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पाकिस्तान के हथियार भंडार को खत्म कर सकता है भारत.. भारत के अग्नि-5 को लेकर टॉप अमेरिकी वैज्ञानिक की चेतावनी

Top US Scientis on Indian Agni-5 Missile: भारत ने 11 मार्च को मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल (MIRV) टेक्नोलॉजी के साथ अग्नि-5 मिसाइल का कामयाबी के साथ टेस्ट कर लिया है, लेकिन भारत की इस कामयाबी ने अमेरिका के टॉप वैज्ञानिक को आगबबूला कर दिया है।

लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 के कामयाब परीक्षण के बाद भारत ने प्रतिष्ठित MIRV न्यूक्लियर क्लब में शामिल होने के लिए अपनी दावेदारी का ऐलान कर दिया है और भारत की इस क्षमता को लेकर कहा जा रहा है, कि अब भारत अपने दो आक्रामक परमाणु शक्ति संपन्न दुश्मनों चीन और पाकिस्तान के खिलाफ एक और विनाशक हथियार हासिल कर लिया है।

agni-5 missile Top US Scientist Slams India

भारत अब MIRV टेक्नोलॉजी वाले देशों के विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है, जो चीन की मौजूदा डिफेंस रणनीतियों को फेल कर देगा। हालांकि, भारत की नीति हमेशा से यही रही है, कि वो पहले परमाणु बम का इस्तेमाल ना करेगा, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है, कि MIRV टेक्नोलॉजी हासिल करने के बाद भारत आगे बढ़कर भी परमाणु हथियारों का इस्तेमाल अपने दुश्मन के खिलाफ कर सकता है।

भारत की क्षमता से बौखलाए अमेरिकि वैज्ञानिक

जैसे ही भारत के राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री ने स्वदेशी रूप से विकसित अग्नि-V 'दिव्यास्त्र' के परीक्षण की सफलता की घोषणा की, ठीक वैसे ही दुनियाभर के एक्सपर्ट्स अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं देने लगे। हालांकि, भारत ने अभी तक इस मिसाइल की सीमा और यह कितना हथियार एक साथ ले जा सकती है, इसका खुलासा नहीं किया है।

लेकिन, फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के न्यूक्लियर इन्फॉर्मेशन प्रोजेक्ट के डायरेक्टर हंस क्रिस्टेंसन ने भारत के अग्नि-5 मिसाइल टेस्ट को लेकर निराशा जताई है। क्रिस्टेंसन ने कहा, "START II MIRV प्रतिबंध से दूर जाने का अमेरिका/रूस का निर्णय कम बुद्धिमानी भरा लग रहा है, क्योंकि अब ज्यादा से ज्यादा देश MIRV हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।"

2021 में एक लेख में उन्होंने कहा था, कि अगर भारत अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों के ऑपरेशन के लिए MIRV क्षमता हासिल करने में कामयाब हो जाता है वह "कम मिसाइलों के साथ अधिक लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम होगा।"

उन्होंने कहा था, कि "यदि किसी भी देश को विश्वास है, कि भारत संभावित रूप से पाकिस्तान के खिलाफ पहला हमला या महत्वपूर्ण हमला कर सकता है, तो एक गंभीर संकट परमाणु हमला हो सकता है। MIRV टेक्नोलॉजी के साथ भारतीय मिसाइलें, दुश्मन के मिसाइल लॉन्च होने से पहले ही उसके ठिकाने को ध्वस्त कर देंगी और इस टेक्नोलॉजी से बने हथियार भारत के सबसे प्रमुख हथियार बन जाएंगे, क्योंकि भारत इससे अपने होने वाले नुकसान को काफी कम कर सकतचा है। इसके अलावा, भारत के नीति निर्माता, युद्ध की संभावित परिस्थितियों में पाकिस्तान के हथियार भंडार को पहले ही निष्क्रिय कर सकते हैं।"

क्रिस्टेंसन की मानें, तो MIRV क्षमता "भविष्य में भारत को अपने परमाणु भंडार में वृद्धि करने में काफी ज्यादा मदद करेगी, खासकर यदि इसकी प्लूटोनियम उत्पादन क्षमता गैर-सुरक्षित ब्रीडर रिएक्टरों का उपयोग कर सकती है, जो वर्तमान में निर्माणाधीन हैं।"

भारत तेजी से बनाएगा परमाणु हथियार?

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि भारत के पास करीब 700 किलोग्राम (लगभग 150 किलोग्राम प्लस या माइनस) हथियार बनाने लायक प्लूटोनियम है, जो 138 से 213 परमाणु हथियारों के निर्माण के लिए पर्याप्त है। International Panel on Fissile Materials 2022 की रिपोर्ट में कहा गया है, कि हालांकि, सभी सामग्री को अभी परमाणु हथियार में बदला नहीं किया गया है।

लेकिन, ऐसा अनुमान है कि भारत ने 160 परमाणु हथियार का उत्पादन किया है। वर्तमान में विकसित की जा रही नई मिसाइलों को हथियारों से लैस करने के लिए भारत को ज्यादा से ज्यादा परमाणु हथियारों की जरूरत होगी, लिहाजा भारत तेजी से अपने परमाणु हथियारों के भंडार को बढ़ाएगा।

भारत के हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम का स्रोत मुंबई के पास भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र परिसर में परिचालन ध्रुव प्लूटोनियम उत्पादन रिएक्टर और 2010 तक, उसी स्थान पर CIRUS रिएक्टर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की योजना कम से कम एक और रिएक्टर का निर्माण करके अपनी प्लूटोनियम उत्पादन क्षमता का विस्तार करने की है। प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) में ईंधन पहले ही लोड किया जा चुका है, जो जल्द ही काम करने लायक स्थिति में होगा। एक बार चालू होने के बाद, भारत रूस के बाद वाणिज्यिक रूप से संचालित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्षमता वाला दूसरा देश होगा।

परमाणु मिसाइलों, मिसाइल रक्षा और तोपखाने पर भारतीय विद्वान देबलीना घोषाल, जिन्होंने 'अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों की भूमिका' नाम की एक किताब भी लिखा है, उनका मानना है, कि MIRVed मिसाइल दुश्मन की मौजूदा मिसाइल रक्षा प्रणाली को भेदने में मदद कर सकती है, जिससे भारत की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी।

Agni-V की क्षमता कितनी है?

साल 2021 में अग्नि-5 मिसाइल को लेकर जो यूजर ट्रायल किया गया था, उसके मुताबिक अग्नि-5 मिसाइल 5 हजार किलोमीटर की दूरी तक हमला करने में सक्षम है और ये अपने साथ 1.5 टन की वजन वाला परमाणु बम ले जा सकती है।

भारत का वो पहला तीन-स्टेज वाला इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यूजर ट्रायल था, जिसे भारत के स्ट्रैटिजिक फोर्सेज कमांड (एसएफसी) में शामिल किया गया था, जो भारत के परमाणु शस्त्रागार और वैक्टर की देखभाल करती है।

50 टन वजनी अग्नि-V की ऑपरेशनल तैनाती ने चीन के खिलाफ भारत की प्रतिरोधक क्षमता को काफी बढ़ा दिया है, जिसके पास डोंग फेंग-41 जैसी मिसाइलें हैं, जिसकी क्षमता 12,000-15,000 किलोमीटर की रेंज के बीच है। चीन अपने DF-41 मिसाइल से किसी भी भारतीय शहर पर हमला कर सकता है, लेकिन अग्नि-V मिसाइल के साथ भारत को चीन के सबसे उत्तरी हिस्से तक मार करने वाला हथियार मिल गया है, और इसीलिए चीन में हलचल बढ़ गई है।

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