गर्व से खुद को हिंदू कहने वाली तुलसी गबार्ड बनेंगी इंटेलिजेंस चीफ, जानिए क्यों हो रही है उनकी चर्चा

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक के बाद एक प्रमुख व्यक्तियों को अहम विभागों के चीफ के तौर पर शामिल करने का ऐलान कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने नेशनल इंटेलिजेंस प्रमुख के पद के लिए तुलसी गबार्ड को चुना है। तुलसी गबार्ड नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर होंगी।

तुलसी गबार्ड पहले डेमोक्रेटिक कांग्रेस महिला थीं, लेकिन बाद में वह रिपब्लिकन हो गईं। तुलसी गबार्ड की तारीफ करते हुए ट्रम्प ने उन्हें निडर महिला बताया और कहा कि वह खुफिया विभाग को अच्छे से संभालेंगी।

tulsi gabbard

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा, "डेमोक्रेट राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन के लिए एक पूर्व उम्मीदवार के रूप में, उन्हें दोनों पार्टियों में व्यापक समर्थन प्राप्त है - अब वह एक गौरवशाली रिपब्लिकन हैं!"

उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि तुलसी हमारे खुफिया समुदाय में अपने शानदार करियर को परिभाषित करने वाली निडर भावना लाएंगी, हमारे संवैधानिक अधिकारों की वकालत करेगी और ताकत के माध्यम से शांति सुनिश्चित करेगी। तुलसी हम सभी को गौरवान्वित करेगी!"

सेना मे दो दशक की सेवा

तुलसी गबार्ड ने आर्मी नेशनल गार्ड में दो दशक तक अपनी सेवा दी, उन्हें इराक और कुवैत भी तैनात किया गया। उन्होंने दो वर्ष के लिए हाउस होमलैंड सिक्योरिटी कमेटी में भी अपनी सेवा दी।

भारत से नहीं है कोई नाता

तुलसी गबार्ड की मां हिंदू थीं और उनसे प्रभावित होकर ही तुलसी ने हिंदू धर्म को अपनाया था। तुलसी गबार्ड के नाम को सुनकर कई बार लोगों को लगता है कि उनका भारत से कुछ नाता है, लेकिन यह बिल्कुल सच नहीं है।

दरअसल तुलसी के परिवार ने हिंदू धर्म को अपना लिया था। तुलसी खुद भी हिंदू धर्म से काफी प्रभावित हैं, उन्होंने भगवत गीता पर हाथ रखकर शपथ भी ली थी।

तुलसी की मां ने हिंदू धर्म अपनाया

तुलसी गबार्ड की मां ने हिंदू धर्म को अपना लिया था। जिसके बाद उन्होंने अपने सभी बच्चों को हिंदू नाम दिया। खुद तुलसी गबार्ड भी अपने आप को गर्व से हिंदू बताती हैं। वह पहली हिंदू कांग्रेस महिला थीं।

तुलसी गबार्ड का विवाह सिनेमेटोग्राफर अब्राहम विलियम्स के साथ हुआ है। तुलसी के पिता माइक गबार्ड स्टेट सिनेडर हैं,जो पहले रिपब्लिकन थे, लेकिन अब वह डेमोक्रैट हो गए हैं।

रह चुकी हैं राष्ट्रपति पद की रेस में

वर्ष 2020 में कमला हैरिस के खिलाफ डेमोक्रैट की ओर से राष्ट्रपति पद की दावेदार थीं। हालांकि बाद में वह रेस से बाहर हो गई थीं। जिसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी।

उन्होंने डेमोक्रैट पर युद्ध को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए पार्टी को छोड़ने का फैसला लिया था। रिपब्लिकन पार्टी में शामिल होने के बाद 2022 में गबार्ड ने डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन किया और उन्हें कमला हैरिस के खिलाफ बहस में तैयारी करने में मदद की।

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