Trump Tariffs Refund: ट्रंप को लगा तगड़ा झटका! भारत सहित कई देशों को लौटाने होंगे करीब 159 बिलियन डॉलर
Trump Tariffs Refund: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 2025 में विदेशी वस्तुओं पर लगाए गए भारी टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 'अधिकार क्षेत्र से बाहर' बताते हुए अवैध घोषित कर दिया है। इस फैसले का अर्थ यह है कि अमेरिकी सरकार को लगभग 159 बिलियन डॉलर की विशाल राशि उन देशों और कंपनियों को वापस करनी होगी, जिनसे यह वसूली गई थी।
ट्रंप ने इस फैसले को "हास्यास्पद" करार देते हुए नाराजगी जताई है, क्योंकि इससे न केवल अमेरिकी खजाने पर बोझ बढ़ेगा, बल्कि उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति को भी बड़ा कानूनी झटका लगा है।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ लागू करने के लिए कार्यकारी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। कानूनन, व्यापार शुल्क लगाने के लिए जिस प्रक्रिया और तर्क की आवश्यकता होती है, सरकार उससे आगे निकल गई थी। कोर्ट के अनुसार, यह कदम लोकतांत्रिक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन था, जिसके कारण अब वसूले गए अरबों डॉलर को 'रिफंड' के रूप में वापस करना अनिवार्य हो गया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर रिफंड का प्रभाव
159 बिलियन डॉलर की यह वापसी अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में एक नया मोड़ लाएगी। चीन, कनाडा, मैक्सिको और यूरोपीय संघ जैसे देशों को भारी मात्रा में राशि वापस मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिफंड से उन देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी जो ट्रंप की व्यापारिक सख्ती से प्रभावित हुए थे, जबकि अमेरिका के लिए यह एक बड़ी वित्तीय चुनौती बन सकता है।
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भारत को मिलने वाली अनुमानित राशि
भारत उन प्रमुख देशों में शामिल था जिन पर ट्रंप ने शुरुआती दौर में 50% तक का भारी टैरिफ लगाया था। हालांकि, बाद में ट्रेड डील के कारण इसे घटाकर 18% कर दिया गया था, लेकिन इस दौरान भारतीय निर्यातकों ने करोड़ों डॉलर का अतिरिक्त शुल्क चुकाया। कुल 159 बिलियन डॉलर के रिफंड में से भारत को अरबों डॉलर वापस मिल सकते हैं, जो भारतीय स्टील, एल्युमीनियम और आईटी क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत होगी।
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ट्रंप की प्रतिक्रिया और आगामी व्यापार नीति
डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले को देश के लिए हानिकारक बताया है। उनका तर्क है कि इन टैरिफ के जरिए उन्होंने अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण दिया था। इस अदालती झटके के बाद अब ट्रंप प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है: पहला, इस भारी भरकम रिफंड की व्यवस्था करना और दूसरा, भविष्य के लिए एक ऐसी व्यापार नीति तैयार करना जो कानूनी रूप से वैध हो और जिसे अदालत में दोबारा चुनौती न दी जा सके।












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