खतरे की घंटी: 71 साल में तीसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक नुकसान, यहां 1 दिन में पिघल गई 22 गीगाटन बर्फ
ब्रुसेल्स, 1 अगस्त। औद्योगिक क्रांति के बाद से लगातार बढ़ता पृथ्वी का तापमान चिंता का विषय है। दुनिया के कई हिस्सों में इसके भयानक परिणाम देखने को मिल रहे है। भीषण, गर्मी, बाढ़, भूस्खलन, चक्रवात समेत कई प्राकृतिक आपदाएं तबाही मचा रही हैं। इस बीच अंटार्कटिका की पिघलती बर्फ और उससे समुद्री जलस्तर बढ़ने का खतरा इस बात की ओर इशारा है कि अब हम इंसानों को इसे गंभीरता से लेना होगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि ग्रीनलैंड में सिर्फ एक दिन में 22 गीगाटन बर्फ पिघल कर महासागरों में समा गया।

फ्लोरिडा को 2 इंच पानी में डुबो देने जितनी बर्फ
वैज्ञानिकों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण उच्च तापमान में वृद्धि के साथ पिछले एक सप्ताह में ग्रीनलैंड में इतनी भारी मात्रा में बर्फ गई। अकेले बुधवार को ही ग्रीनलैंड ने अपने 22 गीगाटन बर्फ को खो दिया। आप जानकर दंग रह जाएंगे कि इतनी बर्फ, अमेरिकी राज्य फ्लोरिडा को 2 इंच (5.1 सेमी) पानी में डुबो देने के लिए काफी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक बीते 7 साल में यह तीसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक नुकसान है।

1 डिग्री सेल्सियस बढ़ा पृथ्वी का तापमान
एक रिपोर्ट के मुताबिक 1760 में शुरू हुए औद्योगिक क्रांति के बाद से अब तक पृथ्वी के तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो रही है। कार्बन उत्सर्जन की वजह से पृथ्वी लगातार गर्म होती जा रही है, जिसका असर हमारे बर्फीले मैदानों में देखने को मिल रहा है। बीते सप्ताह ग्रीनलैंड में बर्फ पिघलने की यह तीसरी सबसे बड़ी घटना थी। इससे पहले वर्ष 1950 के बाद 2012 और 2019 में ऐसा देखने को मिला था।

एक दिन में पिघल गई 22 गीगाटन बर्फ
बर्फ की चादर की निगरानी करने वाले डेनिश सरकारी शोधकर्ताओं ने पोलर पोर्टल वेबसाइट पर प्रकाशित अपने रिपोर्ट में कहा कि बुधवार की घटना वाकई चिंता का विषय है क्योंकि अनुमान के मुताबिक उस दिन 22 गीगाटन बर्फ पिघल गई। हालांकि 2019 में इससे कहीं ज्यादा मात्रा में बर्फ पिघली थी। बेल्जियम में यूनिवर्सिटी ऑफ लीज के जलवायु वैज्ञानिक जेवियर फेटवेइस के अनुसार ग्रीनलैंड से पिघली बर्फ 12 गीगाटन पानी बनकर समुद्र में मिल गया।

एक गीगाटन बराबर एक अरब मीट्रिक टन पानी
उन्होंने कहा कि पिघले हुए बर्फ का 10 गीगाटन भाप बनकर वायुमंडल में मिल गया जिसके कुछ समय बाद भारी बर्फबारी के रूप में वापस जमीन पर गिरने की संभावना है। आपको बता दें कि एक गीगाटन बर्फ, एक अरब मीट्रिक टन या 2.2 ट्रिलियन पाउंड के पानी के बराबर। वैज्ञानिकों इस प्राकृतिक घटना के पीछे गर्म हवाओं को बताया है जो बर्फीले मैदानों को ऊपर फंस गई है। डेनिश मौसम विज्ञान संस्थान के मुताबिक उत्तरी ग्रीनलैंड में तापमान 20 डिग्री सेल्सियस (68 फारेनहाइट) से अधिक होने की संभवना जताई है जो कि गर्मियों के मौसम से भी दोगुना है।

इस वजह से गंभीर हो सकती है स्थिति
गुरुवार को इलाके में 23.4 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। वैज्ञानिक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि वायुमंडन में गर्म हवाएं फंसती रहीं तो इससे एक ऐसा लूप बनेगा जो जमी हुई बर्फ को और तेजी से पिघला सकता है। इसके पीछे एक कारण सूर्य की किरण है जो बर्फ पर पड़ते ही प्रतिबिंबित हो जाती है लेकिन जमीन से टकराने के बाद पृथ्वी उसकी गर्मी को अवशोषित कर लेती है। इस वजह से भी बर्फ पिघलने की रफ्तार बढ़ सकती है।

25% बढ़ा वैश्विक समुद्र स्तर
कोलंबिया विश्वविद्यालय के एक जलवायु वैज्ञानिक मार्को टेडेस्को ने कहा कि जैसे ही बर्फ पिघलती है, यह गहरे रंग की बर्फ या नीचे की जमीन को सूर्य के संपर्क में ला देगी। जो सूर्य की रोशनी को वायुमंडल से वापस परावर्तित करने के बजाय अधिक अवशोषित करती है। यह घटना वास्तव में सामन्य बर्फ पिघलने के मौसम के प्रति अधिक संवेदनशील स्थिति पैदा कर देती है। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर से पिघलना, अंटार्कटिका के बाद पृथ्वी पर दूसरी सबसे बड़ी घटना है। इसकी वजह से पिछले कुछ दशकों में वैश्विक समुद्र स्तर में लगभग 25% वृद्धि देखी गई है।
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