Turkey Election: तुर्की की राजनीति को 20 सालों से हांकने वाले नेता अर्दोआन, कल की अग्निपरीक्षा में होंगे पास?
तुर्की में 14 मई को संसदीय और राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। अगर कल के चुनाव में विजेता नहीं मिलता है, तो फिर 28 मई को फिर से चुनाव होंगे।

Recep Tayyip Erdogan: तुर्की में कल संसदीय और राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है और रेचेप तैय्यप अर्दोआन, जो दो दशकों से तुर्की की राजनीति पर हावी है, वो एक बार फिर से लोगों के बीच पांच साल तक अपनी सत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
रेचप तैय्यप अर्दोआन, राष्ट्रपति के रूप में अपने तीसरे कार्यकाल को सुरक्षित करने के लिए जी-जान से जुटे हुए हैं। साल 2003 से 2014 तक तुर्की के प्रधानमंत्री रहने वाले अर्दोआन, पिछले 20 सालों से तुर्की की राजनीति को अपने हाथों से हांक रहे हैं, लेकिन 2023 का राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव अर्दोआन के लिए काफी मुश्किल साबित हो रहा है। इतने मुश्किल चुनाव का अभी तक उन्होंने सामना नहीं किया है।
अर्दोआन की राजनीति को समझिए
रेचेप तैय्यप अर्दोआन की उम्र 69 साल है और उनकी राजनीतिक परवरिश एक रूढ़िवादी राजनीतिक परंपरा के बीच में हुई है। अर्दोआन ने तुर्की की राजनीति में सालों से चली आ रही धर्मनिरपेक्ष परंपरा को गंभीर नुकसान पहुंचाया।
तुर्की के जिस समाज को 1920 के दशक में मुस्तफा केमल अतातुर्क ने काफी मुश्किलों से लड़कर उदारवादी बनाया था, जिस राजनीति को धर्म से अलग किया था, उसे अर्दोआन ने काफी खराब किया है। अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 20 सालों की अपनी ताकतवर राजनीति के दौरान अर्दोआन की छवि एक बांटने वाले नेता के तौर पर विकसित हुई है।
अर्दोआन पहले सालों तक देश के प्रधानमंत्री रहे और फिर राष्ट्रपति बन गये। उन्होंने 20 सालों तक लगातार सत्ता के शीर्ष पर रहकर मुस्तफा केमल अतातुर्क के 15 सालों तक लगातार राज करने के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। 2014 में, वह लोकप्रिय वोट से चुने गए पहली बार देश के ष्ट्रपति बने। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने देश की संसद को राष्ट्रपति केन्द्रित कर दिया और प्रधानमंत्री की सारी शक्तियों को खत्म कर दिया।
यानि, तु्र्की की संसदीय राजनीति परंपरा काफी कमजोर हो गई और राष्ट्रपति प्रणाली की शुरूआत हो गई।

अर्दोआन की राह मुश्किल कैसे?
अर्दोआन के शासनकाल में तुर्की को कट्टरपंथी तत्वों तक फंड पहुंचाने का आरोप लगा और पिछले साल उसे संदिग्ध लेनदेन में शामिल होने के लिए एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट में डाल दिया गया।
तुर्की में रविवार को वोट डाले जाने हैं और ये मतदान उस वक्त हो रहा है, जब तुर्की गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, जिसके कारण मुद्रास्फीति में तेजी आई है और तुर्की में रहने की लागत काफी बढ़ गई है।
इसके अलावा दक्षिण-पूर्वी तुर्की में 6 फरवरी को आए विनाशकारी भूकंप ने अर्दोआन की राजनीति को काफी प्रभावित किया है। कई लोगों ने उनकी सरकार की प्रतिक्रिया और निर्माण नियमों को लागू करने में विफलता को लेकर उनकी घोर आलोचना की।
तुर्की में आए भूकंप की वजह से करीब 50 हजार लोगों की मौत हो गई और आलोचकों का कहना है, कि अगर सरकार ने नियमों की अवहेलना नहीं करने दी होती, तो मौत और बर्बादी का आंकड़ा कम हो सकता था।
29 साल के ओजबिलगिन ने आरोप लगाया, कि "अर्दोआन की शासन की वजह से विनाशकारी नुकसान हुआ, क्योंकि ठेकेदारों को कमजोर इमारतों का निर्माण उस क्षेत्र में करने दिया गया, जहां बार बार भूकंप आते हैं। इसीलिए हजारों इमारतें ताश के पत्तों की ढह गई है और हजारों लोग मारे गये।"
हालांकि, राष्ट्रपति के पास कई समर्थक हैं, जो वर्षों से उनकी सफलताओं की ओर इशारा करते हैं और उन्हें तुर्की की मौजूदा परेशानियों से निपटने वाले व्यक्ति के रूप में देखते हैं।
इस्तांबुल के रूढ़िवादी बाहुल्य फतह जिले के एक दुकानदार अहमत गोक्काया ने कहा, कि "बेशक, 20 वर्षों में, बुरे दौर के साथ-साथ अच्छे दौन भी आए हैं।" उन्होंने कहा, कि "हमारे राष्ट्रपति को भूकंप आपदा के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। क्या वह तुर्की में हर निर्माण स्थल को खुद नियंत्रित करते हैं?
उन्होंने कहा, कि "हमने देखा है, कि उन्होंने् इस देश के लिए क्या किया है, और हमें उन्हें अब नहीं छोड़ना चाहिए।"

राजनीति में कैसे आगे बढ़े अर्दोआन?
अर्दोआन के राजनीतिक कैरियर का आगाज 1970 के दशक में इस्तांबुल के बेयोग्लू जिले से शुरू हुआ था, जहां उनका घर कासिम्पा में पड़ता है। ये एक बेहद खूबसूरत क्षेत्र है, जो इस्तिकलाल एवेन्यू की चमकदार दुकानों से गोल्डन हॉर्न के पानी तक जाने वाली ढलानों पर एक श्रमिक वर्ग का पड़ोस है।
उनकी पहली राजनीतिक भूमिका 1976 में नेशनल साल्वेशन पार्टी की बेयोग्लू युवा शाखा के प्रमुख के रूप में शुरू हुई थी, जिसका नेतृत्व नेक्मेट्टिन एर्बाकान ने किया, जिन्हें भविष्य के प्रधानमंत्री के रूप में देखा जाता था, और जिन्हें अर्दोआन का मेंटर माना जाता था।
साल 1994 में अर्दोआन पहली बार इंस्ताबुल के मेयर बने और इस दौरान उन्होंने काफी कम किए। उन्होंने बतौर मेयर शहर की तेजी से बढ़ती आबादी, वायु प्रदूषण, कचरा संग्रह और स्वच्छ पानी की कमी जैसी कई समस्याओं का समाधान किया।
लेकिन, मेयर बनने के चार सालों के बाद अर्दोआन को अपने एक विवादित कविता पाठ के लिए जेल की सजा सुनाई गई। वो चार महीनों तक जेल में रहे और उनपर धार्मिक भेदभाव को भड़काने का आरोप लगा था। अर्दोआन भले ही चार महीनों तक जेल में रहे, लेकिन उनकी राजनीति का एक बेहतरीन रास्ता बन चुका था। अर्दोआन धार्मिक राजनीति करने वाले नेताओं के प्रतीक बन गये और उन्होंने तुर्की के समाज में, जो उदारवादी बन चुका था, वहां फिर से धार्मिक जहर को घोला।
जुलाई 1999 में जेल से बाहर आने के बाद अर्दोआन ने दो सालों के बाद अपनी खुद की पार्टी की स्थापना की और नाम रखा 'जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (AK)', जो देखते ही देखते देश की मुख्य पार्टी बन गई। पार्टी की स्थापना के सिर्फ 15 महीने बाद ही, उन्होंने 2002 का चुनाव जीत लिया और देश के प्रधानमंत्री बन गये।

अर्दोआन की 20 सालों की राजनीति?
अर्दोआन के 20 सालों के शासन को दो हिस्सों में बांटकर देखा जा सकता है। शासनकाल के पहले 10 सालों में उन्होंने लोकतांत्रिक सुधार प्रक्रियाओं को अपनाया, क्योंकि वो तुर्की को यूरोपीय यूनियन का हिस्सा बनाना चाहते थे।
इस दौरान अर्दोआन ने देश की सत्ता से सेनी की पकड़ को कमजोर करने के लिए काफी कम किया और धीरे धीरे उन्होंने देश की राजनीति में सेना की भूमिका खत्म कर दी, जिसके लिए देश और विदेश में उनकी काफी तारीफ की गई। इस दौरान उन्होंने महिलाओं और देश के अल्पसंख्यकों के लिए भी कई तरह के कदम उठाए।
लेकिन, बाद के 10 सालों में अर्दोआन की राजनीति पूरी तरह से ध्रुवीकरण की राजनीति की तरफ मुड़ गई। पिछले 10 सालों में अर्दोआन की सत्ता केन्द्रित राजनीति के लिए उनकी आलोचना की गई। साल 2013 में उन्होंने तुर्की में हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबंध को खत्म कर दिया। हालांकि, 2016 में एक बार फिर से सेना ने उनकी सत्ता को उखाड़ फेंकने की कोशिश की और उनपर हमला किया गया, लेकिन उन्होंने तख्तापलट की कोशिश को नाकाम कर दिया।
लेकिन, इसके बाद उन्होंने हजारों लोगों को जेल में ठूंस दिया। सैकड़ों सरकारी अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया। अर्दोआन सरकार ने मुस्लिम नेता फतुल्लाह गुलेन पर तख्तापलट का आरोप लगाया और चुन-चुनकर उनके समर्थकों को टॉर्चर किया और जेल में बंद कर दिया।
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अर्दोआन की कमजोर होती पार्टी
अर्दोआन की पार्टी को सबसे पहली बार 2015 में चुनावी झटका उस वक्त लगा, जब उनकी एके पार्टी ने देश की संसद में अपना बहुमत खो दिया, जिसके बाद अर्दोआन ने अति-राष्ट्रवादियों के साथ गठबंधन कर लिया और कुर्द शांति प्रक्रिया को छोड़ दिया।
हालांकि, इसके चार साल बाद अर्दोआन की पार्टी को फिर से बड़ा झटता लगा, जब स्थानीय चुनावों में इस्तांबुल और अंकारा सहित प्रमुख शहरों ने विपक्ष के सामने एके पार्टी का सफाया हो गया। हालांकि, अर्दोआन के भारी विरोध के बाद इंस्ताबुल में, जो उनका गढ़ माना जाता था, वहां फिर से चुनाव कराए गये, लेकिन दोबारा हुए चुनाव के बाद उनके विरोधी ने और भी ज्यादा मतों से चुनाव जीत लिया।
अब 14 मई को फिर से देश में संसदीय और राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने हैं। विपक्षी पार्टियों के गठबंधन के नेता केमल किलिकडारोग्लू को मजबूत बढ़त मिलने की संभावना है, लिहाजा तुर्की में अब यही सवाल पूछे जा रहे हैं, कि क्या 20 सालों तक तुर्की की राजनीति को नियंत्रित करने वाले नेता की राजनीति खत्म होने जा रही है?












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