Trump's Assassination Attempt: क्या गृह-युद्ध के मुहाने पर खड़ा है अमेरिका? ट्रंप को गोली लगती, तो क्या होता?
Trump's Assassination Attempt: 13 जुलाई 2024 को पेंसिल्वेनिया में एक रैली में डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या करने की कोशिश के साथ गही अमेरिका ने अपनी बढ़ती ध्रुवीकृत राजनीति में एक और हिंसक घटना को जोड़ लिया है। ऐसा माना जाता है, कि अगर डोनाल्ड ट्रंप को गोली लग जाती, तो शायद अमेरिका में एक और गृहयुद्ध शुरू हो सकता था।
यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स के पॉलिटिकल विभाग के प्रमुख एरी पेरलिगर ने कहा, कि "यह आश्चर्य की बात नहीं है कि ट्रंप को अगर गोली लगती, तो अमेरिका के लोग हिंसा में शामिल हो जाते।"

उन्होंने कहा, कि ट्रंप की हत्या की कोशिश की सबसे पहले जब मैंने खबर सुनी, तो "मैंने सोचा कि हम मूल रूप से संभावित गृहयुद्ध से एक इंच दूर थे। मुझे लगता है कि अगर, वास्तव में, डोनाल्ड ट्रम्प को आज घातक चोटें लगी होतीं, तो अब तक हमने जो हिंसा देखी है, वह अगले कुछ महीनों में होने वाली हिंसा की तुलना में कुछ भी नहीं होगी। मुझे लगता है कि इससे क्रोध, हताशा, आक्रोश, शत्रुता का एक नया स्तर सामने आता, जो हमने अमेरिका में कई सालों से नहीं देखा है।
अमेरिका के राजनीतिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर ट्रंप को गोली लगती, तो उनके समर्थकों का शक यकीन में बदल जाता, कि उनकी विचारधारा को अवैध ठहराया जा रहा है और उनके नेता को रास्ते से हटाने के लिए साजिश रची गई थी और पिछली बार भी डोनाल्ड ट्रंप को अवैध तरीके से राष्ट्रपति चुनाव हरा दिया गया था और अगर वो उनका शक यकीन में बदलता, तो वो हिंसा करने से पहले एक सेकंड भी नहीं सोचते।
डोनाल्ड ट्रंप पिछले पांच सालों से कह रहे हैं, कि उन्हें साजिश के तहत व्हाइट हाउस आने से रोका जा रहा है।
एरी पेरलिगर का मानना है, कि अगर ट्रंप को घातक चोट लगी होती, तो इससे देश में गृहयुद्ध छिड़ सकता था।
पेरलिगर का सुझाव है कि हत्या की कोशिश ट्रंप समर्थकों और दक्षिणपंथी राजनीति में विश्वास करने वाले लोगों के बीच इस विश्वास को मजबूत कर सकती है, कि उन्हें हाशिए पर रखा जा रहा है और राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है। उनका तर्क है कि राजनीतिक हत्या के प्रयासों का मकसद अक्सर किसी व्यक्ति को खत्म करने से कहीं ज्यादा तेजी से और प्रभावी ढंग से व्यापक राजनीतिक उद्देश्यों को हासिल करना होता है।
पेरलिगर इस बात पर प्रकाश डालती हैं, कि राजनीतिक हत्या के प्रयासों का लक्ष्य किसी की हत्या से कहीं ज्यादा बड़ा होता है - उनका उद्देश्य राजनीतिक उद्देश्यों को तेजी से हासिल करना होता है। अमेरिका जैसे अत्यधिक ध्रुवीकृत वातावरण में, इस तरह के कृत्य कुछ समूहों के बीच हाशिए पर होने की धारणा को वैध बना सकते हैं, जिससे तनाव और बढ़ सकता है।
बढ़ते ध्रुवीकरण ने एक ऐसा माहौल बनाया है जहां राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को विरोधियों के बजाय दुश्मनों के रूप में चित्रित किया जाता है। यह मानसिकता लोकतंत्र में लोगों के यकीन को तोड़ने का काम करती है और एक ऐसे माहौल को बढ़ावा देती है जहां हिंसा कुछ लोगों के लिए एक व्यवहार्य विकल्प बन जाती है।
ट्रंप की हत्या की कोशिश अमेरिकी राजनीति की अस्थिर स्थिति की एक कठोर याद दिलाती हैं। इसके साथ ही, अमेरिकी समाज की मानसिकता को भी दुनिया के सामने लाती है।
शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रॉबर्ट पेप, जो शिकागो प्रोजेक्ट ऑन सिक्योरिटी एंड थ्रेट्स के डायरेक्टर भी हैं, उन्होंने ने NBC न्यूज को भेजे एक ईमेल में नेशनल सर्वे का हवाला देते हुए कहा, कि "10% अमेरिकी वयस्क नागरिक, जिनमें से एक तिहाई के पास बंदूकें हैं, वो इस बात से सहमत हैं, कि "डोनाल्ड ट्रम्प को राष्ट्रपति बनने से रोकने के लिए बल का प्रयोग उचित है।"
वो इस बात को भी मानते हैं, कि "हमें राष्ट्रपति बाइडेन को प्रतिशोध में खतरों के बारे में भी चिंता करने की आवश्यकता है। हमारे सर्वेक्षण से पता चलता है, कि 7% अमेरिकी वयस्क (18 मिलियन) ट्रम्प को राष्ट्रपति पद पर बहाल करने के लिए बल के इस्तेमाल का समर्थन करते हैं, जिनमें से आधे के पास बंदूकें हैं।"
ये आंकड़े काफी खतरनाक हैं और इसी बात की तरफ इशारा करते हैं, कि अगर डोनाल्ड ट्रंप को गोली लगी होती, तो शायद अमेरिका अपने नजदीकी इतिहास का सबसे बड़ा खूनखराबा देख सकता था।
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी लॉ स्कूल में ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस ने जनवरी में एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें खुलासा किया गया था, कि सिर्फ जाने-माने राष्ट्रीय राजनेताओं को ही धमकियों का सामना नहीं करना पड़ा है, बल्कि 43% राज्य विधायकों और 18% स्थानीय पदाधिकारियों ने कहा, कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं। वेस्ट पॉइंट, न्यूयॉर्क में यू.एस. मिलिट्री अकेडमी में आतंकवाद का मुकाबला करने वाले केंद्र ने पाया है, कि हाल के वर्षों में सार्वजनिक अधिकारियों को धमकाने से संबंधित संघीय आरोपों में तेजी से इजाफा हुआ है और इस ट्रेंड में लगातार वृद्ध हुई है।
इन आंकड़ों के देखते हुए आशंका गहरा रही है, कि अमेरिका के लिए आने वाला वक्त आसान नहीं होने वाला है और अमेरिका एक राजनीतिक अनिश्चितता की तरफ भी बढ़ सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर हो सकता है।












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