भारत के मोस्‍ट वांटेड हाफिज सईद के साथ चुनाव लड़ेंगे परवेज मुशर्रफ

नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ जिन्होंने हाल ही में आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा व जमात उद दावा की तारीफ की थी, अब वह खुलकर मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि वह 2018 के चुनाव में हाफिज सईद की पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहेंगे। पाकिस्तान के स्थानीय मीडिया आज न्यूज ने जब मुशर्रफ से यह सवाल पूछा कि क्या आप हाफिज सईद के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे तो उन्होंने कहा कि अभी तक इसपर कोई बात नहीं हुई है, लेकिन अगर वह गठबंधन का हिस्सा बनना चाहते हैं तो मैं उनका स्वागत करुंगा। इससे पहले मुशर्रफ ने कहा था कि वह तमाम दलों के साथ मिलकर एक बड़ा राजनीतिक गठबंधन तैयार करेंगे। यह बात उन्होंने तमाम दलों के साथ बैठक के बाद कही थी, जिसमें सुन्नी तहरीक, मजलिस ए वहादतुल, पाकिस्तान आवामी तहरीक सहित अन्य दल भी शामिल थे।

मुशर्रफ का चेहरा आया सामने

मुशर्रफ का चेहरा आया सामने

जिस तरह से मुशर्रफ ने हाफिज सईद के साथ गठबंधन की बात कही है उससे ना सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर के कई नेता चकित है। मुशर्रफ ने कहा कि वह लश्कर ए तैयबा व उसके संस्थापक हाफिज सईद के बहुत बड़े समर्थक थे। उन्होंने कहा कि कश्मीर में भारतीय सेना लोगों का दमन कर रही है, ऐसे में वह आतंकी संगठन का समर्थन करते हैं जोकि भारतीय सेना के खिलाफ लड़ रही है। ऐसे में जिस तरह से खुले मंच पर मुशर्रफ ने हाफिज सईद और आतंकी संगठनों का समर्थन किया है उसने पाकिस्तान की आतंक को लेकर सोच को दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है।

बतौर राष्ट्रपति भारत ने की थी उनसे बात

बतौर राष्ट्रपति भारत ने की थी उनसे बात

जिस वक्त मुशर्रफ पाकिस्तान की कमान संभाल रहे थे तो भारत उनके साथ वर्ष 2003-2007 के बची कई मुद्दों पर बात करता था। दोनों ही देशों के बीच सियाचिन से सेना को वापस लेने के लिए भी बात की गई थी, लेकिन भारतीय सेना ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया था। ऐसे तमाम मुद्दों पर भारत ने मुशर्रफ से बतौर राष्ट्रपति रहते बात की थी, लेकिन जिस तरह से मुशर्रफ ने अपने असली चेहरे को दुनिया के सामने रखा है, उसने उनकी पोल और इरादे की पोल खोलकर रख दी है।

आखिर क्यों हाफिज का कर रहे समर्थन

आखिर क्यों हाफिज का कर रहे समर्थन

लेकिन ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों मुशर्रफ खुलकर हाफिज सईद का समर्थन कर रहे हैं, इसकी बड़ी वजह यह है कि पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता है, पीपीपी अपने भूतकाल से जूझ रहे हैं, जबकि नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से मुश्किल में है। वहीं इमरान खान की पार्टी की बात करें तो उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ काफी कमजोर दल है, जिसकी अकेले के दम पर सरकार बनाने की संभावना ना के बराबर है। यही वजह है कि हाफिज सईद ने भी खुद की पार्टी बनाने का ऐलान करते हुए चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान किया था और मिल्ली मुस्लिम लीग का गठन किया था।

राजनीति में उतरा हाफिज

राजनीति में उतरा हाफिज

हालांकि पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने अभी हाफिज की पार्टी को मान्यता नहीं दी है, लेकिन हाफिज की पार्टी के नेता याकूब और लियाकत खान ने उपचुनाव में हिस्सा लिया था, इन दोनों ने निर्दलीय उम्मीदार के तौर पर चुनाव लड़ा था, याकूब शेख को 5822 वोट भी मिले थे। नए राजनीतिक दल तहरीक लबेक या रसूल अल्लाह जिसने इस्लामाबाद में पीएमएल- एन के मंत्रियों को फांसी देने के साथ संसद को स्थगित करने की मांग की थी। यही नहीं कई कट्टर दल भी पिछले कुछ समय में पाक में उभरकर आए हैं, जोकि मुख्य राजनीतिक दलों को बड़ी चुनौती दे रहे हैं।

सत्ता में वापसी के लिए आतुर मुशर्रफ

सत्ता में वापसी के लिए आतुर मुशर्रफ

ऐसे हालात में मुशर्रफ अपनी पैठ को पाकिस्तान में मजबूत करना चाहते हैं, इसी के चलते उन्होंने 23 छोटे दलों के साथ गठबंधन की बात कही थी। जिस तरह से हाफिज सईद को हाल ही में बरी किया गया था उसके बाद वह इस मौके को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें उम्मीद है कि हाफिज सईद उनके साथ आ सकता है और यह उनके लिए सकारात्मक हो सकता है। 74 वर्ष की आयु में मुशर्रफ एक बार फिर से सत्ता का स्वाद चखना चाहते हैं। बहरहला यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि यह सब पाकिस्तान को किस ओर लेकर जाएगा, वह भी तब जब खुद पाकिस्तान लगातार हिंसा और आतंकवाद के चलते अपने लोगों की जान गंवा रहा है। आपको बता दें कि हाफिज सईद भारत व अमेरिका के लिए वांटेड आतंकवादी है, उसपर 2008 में मुंबई हमलों को अंजाम देने का आरोप है, जिसमे 166 लोगों की जान चली गई थी। उनके सिर पर अमेरिका ने 10 मिलियन यूएस डॉलर का इनाम रखा है।

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