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तबाही का खतरा बरकरार: 10 दिन के अंदर अंटार्कटिका से दूसरी टेंशन वाली खबर, बर्फ के नीचे मिलीं झीलें

नई दिल्ली, 8 जुलाई: ग्लोबल वार्मिंग के चलते प्रकृति पर बहुत ही बुरा असर पड़ रहा है। अभी तो इंसानी सभ्यता इसको हल्के में ले रही, लेकिन भविष्य में ये एक बड़ी मुसीबत बन सकती है। अब अंटार्कटिका को लेकर 10 दिन के अंदर दूसरी टेंशन भरी खबर सामने आई है। जिसके मुताबिक वहां बर्फ की चादर ऊपर से शांत और स्थिर है, लेकिन वो धीरे-धीरे अपनी नींव खो रही। जिस वजह से वहां पर कई झीलें बन गई हैं।

130 से ज्यादा सक्रिय झीलें

130 से ज्यादा सक्रिय झीलें

जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक अंटार्कटिका की जल प्रणाली में 130 से अधिक सक्रिय झीलें हैं। इनके विकास की वजह से बर्फ की चादर की गतिशीलता में एक बड़ी अनिश्चितता बनी हुई है। रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि अंटार्कटिका जल प्रणाली एक रहस्य बनी हुई थी, लेकिन 2007 में वैज्ञानिकों ने इसका पता लगाना शुरू किया। इसके बाद स्क्रिप्स इंस्टीट्यूशन ऑफ ओशनोग्राफी के ग्लेशियोलॉजिस्ट हेलेन अमांडा फ्रिकर ने इस क्षेत्र में सबग्लिशियल झीलों को समझने में मदद की।

नासा ने की मदद

नासा ने की मदद

वहीं बर्फ की चादर के नीचे होने वाले परिवर्तनों को समझने के लिए अर्थ ऑब्जर्विंग लेजर इंस्ट्रूमेंट की मदद ली गई। इसके लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने पहले से ही वैज्ञानिकों को ट्रेंड कर दिया था। अध्ययन में पाया गया कि बर्फ की चादर के नीचे झीलों का पूरा नेटवर्क है, जो समय के साथ भरती और बहती हैं। ऐसे में साफ है कि ये अंटार्कटिका की प्रणाली को प्रभावित कर रही हैं।

क्यों है खतरा?

क्यों है खतरा?

अंटार्कटिका पृथ्वी का दक्षिणतम महाद्वीप है, जो पूरी तरह से बर्फ से ढका है। इसके अलावा ये एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका के बाद पृथ्वी का पांचवां सबसे बड़ा महाद्वीप है, जो 140 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है। इसके ज्यादातर हिस्से पर बर्फ है। ऐसे में नींव कमजोर हुई, तो ग्लेशियर टूटकर गिरेंगे। जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा और तट के किनारे बसे इलाकों के डूबने का खतरा बढ़ जाएगा।

10 दिन पहले आई थी ये रिपोर्ट

10 दिन पहले आई थी ये रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र विश्व मौसम विज्ञान संगठन (यूएन डब्लूएमओ) ने 10 दिन पहले अंटार्कटिका के लिए एक और चिंताजनक खबर दी थी। जिसके मुताबिक इस साल वहां का अधिकतम तापमान 18.3 डिग्री सेल्सियस (64.9 डिग्री फारेनहाइट) रहा। इसके अलावा पिछले 50 सालों में वहां के तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है।

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