अमेरिका से निपटने के लिए पश्चिम में अपनी ताकत को बढ़ा रहे चीन और रूस- रिपोर्ट
लंदन। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के सैन्य वर्चस्व को चुनौती देने के लिए चीन और रूस ने तैयारियां कर ली है। लंदन की एक अग्रणी थिंक टैंक ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि पश्चिम अब अपने सामरिक लाभ पर ज्यादा भरोसा नहीं कर सकता। थिंक टैंक आईआईएसएस (International Institute of Strategic Studies) ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जहां अब तक यह माना जा रहा था कि दुनिया में बड़ी शक्तियों के बीच अब युद्ध अपरिहार्य नहीं रहा है, वहीं अमेरिका, रूस और चीन जैसे मुल्क सिस्टेमेटिक ढंग से संघर्ष की तैयारी में जुट गए हैं।

एयर में होगा चीन का वर्चस्व
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपने हथियारों की दौड़ में तेजी से आगे निकलता हुआ, जबरदस्त ढंग से विस्तार करने में जुटा है। एयर में 2020 तक चीन लड़ाकू विमानों का वर्चस्व होगा, जिसमें उनका चेंग्दू J-20 कॉम्बेट एयरक्राफ्ट भी शामिल है। इस बीच चीन अपने PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल टेक्नोलॉजी का विस्तार करने में जुटा है, जो इलेक्ट्रॉनिक स्कैन किए गए रडारों से लैस होगी। दुनिया में यह टेक्नोलॉजी कुछ ही देशों के पास है। इस रिपोर्ट की माने तो आने वाले टाइम में हवा में लड़ने के लिए चीन एयरक्राफ्ट्स का जबरदस्त वर्चस्व देखने को मिलेगा।

समुद्र में चीन की ताकत का अंदाजा है अमेरिका को
वहीं, समुद्र की बात करें तो एशिया में चीन की ताकत का अंदाजा तो अमेरिका भी देखकर हैरान हो गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 15 सालों में चीन ने अपनी समुद्री क्षमताओं में जबरदस्त ढंग से विस्तार किया है। चीन के पास वॉरशिप, युद्धपोत, डिस्ट्रॉयर्स और सबमरीन जापान, भारत और साउथ कोरिया से भी ज्यादा और ताकतवर है। इस रिपोर्ट के अनुसार, चीन के पिछले चार सालों में अपने नए युद्धपोतों और औक्सिलीरीज की कुल टन भार देखे, तो पूरी फ्रांस की नौसेना से भी काफी अधिक है।

सीरिया और यूक्रेन में रूस ने अपनी ताकत को दिखाया
इंडस्ट्रियल और फडंगि मुद्दों की वजह से आंशिक रूप से रूस की सैन्यकरण की गति भले ही धीमी है, लेकिन सीरिया और यूक्रेन में जिस तरह से पुतिन ने अपनी ताकत को दिखाया है, उससे मास्को की सैन्य की शक्ति को हल्के में बिल्कुल नहीं आंका जा सकता है। वहीं, साइबर अटैक के मामले में रूस कितना ताकतवर है, इसका अंदाजा अमेरिका को 2016 आम चुनाव में पता चल गया था।

पश्चिम में होगा रूस और चीन का अखाड़ा
अब पश्चिम अपनी सैन्य ताकत के लिए रूस और चीन की तरफ देख रही है आईआईएसएस के डायरेक्टर-जनरल और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. जॉन चिपमैन ने कहा, 'पश्चिम में कुछ सरकारें अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ावा देने के लिए रूस और चीन की तरफ देखेगी। हालांकि, इसके सफलता की कोई गारंटी नहीं है। चिपमैन ने कहा कि चीन के उभरते हुए हथियार विकास और व्यापक रक्षा-तकनीकी प्रगति से पश्चिमी देशों के लिए एक अन्वेषक के रूप मे उभरेगा।












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