ADB के पैसा देने के इनकार से पाकिस्तान को भारी शर्मिंदगी

इमरान ख़ान
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पाकिस्तान को उस वक़्त शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब मनीला स्थित एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने 3.4 अरब डॉलर की मदद पाकिस्तान को देने की बात से इनकार किया.

इससे पहले, पाकिस्तानी सरकार ने कहा था कि उसे एडीबी से 3.4 अरब डॉलर का बजट सपोर्ट मिलेगा.

शनिवार को सरकार के दो सीनियर अधिकारियों ने घोषणा की थी कि एडीबी 3.4 अरब डॉलर पाकिस्तान को बजट सपोर्ट के रूप में देगा. इसके बाद प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के आर्थिक सलाहकार डॉ अब्दुल हफ़ीज़ शेख ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर कहा कि एडीबी के दो सीनियर अधिकारियों से उनकी बैठक हुई है. हफ़ीज़ ने भी एडीबी से आर्थिक मदद मिलने की पुष्टि की.

डॉ शेख ने कहा था एडीबी पाकिस्तान को बजट सपोर्ट के तौर पर 3.4 अरब डॉलर की राशि देगा. शेख ने कहा था कि एडीबी के साथ बैठक में उसके प्रोग्राम के तहत इस रक़म पर सहमति बनी है. डॉ शेख ने कहा था, ''एडीबी 3.4 अरब डॉलर बजट सपोर्ट के तौर पर देगा, जिससे हम अर्थव्यवस्था में सुधार और स्थिरता लाने की कोशिश करेंगे.''

प्रधानमंत्री के सलाहकार डॉ शेख ने यहां तक कह दिया कि एडीबी दो अरब डॉलर इस वित्तीय वर्ष में जारी करेगा. शेख ने कहा था कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार में स्थिरता आएगी. डॉ शेख ने कहा, ''यह मदद हमारी अर्थव्यवस्था में परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त होगी. हम आर्थिक सुधारों में एडीबी की प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं.''

एडीबी
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दूसरी तरफ़ इस्लामाबाद स्थित एडीबी कार्यालय ने रविवार छुट्टी के दिन बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट किया. एडीबी ने पाकिस्तान सरकार की घोषणा से ख़ुद को अलग कर लिया. पाकिस्तानी मीडिया में कहा जा रहा है कि एडीबी को शायद ही सरकार के किसी बयान का खंडन करने के लिए सामने आना पड़ा हो.

अपने बयान में एडीबी ने कहा है कि सरकार से क़र्ज़ को लेकर बात हुई है लेकिन अभी कोई भी फ़ैसला नहीं हुआ है. पाकिस्तान एडीबी के निदेशक शिओहोंग यांग ने कहा, ''यह बातचीत अभी चल रही है. अगर कोई क़र्ज़ पर फ़ैसला होता है तो इसे लेकर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक होगी.''

पाकिस्तान के अहम अख़बार डॉन का कहना है कि सरकार की इस घोषणा से एडीबी को शर्मिंदगी उठानी पड़ी है. कहा जा रहा है कि सरकार को बिना किसी फाइनल हुई बातचीत को किसी निर्णय की शक्ल में घोषित नहीं करना चाहिए था.

पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बीच हाल ही में 6 अरब डॉलर के क़र्ज़ को लेकर सहमति बनी थी. 39 महीने के आर्थिक सुधार के तहत आईएमएफ़ ने पाकिस्तान को यह क़र्ज़ दिया है.

पाकिस्तान आईएमएफ़ से छह अरब डॉलर का क़र्ज़ ले रहा है और इस क़र्ज़ के एवज में इमरान ख़ान की सरकार ने वादा किया है कि वो देश की आर्थिक नीतियां उसकी शर्तों के हिसाब से आगे बढ़ाएंगे. पाकिस्तान पर दबाव है कि अगले 12 महीने में 700 अरब रुपए के फंड की व्यवस्था करे.

पाकिस्तान
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पाकिस्तान में राजस्व घाटा आसमान छू रहा है तो भुगतान संतुलन भी पटरी से उतर गया है. क़र्ज़ के बदले ख़ुदकुशी की बात करने वाले इमरान ख़ान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की शरण में जाना पड़ा. आईएमएफ़ से पाकिस्तान का यह 22वां क़र्ज़ है. पाकिस्तान के कुल खर्चों का 30.7 फ़ीसदी हिस्सा क़र्ज़ों की किस्तों के भुगतान में चला जाता है.

पाकिस्तान का खर्च आयात पर लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन निर्यात से कुछ भी हासिल नहीं हो रहा है. पाकिस्तान ने अपनी आर्थिक सेहत नहीं सुधारी तो डिफॉल्टर होने का ख़तरा और बढ़ जाएगा. 2015 में पाकिस्तान का चालू खाता घाटा 2.7 अरब डॉलर था जो 2018 में बढ़कर 18.2 अरब डॉलर हो गया.

करंट अकाउंट डेफिसिट के कारण पाकिस्तान का व्यापार घाटा बढ़ता जा रहा है.

चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के कारण पाकिस्तान का आयात लगातार बढ़ता गया. सीपीईसी चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना वन बेल्ट वन रोड का हिस्सा है जिसके तहत उसने पाकिस्तान में क़रीब 60 अरब डॉलर का निवेश किया है.

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