तोशाखाना मामला क्या है, जो बना इमरान खान के विरोधियों का हथियार, लाहौर हाईकोर्ट ने भी नामांकन पत्र खारिज
Imran Khan News: लाहौर हाई कोर्ट में स्थापित एक अपीलीय न्यायाधिकरण ने लाहौर में एनए-122 निर्वाचन क्षेत्र से पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान के नामांकन पत्र को खारिज करने के रिटर्निंग अधिकारी (आरओ) के फैसले को बरकरार रखा है।
पाकिस्तान चुनाव आयोग के एक वकील ने ट्रिब्यूनल के समक्ष दलील दी थी, कि पीटीआई संस्थापक को अयोग्य ठहराया गया है, क्योंकि उनका प्रस्तावक एनए-122 निर्वाचन क्षेत्र से नहीं था। अपीलीय न्यायाधिकरण के न्यायाधीश तारिक नदीम ने दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया।

30 दिसंबर 2023 को लाहौर और उनके गृहनगर मियांवाली में से भी नेशनल असेंबली निर्वाचन क्षेत्र के लिए इमरान खान का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया था।
पूर्व प्रधान मंत्री, जिन्हें तोशाखाना मामले में सार्वजनिक पद संभालने से पांच साल के लिए अयोग्य ठहराया गया है, उन्होंने 8 फरवरी 2024 को होने वाले चुनावों के लिए लाहौर के एनए-122 और मियांवाली के एनए-89 निर्वाचन क्षेत्रों से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था, लेकिन दोनों जगहों से उनके नामांकन को रद्द कर दिया गया है, जिसके बाद अब इमरान खान का चुनाव लड़ना करीब करीब असंभव हो गया है।
लिहाजा, आइये जानते हैं, कि तोशाखाना मामला क्या है, जिसने इमरान खान की राजनीतिक जीवन को बर्बाद कर दिया है।
तोशाखाना मामला क्या है?
तोशेखान (तोशखाना) का अर्थ सरकारी खजाना है और ये विभाग कैबिनेट डिवीजन के प्रशासनिक शाखा के नियंत्रण में आता है। भारत और पाकिस्तान में नेताओं के अलावा सरकारी पदों पर तैनात तमाम बड़े अधिकारियों को विदेशों से मिलने वाले किसी भी उपहार को सरकारी खजाने में जमा कराना होता है।
तोशाखान नियमों के मुताबिक, जिन लोगों पर ये नियम लागू होते हैं, उन्हें मिलने वाले उपहारों की जानकारी कैबिनेट डिवीजन को दिया जाना जरूरी है। और इमरान खान पर आरोप हैं, कि उन्होंने किसी भी नियम का पालन नहीं किया।
इमरान खान साल 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद वे अलग-अलग देशों की यात्रा पर गए। यूरोप और अरब देशों की यात्रा करने के दौरान उन्हें कई कीमती उपहार मिले थे।
इन गिफ्ट्स में एक Graff घड़ी, कफलिंक का एक जोड़ा, एक महंगा पेन, एक अंगूठी और चार रोलेक्स घड़ियां सहित कई अन्य उपहार भी थे। इमरान खान ने इन उपहारों को तो तोशेखान में जमा करा दिया था, लेकिन बाद में इन्हें सस्ते दामों पर खरीद लिया और खूब मुनाफे में बेचा। इस पूरी प्रक्रिया को उनकी सरकार ने बाकायदा कानूनी अनुमति दी थी।
जब इसका खुलासा हुआ तो इमरान खान ने पहले कहा था, कि ये उनके गिफ्ट हैं, जो उन्हें निजी तौर पर दिए गए हैं, इसलिए इन पर उनका हक है, यह उनकी मर्जी है कि वह इन गिफ्ट को अपने पास रखें या नहीं। लेकिन, जब वो कानूनी तौर पर फंसने लगे, तो उन्होंने बहाना बनाया, कि वह इस बारे में कुछ भी नहीं बता सकते हैं, क्योंकि इससे अन्य देशों के साथ पाकिस्तान के संबंध खतरे में पड़ जाएंगे।
बाद में इमरान खान पर दबाव और बढ़ा, तो उन्होंने कुबूल किया कि तोशाखान से इन सभी गिफ्ट्स को 2.15 करोड़ रुपए में खरीदा था, बेचने पर उन्हें 5.8 करोड़ रुपए मिले थे। बाद में खुलासा हुआ कि इमरान खान ने ये गिफ्ट्स बेचकर 20 करोड़ से भी ज्यादा पाकिस्तानी रुपये कमाए थे, जिसको लेकर उन्हें पांच साल जेल की सजा सुनाई गई है। हालांकि, फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा को सस्पेंड कर दिया है, लेकिन चुनाव आयोग ने उनकी अयोग्यता को अभी तक नहीं हटाया है।












Click it and Unblock the Notifications