर्वोत्तम हथियार खरीदे हैं, और यह देखते हुए, कि यूएस एफ-22 'रैप्टर' को बंद कर दिया गया है, यह चीनी लड़ाकों के लिए मध्य पूर्व में प्रवेश करने का एक अवसर है।
घाव पर नमक छिड़कने वाली बात यह है, कि अमेरिका ने दावा किया है, कि J-20 अमेरिकी 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट कार्यक्रम का एक कॉपी वेरिएंट है। रक्षा विभाग की 2018 वार्षिक चीन को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है, कि जे-20 और एफ-35 के बीच स्पष्ट समानताएं जासूसी का परिणाम हो सकती हैं।
अमेरिकी हथियार खरीदने का रिस्क क्या है?
अमेरिका से हथियार खरीदने का एक रिस्क ये भी होता है, कि जियो-पॉलिटिक्स के हिसाब से अमेरिका के विचार बदलते हैं और अमेरिका का 'मानवाधिकार और लोकतांत्रिक' प्रेम मौके के हिसाब से जागता और सोता रहता है। किसी देश को हथियार बेचने के बाद, अगर भविष्य में उस देश से अमेरिका के संबंध कुछ खराब हो जाएं, या अमेरिका की जियो-पॉलिटिक्स के हिसाब पर खरा ना उतरे, तो अमेरिका उन हथियारों के इस्तेमाल पर मनाही लगा देता है।
खासकर मौजूदा दुनिया में कई देशों में ऐसे शासन का उदय हो रहा है, जो लोकतंत्र का विरोधी है। मध्य पूर्व के ज्यादातर देशों में एक परिवार शासन रहता है। जबकि, यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोप ने मिलकर जिस तरह रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाए हैं, उसने भी हथियार खरीदने वाले देशों को सावधान किया है। ये एक बड़ी वजह है, कि अमेरिका की जियो-पॉलिटिक्स मध्य-पूर्व में बिगड़ने लगे हैं।
आइये जानते हैं, कि अमेरिकी एफ-35 और चीनी J-20 माइटी ड्रैगन में क्या समानताएं हैं?
आर्थिक रूप से, संयुक्त अरब अमीरात, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र..संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। 1,000 से ज्यादा अमेरिकी कंपनियां संयुक्त अरब अमीरात में काम करती हैं, और कई कंपनियां मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में व्यापार करने के लिए क्षेत्रीय मुख्यालय के रूप में उपयोग करते हैं।
लॉकहीड मार्टिन का एफ-35 लाइटनिंग II और चीनी चेंगदू जे-20, दोनों एडवांस पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं।
F-35 बनाम चीनी J-20 माइटी ड्रैगन
F-35 सिंगल-सीट, सिंगल-इंजन, बहु-भूमिका वाला लड़ाकू विमान है। इसे हवा से हवा और हवा से ज़मीन पर युद्ध सहित कई प्रकार के मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। जबकि, चीनी J-20, गुप्त क्षमताओं वाला पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है।
रेंज के लिहाज से कहा जाता है, कि J-20 की रेंज F-35 से ज्यादा है। यह इसे बिना ईंधन भरे लंबी दूरी तय करने में सक्षम बनाता है, जो रणनीतिक हवाई संचालन में एक महत्वपूर्ण कारक है।
J-20 एक घरेलू इंजन द्वारा संचालित है जिसे WS-15 आफ्टर-बर्निंग टर्बोफैन कहा जाता है। यह इसे 60,000 फीट की ऊंचाई और लगभग 700 मील की सीमा के साथ मैक 2 (1,535 मील प्रति घंटा) के करीब अधिकतम गति तक पहुंचने में सक्षम बनाता है।
रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि J-20, F-35 से ज्यादा स्पीड पर उड़ना भरने में सक्षम है। कहा जाता है कि J-20 मैक 2.0 की अधिकतम गति पर उड़ान भरने में सक्षम है, जो जबकि, एफ-35 की स्पीड 1.6 मैक है।
J-20 में एक स्टैंड-ऑफ मिसाइल लॉन्च भी है - दुश्मन की हवाई सुरक्षा की सीमा से बाहर रहने और दृश्य सीमा से परे मिसाइलों को मार गिराने की क्षमता। यह F-35 से भी ज्यादा हथियार ले जा सकता है। J-20 F-35 की तुलना में कम परिचालन लागत का भी दावा करता है।
हालांकि, जे-20 की कीमत एफ-35 के मुकाबले काफी कम है और कहा जाता है, कि जे-20, अमेरिकी एफ-35 की तरफ विश्वसनीय नहीं है। अपने एडवांस एवियोनिक्स और सेंसर सूट के कारण F-35 को J-20 की तुलना में भारी बढ़त हासिल है। अमेरिकी 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान में वर्टिकल टेकऑफ़ और लैंडिंग क्षमता (वीटीओएल) और एक विस्तृत मिशन प्रोफ़ाइल भी है, जो चीनी जेट में नहीं है।
संक्षेप में समझें, तो J-20 में रेंज, हथियार क्षमता और स्टील्थ में फायदे हैं, जबकि F-35 एवियोनिक्स, गतिशीलता और बहुमुखी प्रतिभा में उत्कृष्ट है। दोनों विमान अत्याधुनिक तकनीक का प्रतिनिधित्व करते हैं और हवाई युद्ध क्षमताओं को फिर से परिभाषित करते हैं।
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