'डील मानो नहीं तो सारे पुल, पॉवर प्लांट उड़ा देंगे', इस्लामाबाद वार्ता से पहले Trump ने ईरान को दी चेतावनी
पश्चिम एशिया में जारी गतिरोध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। रविवार को ट्रंप ने एक ओर जहां ईरान के खिलाफ कठोर सैन्य कार्रवाई और बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकी दी है। वहीं दूसरी ओर दूसरी ओर इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत के लिए 'उचित और तर्कसंगत' समझौते की पेशकश की है। ट्रंप के इस बयान ने तनाव को और बढ़ा दिया है।
ट्रंप बोले- अमेरिका "अब और नरमी नहीं दिखाएगा"
दरअसल, सीजफायर उल्लंघन पर भड़के ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर ईरान पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा ईरान ने कल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में गोलियां चलाने का फैसला किया, यह हमारे संघर्षविराम समझौते का पूर्ण उल्लंघन है! उनमें से कई गोलियां एक फ्रांसीसी जहाज और ब्रिटेन के एक मालवाहक जहाज पर दागी गईं। यह अच्छा नहीं था।" उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका "अब और नरमी नहीं दिखाएगा" और जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।

समझौता नहीं किया तो सारे पुल और प्लांट अमेरिका उड़ा देगा
ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान द्वारा समझौता स्वीकार न करने पर अंजाम बहुत बुरा होगा। उन्होंने स्पष्ट लिखा, "अगर ईरान ने समझौता नहीं किया तो अमेरिका ईरान के हर एक पावर प्लांट और हर एक पुल को उड़ा देगा। अब कोई शराफत नहीं बरती जाएगी!
"ईरान की किलिंग मशीन को खत्म करने का समय आ गया"
ट्रंप ने आक्रामक लहजे में कहा कि वह पिछले 47 वर्षों में अन्य राष्ट्रपतियों द्वारा अधूरा छोड़ा गया काम पूरा करना अपना सम्मान समझेंगे। उन्होंने साफ घोषणा की, "ईरान की किलिंग मशीन को खत्म करने का समय आ गया है!
पाकिस्तान में कूटनीतिक बातचीत की तैयारी
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनके प्रतिनिधि पाकिस्तान की राजधानी Islamabad में आगामी दौर की वार्ता के लिए जा रहे हैं। इस बातचीत का उद्देश्य क्षेत्र में चल रहे तनाव को कम करना और एक नया समझौता तैयार करना बताया जा रहा है। हालांकि, पिछले दौर की वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हुई थी, जिससे स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
युद्धविराम के ऐलान के बाद जारी है आरोप-प्रत्यारोप
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए संघर्षविराम के बावजूद स्थिति स्थिर नहीं हो पाई है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन और प्रतिबंधों को जारी रखने के आरोप लगा रहे हैं। ईरान का कहना है कि वह जलसंधि को "खुला" रखना चाहता है, जबकि अमेरिका उस पर सैन्य और आर्थिक दबाव बनाए रखने की नीति पर कायम है।












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