रूसी रॉकेट का रहस्य, पुतिन बोले दुरुस्त करेंगे
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उस परमाणु रॉकेट पर काम आगे बढ़ाने का वादा किया है, जिसके बारे में माना जाता है कि उसमें परीक्षण के दौरान हुए धमाके में पांच इंजीनियर और दो अन्य लोग मारे गए थे.
ये दुर्घटना आठ अगस्त की बताई जाती है. रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि ये परीक्षण परमाणु क्रूज़ मिसाइल का हिस्सा था.
मृतकों की विधवाओं से रूसी राष्ट्रपति ने कहा, ''कुछ भी हो, हम इस हथियार को दुरुस्त करेंगे.''
रूसी राष्ट्रपति ने कहा, ''इस तरह की अनुपम तकनीक अपने आप में बड़ी बेहद महत्वपूर्ण है जो भरोसेमंद होने के साथ धरती पर शांति की गारंटी भी है.''
पुतिन ने ये बात वृहस्पतिवार को तब कहीं जब क्रेमलिन में आयोजित समारोह में मृतकों को मरणोपरांत सम्मानित किया जा रहा था.
अगस्त की दुर्घटना कितनी गंभीर थी ?
रूस की न्यूक्लियर एजेंसी रोसातोम के मुताबिक, ये परीक्षण न्योनोस्का नेवल टेस्ट रेंज में किया जा रहा था कि तभी आग लगी, इंजन में धमाका हुआ और आसपास जो लोग थे, समुद्र में जा गिरे.
धमाके की वजह से कुल सात लोग मारे गए थे और छह अन्य घायल हुए थे.
धमाके की वजह से विकिरण का स्तर 16 गुना तक बढ़ गया था.
इसके बाद सफाई का काम भी बड़ी गोपनीयता से किया गया था.
आख़िर किसका परीक्षण किया जा रहा था ?
रूस ने बस इतनी पुष्टि की थी कि दुर्घटना के वक्त परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एक इंजन का परीक्षण किया जा रहा था.
अटकलें हैं कि ये कोई एंटी-शिप मिसाइल या लंबी दूरी का पानी के नीचे काम करने वाला ड्रोन हो सकता है.
लेकिन रूस और पश्चिम के विशेषज्ञों का मानना है कि ये संभवत: 9एम730 बूरेवेस्तनिक मिसाइल हो सकती है जिसे नैटो 'स्काइफॉल' के नाम से जानता है.
राष्ट्रपति पुतिन के मुताबिक इसकी रेंज 'अंतहीन' है.
इसे परमाणु हमले के जबाव के लिए तैयार किया गया है.












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