तुर्की में खत्म होने वाला है रेस्क्यू ऑपरेशन, 36 हजार से ज्यादा मौतें, भूकंप से गांव के गांव, शहर के शहर साफ
तुर्की और सीरिया में 6 फरवरी को 7.8 मैग्नीच्यूड के साथ भीषण भूकंप के झटके आए थे, जिसने दक्षिण-पूर्वी तुर्की और उत्तरी सीरिया को दहला दिया है। इस भूकंप की वजह से कई कस्बे और कई शहर पूरी तरह से मिट्टी में मिल गये हैं।

Turkey Earthquake: तुर्की और सीरिया में भूकंप पीड़ितों को बचाने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशंस अब आखिरी चरण में पहुंच गया है और तुर्की की सरकार ने भूकंप आने के 7 दिनों के बाद मलबे के अंदर लोगों के बचे होने की उम्मीदें छोड़ दी हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ घंटों के बाद तुर्की में राहत और बचाव कार्य को बंद कर दिया जाएगा। वहीं, बचाव दल अभी भी थर्मल कैमरों और खोजी कुत्तों की मदद से लोगों की तलाश कर रहे हैं और मलबों की गहन पड़ताल की जा रही है, ताकि अगर अभी भी अगर कोई शख्स मलबे में जिंदा हो, तो उसे बचाया जा सके, हालांकि एक हफ्ते बाद उन परिस्थितियों में लोगों के बचने की उम्मीदें अब धूमिल हो चुकी हैं।

आखिरी घंटों में रेस्क्यू ऑपरेशन
तुर्की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दक्षिणी तुर्की के हटे प्रांत में रेस्क्यू टीमों ने उस वक्त खुशी मनाई और ताली बजाई, जब एक 13 साल के लड़के को मलबे के बीच से जिंदा बाहर निकाला गया। उस लड़के को मलबे के बीच से उसके एक कान से पहचाना गया और फिर उसे बचाने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया। वहीं, गाजियांटेप प्रांत में, पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद अंदर फंसी एक महिला को सुरक्षित बाहर निकाला गया। उसे निकालने में बचावकर्मियों के साथ साथ स्थानीय कोयला खदान में काम करने वाले मजदूरों ने भी काफी अहम भूमिका निभाई। हाल के दिनों में तुर्की से आने वाली राहत और बचाव कार्य के बीच जिंदगी के जिंदा मिलने की सैकड़ों कहानियां सामने आई हैं, लेकिन इसी दौरान हजारों लाशें भी मिली हैं। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है, कि बचाव के लिए करबी करीब सभी खिड़की अब बंद हो गई है, क्योंकि अब समय बीत चुका है। विशेषज्ञों का कहना है, कि एक तो भीषण भूकंप से मची तबाही और उसपर से माइनस 6 डिग्री तापमान... अब लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीदें करीब करीब खत्म हो चुकी हैं।

मौत का आंकड़ा 35 हजार पार
आपको बता दें, कि तुर्की और सीरिया में 6 फरवरी को 7.8 मैग्नीच्यूड के साथ भीषण भूकंप के झटके आए थे, जिसने दक्षिण-पूर्वी तुर्की और उत्तरी सीरिया को दहला दिया है। इस भूकंप की वजह से कई कस्बे और कई शहर पूरी तरह से मिट्टी में मिल गये हैं और शहरें ऐसी लग रही हैं, मानो मलबों के पहाड़ हों। मरने वालों की संख्या 36,000 को पार कर गई है। हैबरटर्क टेलीविजन ने बताया, कि कुछ क्षेत्रों में, खोजकर्ताओं ने इमारतों के सामने "सेस योक," या "कोई आवाज नहीं" पढ़ने वाले संकेत लगाए हैं, क्योंकि तमाम निरिक्षण के बाद भी ऐसे मलबों से उन्हें किसी के जिंदा होने के कोई संकेत नहीं मिले।

अपनों को खोजने के लिए परेशान लोग
आदियामन में एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों ने मलबे के सामने एक कंक्रीट स्लैब पर चित्रित एक चिन्ह देखा, जो दर्शाता है कि एक्सपर्ट्स ने इन जगहों का आखिरी निरीक्षण कर लिया है। वहीं, अंताक्या में, लोगों ने अपने घरों के मलबों के सामने फोन नंबर छोड़े हैं, ताकि अगर उनके परिजन के शव मिलते हैं, तो उन्हें इसकी सूचना दे दी जाए। तुर्की उद्यम और व्यापार परिसंघ के मुताबिक, अकेले तुर्की में भूकंप की वित्तीय क्षति का अनुमान 84.1 अरब डॉलर है। इसी तरह का विनाशकारी भूकंप 1999 में भी आया था, जिसमें भी भारी तबाही मची थी और उस वक्त तुर्की में मुख्य विपक्षी नेता रेचेप तैयप अर्दोआन ने तत्कालीन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था, लेकिन अब वो खुद पिछले 20 सालों से देश चला रहे हैं और अपने खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए पुलिस का सहारा ले रहे हैं।
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सीरिया की स्थिति है काफी खराब
वहीं, संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा की है, सीरिया के राष्ट्रपति तुर्की से देश के विद्रोहियों के कब्जे वाले उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में लाखों भूकंप पीड़ितों के लिए आवश्यक सहायता और उपकरण वितरित करने के लिए दो नए क्रॉसिंग पॉइंट खोलने पर सहमत हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बाब अल-सलाम और अल राय में क्रॉसिंग पॉइंट खोलने के सीरियाई नेता बशर असद के फैसले का स्वागत किया है। वर्तमान में, संयुक्त राष्ट्र को केवल बाब अल-हवा में एक क्रॉसिंग के माध्यम से उत्तर-पश्चिम इदलिब क्षेत्र में सहायता पहुंचाने की अनुमति दी गई है।

भूकंप के केन्द्र का क्या है हाल?
वहीं, तुर्की में आए भूकंप का केन्द्र पोलाट गांव है, जो अब पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। पोलाट गांव में अब एक भी मकान ऐसा नहीं है, जो गिरा नहीं हैं। गांव के सभी घर धाराशाई हो चुके हैं और गांव में दाखिल होने पर टूटे घर, फ्रीज, वॉशिंग मशीन और अन्य सामान दिखाई देते हैं। इस गांव के जीवित बचे एक शख्स जहरा कुरुकाफ़ा ने कहा, कि बेघरों के लिए पर्याप्त टेंट नहीं पहुंचे हैं, जिससे परिवारों को टेंट साझा करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कुरुकाफा ने कहा, "हम मिट्टी के ऊपर चार चार परिवारों के साथ सोते हैं।" वहीं, तुर्की के अधिकारियों ने सोमवार को कहा, कि 150,000 से अधिक बचे लोगों को प्रभावित प्रांतों के बाहर शेल्टर होम्स में ले जाया गया है।











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