अमेरिका के नंबर वन F-35 फाइटर विमान की घनघोर बेइज्जती.. पाकिस्तान के दोस्त ने दिखाया ठेंगा, क्या भारत खरीदेगा?

F-35 Fghter Jet: पाकिस्तान के दोस्त तुर्की ने अमेरिका के फाइटर जेट एफ-35 की घनघोर बेइज्जति कर दी है और उस फाइटर जेट के क्लब में जाने से इनकार कर दिया है, जिसे अमेरिका दुनिया का सबसे खतरनाक स्टील्थ फाइटर जेट बताता है।

ऐसी रिपोर्ट है, कि तुर्की अपने रूसी एस-400, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल डिफेंस सिस्टम को ही बनाए रखेगा और एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू कार्यक्रम में शामिल होने के अमेरिकी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा।

F-35 Stealth Fighters

तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान ने 4 फरवरी को एस-400 को अमेरिका फाइटर जेट पर प्राथमिकता देने का संकेत दिया है, जिसके बारे में अमेरिका की उप सचिव विक्टोरिया नूलैंड ने पिछले हफ्ते एक इंटरव्यू में खुलासा किया था, कि अगर अंकारा एफ-35 हासिल करना चाहता है, तो उसे नया समझौता करने की जरूरत होगी।

अमेरिका का इरादा क्या है?

यानि, अमेरिका चाहता है, कि एफ-35 फाइटर जेट खरीदने के लिए तुर्की, रूस के एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम से बाहर आ जाए, लेकिन तुर्की ने ऐसा करने से मना कर दिया है।

आपको बता दें, कि तुर्की को रूस से एस-400 खरीदने की वजह से साल 2019-2020 में अमेरिका ने अपने F-35 कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद अमेरिका ने काउंटरिंग ऑफ अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) के तहत तुर्की की डिफेंस इंडस्ट्री पर प्रतिबंध लगा दिया था, जो अभी भी जारी है।

F-35 Stealth Fighters

तुर्की-ग्रीस की दुश्मनी से फायदा उठाने की कोशिश

यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि कैसे अमेरिका ने दोनों देशों को हथियारों की बिक्री को मंजूरी देकर भूमध्य सागर में तुर्की-ग्रीस की दुश्मनी को जबरदस्त तरीके से भुनाया है। अपनी वायु सेना को आधुनिक बनाने की तुर्की की लंबे समय से महसूस की जा रही आवश्यकता को पूरा करने के लिए, अमेरिका ने सबसे पहले यह सुनिश्चित किया, कि तुर्की की संसद स्वीडन की नाटो सदस्यता की पुष्टि करे और तुर्की की संसद ने स्वीडन को नाटो में शामिल करने की मंजूरी पिछले महीने दे दी है।

इसके बाद अमेरिका ने अपने मौजूदा F-16 बेड़े के लिए अंकारा को F-16 ब्लॉक 70 वेरिएंट और आधुनिकीकरण किट की बिक्री को मंजूरी दे दी। लेकिन फिर उसने तुरंत 'कट्टर प्रतिद्वंद्वी' ग्रीस को भी F-35 बेचने की भी घोषणा कर दी।

अमेरिका ने यह जानते हुए भी ऐसा किया, कि इससे भूमध्य सागर में सैन्य संतुलन ग्रीस की ओर झुक जाएगा। अमेरिका ने अनुमान लगाया है, कि तुर्की को एक हवाई मंच की आवश्यकता महसूस होगी और सिर्फ S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम होना ही पर्याप्त नहीं होगा।

और इसीलिए अमेरिका ने कहा है, कि अगर तुर्की को एफ-35 फाइटर जेट चाहिए, तो उसे रूस के साथ एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम समझौते से बाहर आना होगा। लेकिन, तुर्की की विदेश मंत्री फिदान ने संकेत दे दिया है, तुर्की ऐसा करने वाला नहीं है।

तुर्की की रणनीति क्या है?

दिलचस्प बात यह है, कि जब तुर्की ने देखा, कि अमेरिका ने ग्रीस को एफ-35 फाइटर जेट बेचने का ऑफर द दिया, तो उसने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान के भविष्य के अधिग्रहण के जवाब में अपनी एफ-35 रखने की आवश्यकता को ही खत्म करने का फैसला किया है और उसने चार तरह की रणनीति तैयार की है।

पहला- एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम से बाहर निकलने के बजाए अमेरिकी एफ-35 फाइजट जेट के प्रस्ताव को खारिज कर देना।

दूसरा- अब तुर्की की कोशिश ग्रीस के साथ संबंधों को स्थिर करने और संघर्ष की संभावनाओं को कम करने की है, ताकि किसी फाइटर जेट की जरूरत ही ना हो। ब्लूमबर्ग के अनुसार, "पड़ोसी ग्रीस और तुर्की मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन एक-दूसरे की सैन्य क्षमताओं पर भी बारीकी से नजर रख रहे हैं।"

तीसरा- तुर्की यूरोफाइटर टाइफून जेट - जेनरेशन 4++ लड़ाकू विमान खरीदने की संभावना तलाश रहा है, जो अत्यधिक परिष्कृत हैं, और जो एफ-35 से सिर्फ एक पायदान नीचे हैं। एस-400, उसके एफ-16 के स्व-आधुनिक बेड़े, नए एफ-16 ब्लॉक 70 और यूरोफाइटर टाइफून (यदि कोई सौदा होता है) का संयोजन है। वहीं, तुर्की सुनिश्चित करते रहना चाहता है, कि ग्रीस तकनीकी रूप से उससे आगे न निकल जाए। ये विचार उस स्थिति में है, जब तुर्की ये मान ले, कि ग्रीस के साथ तनाव कम करने के उसकी सारी कोशिशें फेल हो गई हैं।

चौथा- अंकारा अपने घरेलू रक्षा औद्योगिक आधार में अपनी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर, KAAN के साथ महत्वपूर्ण प्रगति की को तेजी से आगे बढ़ाएगा। आपतो बता दें, कि तुर्की भी फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट का निर्माण कर रहा है और इस प्रोजेक्ट का नाम KAAN है, जिसमें उसने पाकिस्तान को शामिल होने का ऑफर दिया है।

आपको बता दें, कि एफ-35 वही फाइटर जेट है, जिसको लेकर भारत में भी कहा जाता है, कि भारत इसे खरीद सकता है। ऐसी रिपोर्ट्स हैं, कि भारत और अमेरिका में एफ-35 को लेकर बात भी हुई है। भारत इसलिए स्टील्थ फाइटर जेट खरीदना चाहता है, क्योंकि चीन के पास दो तरह के स्टील्थ फाइटर जेट हैं, और एक SU-31 स्टील्थ फाइटर जेट उसने पाकिस्तान को भी बेचने का फैसला किया है।

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